चालू वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए जारी किए गए आंकड़ों में सकारात्मक बात यह देखने को मिलती है कि सेवा क्षेत्र द्वारा बेहतर वृद्धि दर दर्ज की गई है। पिछले नौ महीनों में सेवा क्षेत्र द्वारा तकरीबन 14 प्रतिशत की विकास दर दर्ज की गई, जो इस बात को भी स्पष्ट करती है कि अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में मांग में वृद्धि बनी हुई है। हालांकि सेवा क्षेत्र अब भी महामारी से पूर्व के अपने स्तर पर नहीं पहुंच पाया है। कृषि क्षेत्र में इस दौरान 3.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है और इसमें रबी की फसल की उपज सम्मिलित नहीं है। कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर से स्पष्ट है कि वार्षिक अनुमानों में एक बार फिर यह क्षेत्र 15-16 प्रतिशत से ऊपर नहीं जाएगा तथा इसका विपरीत असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की प्रगति में देखने को मिलेगा। वित्तीय सेवाओं तथा निर्माण के क्षेत्र में वृद्धि दर क्रमशः 6.50 प्रतिशत तथा 9.1 प्रतिशत दर्ज हुई है।
सबसे अधिक निराशा मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में देखने को मिली है, जहां पर मात्र 1.6 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। विशाल आबादी वाले भारत में बेरोजगारी की समस्या का निदान तभी संभव है, जब मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में तेजी से विकास हो। चालू वित्तीय वर्ष की विभिन्न वैश्विक समस्याओं के चलते इस सेक्टर पर आंशिक प्रभाव पड़ा है। इनमें रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते विभिन्न कच्चे माल की लागत का बढ़ना एक मुख्य कारण था, तो अमेरिकी फेड द्वारा लगातार बढ़ाई गई ब्याज दरों से तुलनात्मक रूप से मजबूत हुआ डॉलर भी मुख्य संकट बना। कंपनियों के मुनाफे में वृद्धि न होना चिंता का सबब है, क्योंकि इससे प्रति व्यक्ति वित्तीय क्षमता प्रभावित होती है। रिजर्व बैंक द्वारा चालू वित्तीय वर्ष में बार-बार बढ़ाई गई रेपो रेट इसका प्रमुख कारण है। भारत के मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर के बहुत अधिक आकर्षक न होने के कारण भारत की अंतरराष्ट्रीय व्यापार में चीन पर निर्भरता लगातार बढ़ती जा रही है।
पिछले 10 वर्षों में भारत के चीन से आयात दोगुने हो गए हैं। निराशा वाली बात यह भी है कि भारत का निर्यात कमजोर रहा है। जीडीपी के आंकड़ों की प्रथम आधिकारिक घोषणा में सबसे सकारात्मक बात यह है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में प्रत्येक व्यक्ति की उपभोग क्षमता में इस दौरान तकरीबन 7.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है। यह बहुत अच्छा सूचक है तथा यह अर्थव्यवस्था को एक आर्थिक स्थायित्व का रुख भी देता है। हालांकि ग्रामीण क्षेत्र में प्रति व्यक्ति उपभोग क्षमता में आकर्षक वृद्धि नहीं हुई है। इसका मुख्य कारण उच्च महंगाई दर है।
चालू वित्तीय वर्ष के बीते 8-9 महीनों में सराहनीय पक्ष यह भी रहा कि वित्तीय निवेश में 11 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर देखी गई है, जो आने वाले समय में अर्थव्यवस्था के बढ़ते आकार को आधारभूत ढांचा देने में सक्षम होगी। हालांकि वित्तीय निवेश के अंतर्गत इस दौरान सरकारी निवेश मुख्य रहा है, परंतु बीते कुछ माह में विभिन्न नए प्रोजेक्ट की घोषणाएं संकेत देती हैं कि आने वाले समय में निजी निवेश बहुत तेजी से बढ़ेगा। कुल मिलाकर, जीडीपी के इन आंकड़ों के पूर्वानुमान के आधार पर आने वाले वित्तीय बजट के लिए काफी कुछ स्पष्ट होता दिख रहा है।