गौरतलब है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के अनुसार, जून, 2023 में जो खुदरा महंगाई दर 4.87 फीसदी थी, वह जुलाई में 15 महीने के उच्चतम स्तर 7.44 प्रतिशत पर पहुंच गई। पिछले वर्ष जुलाई, 2022 में खुदरा महंगाई 6.71 फीसदी थी। अनाज की कीमतों में ऊंची महंगाई दर स्पष्ट देखी जा रही है और उम्मीद से कम खाद्यान्न उत्पादन का जोखिम भी है। खुदरा महंगाई दर केंद्र सरकार के छह प्रतिशत की तय ऊपरी सीमा से अधिक है।
इस समय खाद्य कीमतों में तेज बढ़ोतरी के कई कारण उभरकर दिखाई दे रहे हैं। काला सागर अनाज समझौता खत्म करने के रूस के फैसले और गेहूं उपजाने वाले प्रमुख क्षेत्रों में बारिश न होने के कारण अनाज के दाम बढ़ गए हैं। देश में फसलों पर सफेद मक्खी के प्रकोप और मानसूनी बारिश के असमान वितरण से भी सब्जियां महंगी हुई हैं। स्थिति यह है कि सीमित आपूर्ति के कारण देश में थोक गेहूं की कीमतें पिछले दो महीनों में तेजी से बढ़ी हैं। सरकार के गोदामों में भी गेहूं के स्टॉक में कमी आई है। इसके अलावा, बाजार में नकदी ज्यादा रहने से भी महंगाई बढ़ी है। देश में अल नीनो प्रभाव के कारण मानसून के साथ न देने से भी खाद्यान्न उत्पादन में कमी का जोखिम बढ़ा है।
बढ़ती महंगाई को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक ने कई कदम उठाए हैं। केंद्र सरकार द्वारा खाद्य पदार्थों के निर्यात पर लगातार सख्ती बरती जा रही है। पिछले साल रूस-यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के बाद गेहूं के निर्यात पर जो पाबंदी लगाई गई थी, वह अब तक जारी है। प्याज पर 40 फीसदी निर्यात शुल्क लगाया गया है और हाल ही में सेला चावल के निर्यात पर भी 20 प्रतिशत शुल्क लगा दिया गया है। सरकार ओपन मार्केट सेल स्कीम (ओएमएसएस) के जरिये रियायती दर पर गेहूं और चावल, दोनों बेच रही है।
इसी तरह सब्जियों, दालों और तिलहन के दाम काबू में रखने के लिए भी खास उपाय किए गए हैं। सरकार पेट्रोल का आयात खर्च घटाने और कम कीमत रखने के मद्देनजर पेट्रोल में एथनॉल ब्लेंडिंग कर रही है। मगर विभिन्न प्रयासों के बावजूद अभी खाद्य महंगाई नियंत्रित नहीं है। वित्त मंत्रालय ने भी जुलाई, 2023 की अपनी रिपोर्ट में आगाह किया है कि आगामी महीनों में भी महंगाई की दर ऊंची बनी रह सकती है। सचमुच, इस बार महंगाई से लड़ाई सरकार और केंद्रीय बैंक के लिए कड़ी चुनौती बन गई है। महंगाई पर नियंत्रण इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि इससे आम आदमी की मुश्किलों के साथ आर्थिक विकास भी प्रभावित होता है और इसका चुनावी असर भी पड़ता है।
ऐसे में, खाद्य पदार्थों की आपूर्ति बढ़ाने और खुदरा महंगाई दर पर अंकुश लगाने के लिए सरकार को अधिक कारगर उपायों के साथ आगे आना होगा। जमाखोरों के खिलाफ कार्रवाई तेज करनी होगी। अतिरिक्त नकदी की निकासी पर रिजर्व बैंक को ध्यान देना होगा। आवश्यक खाद्य पदार्थों का आयात करके आपूर्ति बढ़ाने से महंगाई को नियंत्रित किया जा सकता है। सरकार के पास जमा विदेशी मुद्रा भंडार भी महंगाई नियंत्रण में अहम भूमिका निभा सकता है।
भारत की पेट्रोल-डीजल की दिग्गज कंपनियां घरेलू कीमत घटाने की स्थिति में हैं। ऐसे में पेट्रोल-डीजल की कीमत में कटौती करने से महंगाई में व्यापक कमी आ सकती है। केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल व डीजल पर सीमा व उत्पाद शुल्क में और राज्य सरकारों द्वारा वैट में कमी करना जरूरी है। मंत्रालयों के बजट में कटौती से बजट घाटे को लक्ष्य से अधिक होने से बचाया जा सकता है।