प्रॉपर्टी के खरीदारों के लिए अब वाकई अच्छे दिन आ गए हैं। प्रॉपर्टी बाजार मंदी से जूझ रहा है और ग्राहकों के लिए खरीदारी के अच्छे मौके हैं, पर अब जीएसटी और रेरा (रियल एस्टेट रेगुलेशन ऐक्ट) के आ जाने से आने वाले दिनों में उनके लिए और बढ़िया अवसर आ जाएंगे। अभी मकानों या प्लॉटों की कीमतों में गिरावट का जो दौर है, वह आगे भी जारी रहेगा,पर फर्क यह होगा कि इसकी मार बिल्डरों और रियल एस्टेट प्रमोटरों पर नहीं पड़ेगी। यह जीएसटी की वजह से अन्य टैक्सों में होने वाली कटौती के कारण होगा। दूसरी ओर रेरा के पहली मई से लागू हो जाने के बाद इस क्षेत्र में पारदर्शिता आएगी। इससे बिल्डर-प्रमोटर खरीदारों को बेवकूफ नहीं बना सकेंगे। हालांकि यह कुछ राज्यों में लागू नहीं हुआ है, पर धीरे-धीरे लागू हो जाएगा। तब यह उद्योग व्यवस्थित रूप से चलने लगेगा।
दरअसल जीडीपी में नौ प्रतिशत का योगदान करने वाला रियल एस्टेट उद्योग इस समय कई तरह के करों, लेवी, चुंगी वगैरह से लदा पड़ा है। सरकारें और यहां तक कि स्थानीय निकाय भी इसे दुधारू गाय की तरह दुहती रही हैं, जिसका खामियाजा अंततः खरीदारों को ही भुगतना पड़ता है। बिल्डरों और प्रमोटरों को भी इनके लिए कई तरह की कागजी कार्रवाई करनी पड़ती है, पर जीएसटी में ऐसा नहीं होगा, क्योंकि अब खरीदारों को महज 12 प्रतिशत टैक्स जीएसटी के तहत देना पड़ेगा।
अभी हर राज्य में टैक्स अलग-अलग तो है ही, कुछ राज्यों में ज्यादा भी है। नए बन रहे मकानों पर अभी महज पांच प्रतिशत टैक्स है और जीएसटी में यह 12 प्रतिशत होगा। फिर भी खरीदारों पर टैक्स का अतिरिक्त भार नहीं पड़ेगा। इसकी वजह यह है कि इसके बाद से सभी तरह के टैक्स और यहां तक कि उत्पाद शुल्क लगना भी बंद हो जाएगा। ये सभी उस पांच प्रतिशत के अतिरिक्त थे। नई व्यवस्था के तहत बिल्डर-प्रमोटर अपनी परियोजना के लिए खरीदे गए सभी तरह के कच्चे माल-मसलन, सीमेंट, लोहा, पेंट, बाथरूम फिटिंग वगैरह पर उनके निर्माताओं द्वारा दिए गए टैक्स को अपने खाते में दिखाएंगे। यानी उनका लाभ लेंगे। इससे दोहरा कराधान नहीं होगा और टैक्स का भार भी घट जाएगा। खरीदार को इसका फायदा घटी हुई लागत के रूप में मिलेगा। बिल्डर-प्रमोटर निर्माण से संबंधित जो भी माल खरीदेंगे, उन पर दिए गए टैक्स की छूट उन्हें मिल जाएगी, जिससे उन्हें काफी बचत होगी और परियोजना की कुल लागत में कमी आएगी। खरीदार को इसका लाभ मिलेगा और 12 प्रतिशत टैक्स का भार उन पर कम ही पड़ेगा। सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जीएसटी लागू होने के बाद खरीदारों पर किसी तरह का भार नहीं बढ़ाया जाए और टैक्स घटने के जो भी फायदे हों, वे खरीदारों को दिए जाएं। इसलिए अपनी तरफ से ग्राहकों को भी सतर्क रहना होगा। पर पूरी तरह से तैयार मकानों पर जीएसटी के नए प्रावधान लागू नहीं होंगे और उनके लिए पुराने टैक्स जारी रहेंगे।
बिल्डरों को इससे एक लाभ यह भी होगा कि पहले इतने सारे टैक्स वगैरह के कागजात बनवाने और रखने पर उन्हें जो मशक्कत करनी पड़ती थी और इसके लिए कर्मचारी रखने पड़ते थे, उससे उन्हें छुटकारा मिल जाएगा। यह उनके लिए राहत की बात होगी, क्योंकि अपने यहां एक हाउसिंग प्रोजेक्ट आरंभ करने में 50 से भी ज्यादा सरकारी औपचारिकताएं निभानी पड़ती हैं और अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने होते हैं। जल्दी करने के लिए उन्हें मोटी रकम भी खर्च करनी पड़ती है। पर लग्जरी मकानों की कीमतों पर जीएसटी भारी पड़ेगा, क्योंकि नई व्यवस्था में विदेशी पत्थर, सिरामिक लैम्प्स, खास तरह के टाइल्स, फिटिंग्स वगैरह पर 18-28 प्रतिशत टैक्स का प्रावधान है।
सरकार ने 2020 तक सभी को मकान देने की अपनी योजना को अमली जामा पहनाने के तहत अफोर्डेबल हाउसिंग को बढ़ावा देना शुरू किया है और पूरे देश में ऐसे मकान बनाए जा रहे हैं। इनमें करों में छूट है। इनका फायदा खरीदारों और बिल्डर- प्रमोटरों, दोनों को है। मंदी से जूझते रियल एस्टेट के लिए यह फायदे का सौदा है। वे जीएसटी के प्रावधानों का सहारा लेकर परियोजनाओं की लागत घटा सकते हैं।
भारत में रियल एस्टेट सेक्टर देश का दूसरा सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता क्षेत्र है। लेकिन अफसोस की बात यह है कि कुछ बिल्डरों और राजनीतिक नेताओं-अफसरों की साठगांठ से इसकी काफी बदनामी भी हुई। कई कारणों से यह क्षेत्र उस तरह से संगठित तौर पर नहीं चला, जैसे अन्य उद्योग चलते हैं। लेकिन अब इसे सही दिशा देने के लिए नया कानून लागू हो चुका है। इस नए कानून रियल एस्टेट रेगुलेशन ऐंड डेवलपमेंट ऐक्ट 2016 (रेरा) के आने से अब काफी उम्मीदें बंध गई हैं। इस कानून में खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए कड़े प्रावधान हैं। अब बिल्डरों-प्रमोटरों को खरीदारों को अपनी वित्तीय स्थिति बतानी होगी। इसके अलावा उन्हें निर्धारित समय पर मकान खरीदारों को सौंपने होंगे अन्यथा दंड भुगतना पड़ेगा। अभी तक कई रियल स्टेट बिल्डर-प्रमोटर निर्धारित समय पर मकान नहीं देते हैं और उसके बावजूद छुट्टे घूमते हैं। उन्हें अब सभी तरह के जरूरी नियमों का पालन करना होगा। इस कानून के आने से इस सेक्टर में काफी पारदर्शिता आने की उम्मीद है। लेकिन फिलहाल कुछ राज्य इसे तत्काल लागू करने में आनाकानी कर रहे हैं। जाहिर है, ऐसा बिल्डर-प्रमोटर लॉबी के इशारे पर हो रहा है। एक-दो राज्यों ने इसके प्रावधानों को कमजोर कर दिया है। लेकिन अब खरीदार काफी समझदार हो गए हैं और वे आसानी से झांसे में नहीं आने वाले हैं। अब वे इकट्ठा होकर अपने हितों की लड़ाई भी लड़ रहे हैं।
जीएसटी के आने के बाद भारत के रियल एस्टेट सेक्टर में करों में कमी होगी। हो सकता है कि कुछ मामलों में टैक्स ज्यादा लग जाए फिर भी यह फायदे का सौदा है, क्योंकि इसमें पूरी पारदर्शिता है। करों के दोहराव से मुक्ति इसका सबसे बड़ा लाभ है। रियल एस्टेट के खरीदारों के लिए आने वाला समय बढ़िया होगा और वे पहले की तरह शोषण का शिकार नहीं होंगे।