आज हर क्षेत्र में महिलाएं पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर देश की उन्नति में अपना योगदान दे रही हैं। लेकिन आजादी के बाद भी काफी समय तक सैन्य सेवा का अवसर पुरुषों को ही मिलता रहा। वर्ष 1992 में भारत सरकार ने सेना में महिलाओं को अफसर बनाने के लिए स्वीकृति प्रदान कर दी और इसके बाद थल सेना में अल्पकालिक सेवा आयोग स्कीम द्वारा महिलाओं को दस वर्ष की आवश्यक सेवा के बाद चार साल की अतिरिक्त सेवा का अवसर प्रदान किया जाता है।
दस साल की सेवा के बाद इनमें चयनित महिला अफसरों को नियमित पूर्णकालीन सेवा का अवसर भी मिलता है। वर्ष 1992 से लेकर 2023 तक 6,993 महिला अफसर तथा 100 महिलाएं सैनिक के रूप में अब तक अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। अब अग्निवीर योजना के तहत अकेले नौसेना में एक हजार अग्निवीर महिलाओं की भर्ती की जा रही है।
सैन्य सेवा में महिलाओं के प्रदर्शन और लगन को देखते हुए 2023 से उन्हें नियमित स्थायी कमीशन स्कीम के तहत भारतीय रक्षा अकादमी खड़कवासला पुणे में भर्ती किया गया, जहां से वे पुरुषों की तरह ट्रेनिंग पूरी करके भारतीय रक्षा अकादमी देहरादून से पूरी सेवा के लिए अफसर बनेंगी। शुरू में इन्हें थल सेना में लिया जाता था, परंतु कुछ समय बाद ही महिलाओं को वायुसेना तथा नौसेना में भी सेवा का अवसर मिलने लगा है!
थल सेना में इन्फेंट्री तथा आर्म्ड कोर (टैंक कोर) दुश्मन से आमने-सामने का युद्ध लड़ती है और युद्ध में कभी-कभी दुश्मन सैनिकों के साथ द्वंद्व युद्ध और हाथापाई तक की नौबत आ जाती है। उल्लेखनीय है कि 1971 के युद्ध में फाजिल्का की सीमा पर भारत के मेजर नारायण सिंह ने पाकिस्तान के मेजर शरीफ के साथ कुश्ती लड़ी थी और कुछ वर्ष पहले 2019 में गलवान में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच लाठी-डंडों से युद्ध लड़ा गया था। इसे देखते हुए इन्फेंट्री और आर्म्ड कोर के अलावा सेना के अन्य 11 विभागों-इंजीनियरिंग, सिग्नल, आर्मी सर्विस कोर, आर्मी ऑर्डिनेंस कोर इत्यादि में महिलाओं को अफसर के रूप में सेवा के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं।
महिलाओं को सैनिक के रूप में आर्मी सर्विस कोर, आर्मी ऑर्डिनेंस तथा मिलिट्री पुलिस इत्यादि में भर्ती हो रही है। वहीं पर वायु और नौसेना की सेवा में दुश्मन से सीधा आमना-सामना न होने कारण इन्हें बिना लैंगिक भेदभाव केे हर विभाग में सेवा का पूरा अवसर प्रदान किया जाता है। अब तक थलसेना में 120 महिलाओं को कर्नल के पद के लिए चयनित किया गया है। यह देश के लिए गर्व का विषय है कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा विभिन्न देशों में भेजे गए भारत के शांति दलों में 20 फीसदी महिला अधिकारी हैं।
सेना में महिलाओं की कॅरिअर प्लानिंग के लिए भारत सरकार ने उच्चतम न्यायालय को सूचित किया है कि योजनाबद्ध तरीके से महिला सैनिक अधिकारियों के कॅरिअर की प्रगति पर एक विस्तृत नीति बनाई जा रही है, जिसे 31 मार्च तक तैयार कर लिया जाएगा। इससे महिलाओं के लिए सेना की यूनिटों में कमान संभालने के अवसरों तथा कॅरिअर के लिए विस्तृत प्रणाली उपलब्ध होगी।
पिछले साल वृंदावन के वत्सल ग्राम में साध्वी ऋतंभरा ने देश का पहला महिला सैनिक स्कूल स्थापित किया है, जिसका उद्घाटन भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया था। लड़कों के लिए देश के हर राज्य में सैनिक स्कूल हैं, परंतु लड़कियों को सेना में प्रवेश के लिए तैयार करने वाला वृंदावन में यह पहला स्कूल खोला गया है। ज्यादा से ज्यादा लड़कियों को सैनिक सेवा के लिए एनसीसी तथा सैनिक और मिलिट्री स्कूलों द्वारा तैयार किए जाने से देश की प्रथम और द्वितीय श्रेणी की सुरक्षा प्रणाली भी मजबूत की जा सकती है।