हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इस नए व्यापार युग के बदलाव के दौर में भारत के एमएसएमई के पास चुनौतियों के बीच आगे बढ़ने के ऐतिहासिक अवसर भी हैं और ये उद्योग वैश्विक आपूर्ति शृंखला में प्रतिस्पर्धी बन सकते हैं। इसमें दो मत नहीं है कि टैरिफ वार से एमएसएमई क्षेत्र को जो झटका लग रहा है, उससे उन्हें उबारने के लिए जहां एक ओर सरकार को चुनौतियों के समाधान के लिए रणनीति बनाकर निर्यातकों को सहारा देना होगा, वहीं एमएसएमई क्षेत्र के उद्यमियों और निर्यातकों को भी नई चुनौतियों के मद्देनजर तैयार रहना होगा।
महत्वपूर्ण है कि सरकार निर्यातकों को सहारा देने के लिए 2,250 करोड़ रुपये के निर्यात संवर्धन मिशन को तेजी से लागू करने और बिना रेहन के कर्ज देने की योजना बना रही है। साथ ही चालू वित्त वर्ष 2025- 26 में एमएसएमई को दिए जाने वाले कर्ज का लक्ष्य पिछले वर्ष की तुलना में करीब 20 फीसदी बढ़ाकर 17.5 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है। एमएसएमई क्षेत्र भी नवाचार, प्रतिस्पर्धा, क्षमता में सुधार तथा शोध की डगर पर आगे बढ़ने की तैयारी कर रहा है।
गौरतलब है कि एमएसएमई क्षेत्र देश के विनिर्माण, निर्यात और रोजगार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। देश में करीब 5.93 करोड़ पंजीकृत एमएसएमई हैं, जिनमें 25 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिला हुआ है। जीडीपी में एमएसएमई का योगदान करीब 30 फीसदी है। एमएसएमई से वर्ष 2024-25 में करीब 12.39 लाख करोड़ रुपये का निर्यात किया गया है। देश से निर्यात किए गए कुल उत्पादों में से करीब 46 फीसदी एमएसएमई क्षेत्र से हैं। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने ट्रंप के टैरिफ से एमएसएमई के समक्ष उत्पन्न विभिन्न चुनौतियों के मद्देनजर मौजूदा वित्त वर्ष 2025-26 में इस क्षेत्र को मजबूत करने के लिए बहुआयामी उपायों की एक शृंखला प्रस्तुत की है। इसके तहत प्रमुख पहलों में उद्यम पंजीकरण पोर्टल, पीएम विश्वकर्मा योजना, पीएमईजीपी, स्फूर्ति और एमएसई के लिए सार्वजनिक खरीद नीति शामिल हैं, जिनका उद्देश्य उद्यमिता को प्रोत्साहन देना, रोजगार बढ़ाना और अनौपचारिक क्षेत्रों को औपचारिक अर्थव्यवस्था में एकीकृत करना है। उद्योगों का विस्तार और दक्षता में सुधार करने में मदद करने के लिए एमएसएमई वर्गीकरण के लिए निवेश और टर्नओवर सीमा बढ़ा दी गई है।
निर्यातकों को सहारा देने के लिए सरकार के ये कदम सराहनीय हैं। लेकिन टैरिफ का मुकाबला करने और भविष्य में उभरते अवसरों का फायदा उठाने के लिए एमएसएमई को मजबूत बनाना होगा। नए सिरे से एमएसएमई की क्षमताओं को उन्नत करने, संचालन को सुव्यवस्थित करने तथा किसी भी निर्यात संबंधी झटके से निपटने के लिए एमएसएमई को नीतिगत समर्थन का लाभ देने के प्रयासों में तेजी लानी होगी। तभी एमएसएमई उतार-चढ़ाव भरे सफर में आगे बढ़ सकेगी।
बुनियादी ढांचे की मजबूती, अधिक लॉजिस्टिक्स सुविधाएं, कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराने, ब्याज समतुल्य योजना को फिर से शुरू करने तथा ऋण गारंटी कार्यक्रमों का विस्तार करने जैसे उपायों से एमएसएमई को वित्तीय राहत और स्थिरता प्रदान की जा सकती है। सरकार को एमएसएमई की सुविधा के लिए जीएसटी व्यवस्था को सरल करना होगा। एमएसएमई के हित में उत्पादन से जुड़ा प्रोत्साहन (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेटिव-पीएलआई) योजनाओं का विस्तार करने से निर्यात-उन्मुख एमएसएमई लाभान्वित होंगे।
नवाचार की नई लहर एमएसएमई के लिए नया अध्याय लिख सकती है। भारत टैरिफ की चुनौतियों को एमएसएमई के लिए उभरते नए अवसरों के दौर में बदल सकता है। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय कारोबार समझौता (बीटीए) के लिए की जा रही वार्ता निष्कर्ष पर पहुंचने के करीब है। बीटीए जितनी जल्दी अंतिम रूप लेने के बाद कार्यान्वयन की डगर पर आगे बढ़ेगा, उतनी ही तेजी से देश के एमएसएमई लाभान्वित होते हुए दिखाई देंगे।
हम उम्मीद करें कि सरकार एमएसएमई के समक्ष दिखाई देने वाली चुनौतियों के समाधान के लिए तत्परता से रणनीतिक कदम उठाएगी और एमएसएमई से संबद्ध उद्यमी और निर्यातक नवाचार, प्रतिस्पर्धा, शोध और विकास के मंत्रों के साथ नए वैकल्पिक बाजारों में कदम बढ़ाते हुए दिखाई देंगे।