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भारतीय स्टार्टअप्स: दुनिया का तीसरा बड़ा ईको सिस्टम और समृद्ध-आत्मनिर्भर राष्ट्र के आगे बढ़ने की दास्तान

Surya Pratap Singh
Updated Fri, 26 Jan 2024 06:49 AM IST

सार

देश में महिला उद्यमियों की संख्या वर्ष 2023 तक लगभग 20 फीसदी बढ़ी है, जो पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक है। इन महिला उद्यमियों ने तकनीकी, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और खुदरा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति दर्ज की है।
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स्टार्टअप - फोटो : अमर उजाला


इसके अलावा, स्टार्टअप इंडिया पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार 3,682 स्टार्टअप्स को अब तक सिडबी के फंड ऑफ फंड्स योजना के तहत वित्त पोषित किया गया है, जिसका गठन 2016 में 10,000 करोड़ रुपये के कोष के साथ किया गया था। यह वित्तीय समर्थन न केवल उद्यमियों को अपने विचारों को साकार करने में मदद करता है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाने

के लिए भी प्रोत्साहित करता है।


विगत 26 दिसंबर को जारी की गई वाणिज्य मंत्रालय की वार्षिक समीक्षा के अनुसार, 1.14 लाख से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स ने अब तक 12 लाख से अधिक नौकरियां सृजित की हैं, जिसमें प्रत्येक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप द्वारा औसतन 11 नौकरियां सृजित की गई हैं। यह न केवल आर्थिक विकास का संकेत है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि उद्यमशीलता और नवाचार से सामाजिक और आर्थिक समृद्धि किस तरह साकार हो रही है। इस प्रक्रिया में महिला उद्यमियों का योगदान भी उल्लेखनीय है। अब वे सिर्फ घर संभालने वाली नहीं रही हैं, बल्कि बड़े-बड़े कारोबार चलाने वाली ताकत बन गई हैं।


ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश में महिला उद्यमियों की संख्या वर्ष 2023 तक लगभग 20 फीसदी बढ़ी है, जो पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक है। इन महिला उद्यमियों ने तकनीकी, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और खुदरा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति दर्ज की है। इसके अतिरिक्त इनमें से लगभग 35प्रतिशत महिला उद्यमी ग्रामीण क्षेत्रों से हैं, जो ग्रामीण विकास और महिला सशक्तीकरण के प्रति भारतीय समाज के बदलते रुख का संकेत है।


इन महिला उद्यमियों ने अपने व्यवसायों के माध्यम से नई नौकरियों का सृजन किया है, जिससे रोजगार के अवसरों में वृद्धि हुई है। एक अनुमान के अनुसार, इन महिला-नेतृत्व वाली कंपनियों ने पिछले वर्ष में लगभग पांच लाख नई नौकरियां पैदा की हैं। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि महिला उद्यमियों का योगदान न केवल आर्थिक विकास में है, बल्कि वे समाज के व्यापक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उनका यह प्रयास भारतीय समाज में लैंगिक समानता और सशक्तीकरण की नई दिशा का प्रतीक है। भारतीय स्टार्टअप्स का भविष्य आशाजनक और उज्ज्वल दिखाई देता है।


डिजिटलीकरण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, और टिकाऊ तकनीकी के क्षेत्रों में आगामी वर्षों में भारी वृद्धि की संभावना है। इन क्षेत्रों में नवाचार से न केवल देश के आर्थिक विकास में बल मिलेगा, बल्कि यह वैश्विक समस्याओं के समाधान में भी योगदान देगा। भारतीय स्टार्टअप्स अब वैश्विक बाजार में भी अपनी पहचान बना रहे हैं। विश्व भर में उनकी सफलता और उपलब्धियां साबित करती हैं कि भारतीय उद्यमिता और नवाचार की कोई सीमा नहीं है। इसके अलावा, विदेशी निवेश और वैश्विक सहयोग के अवसर भी बढ़ रहे हैं, जो भारतीय स्टार्टअप्स के लिए नए द्वार खोल रहे हैं।


इस गणतंत्र दिवस पर हमारा उद्देश्य एक ऐसे भारत की कल्पना करना है, जो उद्यमशीलता, नवाचार, और समावेशिता की नई परिभाषा गढ़े। भारतीय स्टार्टअप्स की यह यात्रा सिर्फ आर्थिक उन्नति की कहानी नहीं है, यह एक नए, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने की यात्रा भी है।
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