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टाइम मशीन : जो कभी दोस्त थे, अब एक-दूसरे को खत्म कर देने की यलगार है

अंशुमान तिवारी
Updated Sun, 22 Jun 2025 06:41 AM IST

सार

इस्राइल-ईरान की जंग के बीच अब न तेहरान सुरक्षित है और न तेल अवीव। ईरान को इस्राइल का अंत चाहिए और इस्राइल को चाहिए ऐसा ईरान, जिसके पास परमाणु हथियारों की ताकत न हो। वैसे इतिहास के इस दोहराव में हर बार जान-ओ-माल पहले से ज्यादा खतरे में होते हैं।
 
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ईरान-इस्राइल जंग। - फोटो : अमर उजाला प्रिंट


यह ईसा के जन्म से 550 साल पहले का फारस है। सामने पासारगदाए का मैदान। 21वीं सदी में ईरान में यह जगह फार्स सूबे में होगी और साइरस द ग्रेट का स्मारक देखने को पर्यटकों की कतारें लगेंगी। सामने विशाल मैदान से उठ रही धूल भरी हवा तलवारों की झनझनाहट और घोड़ों की टापों की आवाज लेकर आ रही है। वह देखिए, उस नौजवान योद्धा साइरस को, जो अपने दादा, मेडिया के राजा अस्त्याज की सेना से भिड़ा है। साइरस की आंखों में आग तो देखिए। अचानक, मेडिया सेनापति हर्पागस अपनी सेना को रोक देता है। वह साइरस की ओर मुड़ता है और अपनी तलवार नीचे कर देता है। विश्वासघात! सैनिक हैरान, मेडिया की सेना बिखर जाती है। साइरस की जीत का नगाड़ा बज रहा है। अब साइरस के तंबू की तरफ चलते हैं, जहां सैनिक ‘अकेमेनिद’ चिल्ला रहे हैं। यह लफ्ज साइरस के पुरखे और सम्राट अकेमेनिस के नाम से निकला है, जो ईसा पूर्व 800 में उत्तर पश्चिमी ईरान और असीरिया पर राज करता था।


अकेमेनिद की आवाज को गौर से सुनिए। मेडिया के पतन के साथ एक साम्राज्य का जन्म हो चुका है। यहां से उभरेगा दुनिया का सबसे महान शासक साइरस द ग्रेट।


टाइम मशीन अब हमें पश्चिम में लीडिया ले आई है। जगह है थिम्ब्रा, और हम 547 ईसा पूर्व में हैं। टाइम मशीन एक पहाड़ी पर उतर रही है। नीचे थिम्ब्रा का युद्ध चल रहा है। लीडिया का राजा क्रोएसस, जिसका खजाना दुनिया की आंखों को चौंधियाता है, अपनी घुड़सवार सेना के साथ साइरस से मुकाबिल है। यह क्या! साइरस ने अजीब-सी चाल चल दी है। क्रोएसस की कैवेलरी के सामने ऊंटों की एक सेना भेज दी है। लीडिया के घोड़े ऊंटों की गंध से बिदक रहे हैं। सेना में भगदड़ मच गई है। और वह देखिए, क्रोएसस का सुनहरा ताज धूल में लोट रहा है। लीडिया का साम्राज्य अब इतिहास बन जाएगा। अब हम वक्त के उस मोड़ पर पर हैं, जिसे देखने के लिए 2025 से इतने पीछे आए हैं। रात का अंधेरा है। टाइम मशीन से उतरकर दबे पांव आगे बढ़ना होगा। हम महान बेबीलोन की दीवारों के साये में चल रहे हैं। यूफ्रेटीस नदी, जो शहर की रक्षा करती थी, आज सूखी पड़ी है। दरअसल, साइरस के सेनापति उगबरु ने चुपके से नदी का पानी मोड़ दिया है। साइरस के सैनिक नदी के सूखे रास्ते पर चल रहे हैं। उनके कदमों की आवाज में खुद को छिपाते हुए चलते चले आइए। साइरस शहर में दाखिल हो रहा है, बिना तलवार उठाए। बेबीलोन में पौ फट रही है। साइरस मरदुक के मंदिर में प्रवेश कर रहे हैं। बेबीलोन के लोग उन्हें मसीहा की तरह नवाज रहे हैं। चेहरे पर विजेता की मुस्कान है, लेकिन आंखों में करुणा। बेबीलोन की गलियों में वह हुजूम देख रहे हैं आप। ये यहूदी हैं, जिन्हें बेबीलोनियन राजा ने यरुशलम से खदेड़ दिया था। उनके चेहरों पर निराशा है, लेकिन आंखों में उम्मीद। उन्हें साइरस का फरमान सुनाया जाता है, ‘यरुशलम लौटो। तुम्हारा मंदिर बनेगा-मेरे खजाने से।’ लोग रो रहे हैं, गा रहे हैं। एक बूढ़ा यहूदी साइरस के पैरों में झुकता है, उसे ‘मसीहा’ कहता है। साइरस उसे उठाते हुए कहते हैं, ‘तुम्हारा घर तुम्हारा है।’


यहूदी काफिले यरुशलम की तरफ निकल पड़े हैं। अब जरा तेजी से आगे बढ़ते हैं। यह ईसा पूर्व पांचवीं सदी है। हम सूसा शहर की तरफ जाएंगे। सामने सूसा का भव्य दरबार है। सोने की सजावट, रेशमी पर्दे, लेकिन हवा में साजिश की गंध है। लोग बता रहे हैं कि अहंकारी वजीर हामान एक यहूदी अधिकारी मर्दकै से नाराज है। वजीर हामान ने राजा जर्क्सेस को भड़का दिया है, ‘ये यहूदी हमसे अलग हैं, इन्हें मिटा दो।’ जर्क्सेस ने अपनी अंगूठी दे दी है। साम्राज्य के हर कोने में यहूदियों के कत्लेआम का फरमान जारी हो गया है। यहूदी घरों से रोने की आवाजें उठ रही हैं। मगर जरा रुकिए, राजा जर्क्सेस की खूबसूरत रानी एस्तेर को साजिश का पता चल गया है। उसने राजा के सामने जाकर सच बयान करने का फैसला किया है। वह साहस बटोरती है, और हामान की साजिश उजागर करती है। हामान  वहीं है। उसका चेहरा सफेद पड़ जाता है। राजा का गुस्सा भड़कता है। हामान को उसी फंदे पर लटकाया जाता है, जो उसने मर्दकै के लिए बनवाया था। कत्लेआम का फरमान वापस हो गया है। गलियों में उत्सव है। यहूदी नाच रहे हैं, गा रहे हैं। पूरिम त्योहार का जन्म हो रहा है। अगली कई सदियों तक यहूदी मार्च के महीने में यह त्योहार मनाएंगे। बुक ऑफ एस्तेर से रानी की कहानी पढ़ेंगे। सजेंगे-संवरेंगे। मिठाई बांटेगे और दान देंगे। टाइम मशीन अब सातवीं सदी में आ गई है। हम इस्फहान में हैं। इस्लाम की जीत ने फारस को बदल दिया है। यहूदी बस्तियों में लोग अपने मंदिरों में प्रार्थना कर रहे हैं, उनके कपड़ों पर विशेष निशान हैं। वे सुरक्षित हैं, लेकिन अधीन हैं। एक यहूदी कवि फारसी में गा रहा है, ‘हम यहां हैं, लेकिन अपने नहीं।’


अब हम तेहरान में हैं। यह 1979 का ईरान है। सड़कों पर नारे गूंज रहे हैं। इस्लामी क्रांति ने सब बदल दिया। खुमैनी का बयान है, ‘यहूदी हमारे हैं, जायनिस्ट नहीं।’ लेकिन यह रेखा धुंधली है। यहूदी नेता हबीब एलघानियन को ‘जासूस’ बताकर फांसी दी गई है। यहूदी अपने घर छोड़कर इस्राइल, अमेरिका भाग रहे हैं। जो रहते हैं, वे खामोशी में जिएंगे। सिनेगॉग की प्रार्थनाओं में भय अधिक है, विश्वास कम। टाइम मशीन वापस 2025 में आ गई। इस्राइल-ईरान की जंग के बीच अब न तेहरान सुरक्षित है और न तेल अवीव। ईरान को इस्राइल का अंत चाहिए और इस्राइल को चाहिए ऐसा ईरान, जिसके पास परमाणु हथियारों की ताकत न हो। दुनिया के इतिहास का सबसे पेचीदा भूगोल फिर एक नया इतिहास बना रहा है या कि खुद को दोहरा रहा है? वैसे इतिहास के इस दोहराव में हर बार जान-ओ-माल पहले से ज्यादा खतरे में होते हैं। फिर मिलते हैं, अगले सफर पर...

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