भारतीय वन सर्वेक्षण विभाग के आंकड़ों के अनुसार, भारत के कुल वन क्षेत्र का 36 प्रतिशत भाग बार-बार लगने वाली आग के प्रति संवेदनशील पाया गया है। इसके अलावा, चार प्रतिशत वन क्षेत्र अत्यधिक अग्नि संभावित और छह प्रतिशत वन क्षेत्र बहुत अधिक अग्नि संभावित हैं। देश के एक दर्जन से अधिक राज्यों में हर साल वनाग्नियां बड़े क्षेत्रों को प्रभावित करती हैं। भले ही अब वन राज्य क्षेत्र से हटकर समवर्ती सूची में आ गए हैं, फिर भी वनों की सुरक्षा का मुख्य दायित्व राज्य सरकारों का ही है। केंद्र सरकार केवल आर्थिक मदद और अनुसंधान के लिए टेक्निकल सपोर्ट और सूचना आदि ही दे सकती है। लेकिन राज्य सरकारें कितनी चिंतित हैं, यह जानने के लिए जब हम 71 प्रतिशत वनावरण वाले उत्तराखंड के वन विभाग के वनाग्नि डैशबोर्ड पर जाते हैं, तो विभाग वनों और खासकर वृक्ष निधि के प्रति तो गंभीर नजर आता है, पर कुल पर्यावरण और वन्यजीव सुरक्षा के प्रति उसकी चिंता कहीं नजर नहीं आती। इस डैशबोर्ड के अनुसार, एक नवंबर, 2024 से छह फरवरी, 2025 तक वनाग्नि की 16 घटनाएं हुई हैं, जिससे 35.1 हेक्टेयर वन क्षेत्र जला है, जिसमें 2.5 हेक्टेयर पर पौधारोपण प्रभावित होने के साथ कुल 36,900 रुपये की हानि हुई। लेकिन वन्यजीवों की कोई हानि नहीं हुई। हैरानी की बात है कि इतना बड़ा वन क्षेत्र जल गया, मगर एक चींटी तक नहीं मरी, जबकि वनों में असंख्य जीव पाए जाते हैं, जिनमें कीट, रीढ़धारी, अरीढ़धारी, सरीसृप और अन्य कई प्रजातियां शामिल हैं। ये सभी जैव विविधता बनाए रखने और पारिस्थितिक संतुलन स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
वनाग्नि वायु प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता की हानि, मृदा क्षरण और जल संकट को बढ़ाती है। वनाग्नि के कारण भारी मात्रा में ग्रीनहाउस गैसें उत्सर्जित होती हैं, जो जलवायु परिवर्तन की गति बढ़ाती हैं। पेड़-पौधे और वन्यजीवों के जलकर नष्ट होने से जैव विविधता को भारी क्षति होती है। कई दुर्लभ और संकटग्रस्त प्रजातियां समाप्त होने के कगार पर आ जाती हैं और पारिस्थितिकी संतुलन बिगड़ जाता है। वनस्पति और जीव एक-दूसरे के पूरक होते हैं। इसलिए वनाग्नि के नुकसान में केवल पेड़ों की क्षति नहीं, बल्कि संपूर्ण पर्यावरण के नुकसान को ध्यान में रखा जाना चाहिए। इस संकट से निपटने, इसकी रोकथाम और प्रभावी प्रबंधन के लिए आधुनिक तकनीकों, सटीक निगरानी प्रणाली और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।