स्वादिष्ट खाना खाने, शराब पीने, सोशल मीडिया पर स्क्रॉल करने या प्यार में पड़ने जैसी चीजों से हमें जो अल्पकालिक खुशी और आनंद मिलता है, उसमें डोपामाइन की भूमिका होती है। डोपामाइन सीखने, ध्यान और एकाग्रता बनाए रखने में भी सहायता करता है, तथा स्मृतियों को संग्रहीत करने में भी। डोपामाइन केवल तब सक्रिय नहीं होता, जब हम कोई आनंददायक काम करते हैं। यह पहले से ही सक्रिय होता है और हमें आनंद की तलाश करने के लिए प्रेरित करता है। मान लीजिए कि मैं किसी रेस्तरां में खाना खाता हूं और खाने का स्वाद लाजवाब होता है, तो डोपामाइन का स्तर बढ़ता है और मुझे आनंद की अनुभूति होती है। विकासवादी दृष्टिकोण से, वह डोपामाइन ही था, जिसने मनुष्यों को शिकार करने, भोजन तलाशने, आश्रय या सुरक्षा तथा साथी खोजने एवं प्रजनन के लिए प्रेरित किया। लेकिन आधुनिक तकनीक ने डोपामाइन के प्रभाव को बढ़ा दिया है, जिससे नकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग, जुआ, शराब पीना, नशीली दवाओं का उपयोग और गेमिंग जैसी गतिविधियां डोपामाइन के स्राव को उत्तेजित कर सकती हैं, जिससे लत और बाध्यकारी व्यवहार का चक्र बन सकता है। डोपामाइन हमारे मस्तिष्क और शरीर के कामकाज के लिए महत्वपूर्ण है, चाहे आनंद का अनुभव हो या न हो, इसलिए मस्तिष्क लगातार डोपामाइन की छोटी मात्रा स्रावित करता रहता है। मस्तिष्क खुद को नियंत्रित करने के लिए कड़ी मेहनत करता है और यह हमें लगातार उच्च डोपामाइन की स्थिति में रहने की अनुमति नहीं देता है। हम अपने शरीर में स्वस्थ तरीके से डोपामाइन को बढ़ा सकते हैं। चलने, दौड़ने, साइकिल चलाने या नृत्य करने से डोपामाइन का स्राव बढ़ सकता है, जिससे मूड बेहतर होता है और प्रेरणा बढ़ती है। संगीत सुनने और अपने प्रिय आत्मीय जनों के साथ बतियाने से भी डोपामाइन का स्तर बढ़ता है।