देश में मौजूद पाकिस्तानी नागरिकों की ऐसी ही खबरें और संख्याएं दूसरे राज्यों से भी मिल रही हैं, जो जितनी चौंकाने वाली हैं, उतनी ही चिंतित करने वाली बात यह भी है कि ये सिर्फ आधिकारिक सूचियां हैं, देश में बगैर किसी दस्तावेज के अवैध ढंग से रह रहे पाकिस्तानी-बांग्लादेशियों की संख्या इससे कहीं ज्यादा भी हो सकती है। पहलगाम में हुए आतंकी हमले के पीछे पाकिस्तान की भूमिका के मद्देनजर सरकार का पाकिस्तानी नागरिकों को भारत छोड़ने का आदेश तार्किक व समयानुकूल तो है ही, यह संदेश भी देता है कि अब भारत अपनी सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करेगा।
पहलगाम हमले को अब पाकिस्तान ‘फॉल्स फ्लैग’ बताकर और जटिल करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन जब उसके रक्षा मंत्री खुद आतंकवाद के समर्थन की स्वीकारोक्ति कर चुके हैं, तो संदेह की कोई गुंजाइश ही नहीं हो सकती। हालांकि, दिल्ली में पाकिस्तानी नागरिकों की उपस्थिति अपने आप में संदिग्ध नहीं हो जाती-कई लोग, छात्र, पेशेवर या वैध कारणों से भारत में रहने वाले आगंतुक हो सकते हैं। यह स्थिति भारत-पाकिस्तान संबंधों की गहरी जटिलताओं को उजागर करती है, लेकिन यह भी सच है कि जब बात राष्ट्रीय सुरक्षा की हो, तब कई बार कठोर निर्णय लेने ही पड़ते हैं और पहलगाम हमले ने सरकार को ऐसे ही सख्त कदम उठाने के लिए मजबूर किया है।
इससे यह भी स्पष्ट होता है कि भारत अब न तो अपने नागरिकों की सुरक्षा को संकट में डालने देगा, न ही अपने आतिथ्य का दुरुपयोग होने देगा। जब राष्ट्र पर संकट हो और रक्षा व विदेश नीतियों की समयानुरूप मांग हो, तब ऐसे कदम उठाने ही पड़ते हैं। पुलिस और संबंधित एजेंसियों से अपेक्षा है कि वे इस प्रक्रिया को तमाम व्यावहारिक जटिलताओं व अड़चनों के बावजूद शीघ्रता, दक्षता और निष्पक्षता के साथ पूरा करें और महत्वपूर्ण मामलों को केस-टु-केस आधार पर हल करने का प्रयास करें। नागरिकों को भी सरकार के इस प्रयास में सहयोग करना चाहिए, क्योंकि राष्ट्रीय सुरक्षा एक साझा उत्तरदायित्व है।