फीचर फोन से तात्पर्य उन मोबाइल फोन से है, जिनका प्रयोग वॉयस कॉलिंग और टेक्स्ट मैसेज के लिए किया जाता है। इनमें बेसिक मल्टी मीडिया सुविधा भी होती है, जिससे ऑडियो-वीडियो सुविधाओं का आनंद उठाया जा सकता है। ये बहुत कम कीमत में उपलब्ध हैं। जबकि स्मार्टफोन इंटरनेट आधारित हैं, जो बात करने के अलावा, इंटरनेट की दुनिया में एप सुविधाओं के साथ असीमित विकल्प देते हैं। ये फीचर फोन के मुकाबले महंगे होते हैं और इनकी परिचालन कीमत भी महंगी होती है।
वैसे भी देखा गया है कि शहरों में आजकल लोग दो फोन का इस्तेमाल कर रहे हैं-बात करने के लिए साधारण फीचर फोन और इंटरनेट इस्तेमाल करने के लिए स्मार्टफोन। स्टेटिस्टा की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में, भारत में फीचर फोन बाजार से उत्पन्न राजस्व आश्चर्यजनक रूप से 2.2 अरब अमेरिकी डॉलर होगा। यह दुनिया भर में सबसे ज्यादा होगा। साइबरमीडिया रिसर्च (सीएमआर) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के फीचर फोन बाजार में 2023 की दूसरी तिमाही में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि 2जी फीचर फोन शिपमेंट की वृद्धि स्थिर रही, जबकि 4जी फीचर फोन शिपमेंट में तेज वृद्धि देखी गई। 4जी फीचर फोन शिपमेंट में सालाना आधार पर 108 फीसदी की महत्वपूर्ण वृद्धि दर्ज की गई।
अपने यहां फीचर फोन की लोकप्रियता बरकरार रहने का बड़ा कारण इसका एक औसत भारतीय के लिए सस्ता होना है। इसके अलावा, यह बिजली की कम उपलब्धता में भी चलता है। दरअसल स्मार्टफोन की बैटरी जल्दी खर्च होती है, जिस कारण उसे बार-बार चार्ज करना पड़ता है। जबकि फीचर फोन की बैटरी एक बार चार्ज करने के बाद लंबे समय तक चलती है। फीचर फोन पुश बटन पर चलते हैं। इसे चलाने के लिए किसी तरह की विशेषज्ञता की जरूरत नहीं होती।
अशिक्षा की वजह से इन फोन में व्याप्त इंटरनेट की बेसिक सुविधाओं का भी इस्तेमाल नहीं किया जाता। भारतीय परिस्थितियों में फोन को संभालना भी एक बड़ा काम है। लेकिन फीचर फोन चाहे गिर ही क्यों न जाए या इसके पीछे का ढक्कन ही क्यों न खुल जाए, फिर भी ये फोन चलते हैं और बेहद टिकाऊ होते हैं। एक बार फीचर फोन खरीदने के बाद इसे पांच से छह साल तक आसानी से चलाया जा सकता है। फीचर फोन को हैक किए जाने का खतरा कम होता है, और ये उपभोक्ता की निजता की रक्षा भी बेहतर ढंग से करते हैं।
अपने यहां फीचर फोन की मांग ग्रामीण इलाकों में ज्यादा है, जहां मनोरंजन के साधन के रूप में सिर्फ इंटरनेट का इस्तेमाल अब भी एक महंगा विकल्प है। वहां पुराने जमाने के मोबाइल गेम्स खेलना, सीखना और सिखाना आसान है। नोकिया का स्नेक गेम भला कौन भूल सकता है! फीचर फोन में कई ऐसे गेम्स आते हैं, जिन्हें आज भी खेलना काफी मनोरंजक होता है। इसके अलावा बगैर इंटरनेट के एफएम सुनने का विकल्प उपलब्ध होना भी फीचर फोन की लोकप्रियता बरकरार रहने का एक बड़ा कारण है।
भले ही दुनिया आज पोडकास्ट की दीवानी हो रही हो, पर यह शहरी प्रवृत्ति है। जबकि भारत आज भी गांवों में बसता है, जहां मनोरंजन के लिए लोगों की निर्भरता रेडियो पर आज भी ज्यादा है। इन कारणों से भी फीचर फोन देश में अभी लंबे समय तक प्रासंगिक बने रहने वाले हैं।