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समय-समाज: नए साल वाले संकल्पों से राहत देती है 'छोटी सी' फरवरी

डॉनी ब्लम Published by: गुलाम अहमद Updated Sun, 11 Feb 2024 07:24 AM IST

सार

जो काम आज पूरे नहीं हुए हैं, वे कल होंगे। हर सुबह एक नई उम्मीद लेकर आती है।
 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay


न्यूयॉर्क में लैंगोन हेल्थ संस्थान में एसोसिएट प्रोफेसर थिआ गालेघर कहती हैं, ‘जिंदगी व्यवहारिक एवं नियंत्रित ढंग से चीजों को जोड़ते रहने का नाम है।’ फरवरी आपको व्यावहारिकता की जमीन पर उतारती है और लक्ष्यों की ओर बढ़ने का सही तरीका बताती है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में महामारी विज्ञान और जैव सांख्यिकी के प्रोफेसर टायलर जे वेंडरवेले के अनुसार, सबसे पहले तो आप यह सोचें कि क्या आपने सही संकल्प लिया है? वह कहते हैं, ‘ऊंचे लक्ष्य निर्धारित करने के बजाय पहले छोटे लक्ष्य बनाएं और धीमी गति से आगे बढ़ें।’ उनके अनुसार, अगर आप सौ फीसदी लक्ष्य हासिल न कर पा रहे हों, तो 80/20 के नियम का पालन करें।


उदाहरण के लिए, आप रोज सोचते हैं कि आज से कसरत शुरू करूंगा, लेकिन समय नहीं निकाल पाते, तो दबाव महसूस करने के बजाय सप्ताहांत की सुबह कसरत करने का नियम बनाएं। कहने का आशय है कि खुद को कड़े नियमों से न बांधें। केंट स्टेट यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान की प्रोफेसर एंजेला नील-बार्नेट सुझाव देती हैं कि योग, कसरत या भ्रमण संबंधी संकल्पों को पूरा करने के लिए बेहतर होगा, अगर आप कोई ऐसा मित्र या परिवार का सदस्य ढूंढंे, जिसके साथ मिलकर आप ये गतिविधियां कर सकें और जो आपको लगातार प्रेरित भी कर सके।


डॉ. वैंडरवेले कहते हैं कि अपने प्रियजन का साथ आपको अपने लक्ष्यों पर नियमित नजर रखने में मददगार होता है। चाहे बुधवार रात की एक कॉल हो या फिर रविवार सुबह की कॉफी, आपको अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है। डॉ. नील बार्नेट कहते हैं कि संकल्प को पूरा करने में सबसे महत्वपूर्ण यह है कि खुद को कोसने के बजाय छोटी-छोटी जीतों का आनंद लें। जो काम आज पूरे नहीं हुए, वे कल होंगे। हर सुबह एक नई उम्मीद लेकर आती है।

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