इस बीच सुर्खियों में हैं हमारा कैदी नंबर 804, जो कि पंजाब प्रांत की अटक जेल में बंद पाकिस्तान का सबसे मशहूर कैदी है। इसे खाने को मिलती है देसी घी, शहद और दही में पकाई गई देसी मुर्गी। इतना ही नहीं, इस कैदी को मिला हुआ है एक पंखा, एक कूलर, टेलीविजन, एक अखबार, और आपको सुनकर शायद हंसी आए, एक ब्रांडेड कमोड। लेकिन जब यही कैदी प्रधानमंत्री था, तब उसने घोषणा की थी कि नवाज शरीफ, शहबाज शरीफ और मरियम नवाज शरीफ जैसे उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को, जो झूठे आरोपों में कैद थे, जेल में ये सुविधाएं नहीं मिलेंगी, जिनके वे कानूनन हकदार थे। तब प्रधानमंत्री रहे इमरान खान ने जेल से एयर कंडीशनर, बिस्तर इत्यादि हटा लेने के निर्देश देने के अलावा घर के खाने पर भी प्रतिबंध लगा दिया था।
दरअसल, इमरान खान को दी जा रही इन सुविधाओं की जानकारी पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश उमर अता बंदियाल को उस वक्त दी गई, जब उन्होंने सर्वोच्च अदालत में एक सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल से इस बारे में सवाल पूछा। गौरतलब है कि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को दोषी ठहराया गया है, अयोग्य घोषित किया गया है और एक मामले में उन्हें पांच साल की जेल की सजा भी सुनाई गई है। इतना ही नहीं, उनके खिलाफ सौ से भी ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं। ऐसे में, यह सवाल उठना लाजिमी है कि इमरान खान को जेल में ये सुविधाएं आखिर कौन मुहैया करा रहा है। सेना अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रही है कि आम चुनावों में देरी हो और इमरान खान और उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ चुनावों में भाग न ले सकें।
राजनीति में कदम रखने के बाद से पहली बार इमरान खान जेल गए हैं। इससे उनकी लोकप्रियता काफी बढ़ी है, जिससे सेना डरी हुई है। अटकलें तो ये भी हैं कि इमरान को जेल में मिल रही इन तमाम सुविधाओं के पीछे तकरीबन सभी मामलों में इमरान का साथ देने वाले मुख्य न्यायाधीश बंदियाल का हाथ हो सकता है। लेकिन बंदियाल इस महीने रिटायर हो रहे हैं। ऐसे में, वह इमरान को छुड़ाने की कितनी ही कोशिश क्यों न कर लें, फिलहाल तो इसमें मुश्किल ही नजर आती है।
इसके अलावा राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो ने इमरान खान के खिलाफ जो मामला बनाया है, वह भी बेहद संगीन है। दरअसल, पूर्व विदेश सचिव डॉ. असद खान ने, जो इमरान खान के प्रधानमंत्री काल में वाशिंगटन में पाकिस्तान के राजदूत थे, विदेश मंत्रालय को एक सिफर (सरकारी दस्तावेज) भेजा था। वह गोपनीय था और उसकी प्रतियां प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री, सेना प्रमुख और आईएसआई प्रमुख को भेजी गई थीं। उस दस्तावेज में राजदूत ने विदेश विभाग को यह जानकारी दी थी, कि अमेरिका का बाइडन प्रशासन इमरान खान की नीतियों और उनके बयानों से खुश नहीं है।
इस बात से भी सब वाकिफ हैं कि यूक्रेन पर रूस के हमले से ठीक एक दिन पहले पुतिन के बुलावे पर इमरान खान की मास्को यात्रा से अमेरिका बेहद खफा था। फिर इस तथ्य की अनदेखी भी नहीं की जानी चाहिए कि अफगानिस्तान से पीछे हटने के बाद से अमेरिका वैसे भी पाकिस्तान को कोई खास तवज्जो नहीं दे रहा है।
पिछले साल प्रधानमंत्री के दफ्तर से निकाले जाने के बाद लोगों के हुजूम के सामने इमरान खान ने उस सरकारी दस्तावेज को हवा में लहराते हुए, अपने समर्थकों को बताया था कि यह कागज सुबूत है कि अमेरिका ने किस तरह उन्हें पद से हटाने की साजिश रची। अमेरिका के खिलाफ जाते हुए तब उन्होंने अपने समर्थकों को यह बताया था कि इन सबके पीछे वाशिंगटन का हाथ है। प्रोटोकॉल यह कहता है कि किसी राजनयिक द्वारा भेजे गए किसी भी दस्तावेज की प्रति विदेश मंत्रालय के बाहर नहीं जानी चाहिए।
बाद में, जब शहबाज शरीफ ने सत्ता संभाली, तो उनकी तरफ से जारी औपचारिक बयान से यह खुलासा हुआ कि वह दस्तावेज (सिफर) सरकार के रिकॉर्ड से गायब था। गिरफ्तारी से काफी पहले इमरान खान ने टेलीविजन पर दिए एक साक्षात्कार में जब स्वीकारा था कि सिफर उनसे खो गया था, तब उस पर विश्वास करना कठिन था। सर्वोच्च अदालत में उन पर चल रहा मुकदमा अब तक जारी है। बीते मंगलवार को, जब इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने उन्हें तोशाखाना मामले में बरी किया, तब सिफर मामले में उन्हें फिर से गिरफ्तार कर लिया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि इमरान खान के खिलाफ चल रहे दूसरे मामलों की तुलना में यह मामला सबसे बड़ा है। सिफर का गुम होना या खो जाना 'देशद्रोह' या राज्य के प्रति विश्वासघात की श्रेणी में आता है। ऐसा माना जाता है कि सिफर का मामला बेहद संगीन है और अगर इमरान खान दोषी साबित हुए, तो उन्हें उम्रकैद की सजा भी हो सकती है।
दूसरी ओर, पाकिस्तान में किए जा रहे कई सर्वेक्षणों से यह संकेत मिलता है कि यदि मुल्क में निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव होते हैं और पीटीआई के साथ न्यायपूर्ण रवैया बरता जाता है, तो इमरान खान चुनाव जीतेंगे। पाकिस्तान के चुनावों में पंजाब बेहद अहम है। जाहिर है, जो भी पंजाब जीतेगा, वह इस्लामाबाद भी जीतेगा। जहां तक पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) का सवाल है, तो वह दक्षिण पंजाब में कुछ सीटों के साथ सिंध तक ही सीमित है। जबकि पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज (पीएमएल एन) आज पंजाब में सबसे अलोकप्रिय राजनीतिक दल है क्योंकि आईएमएफ के साथ कड़ी शर्तों पर सहमत होने से महंगाई काफी बढ़ गई है। ऐसे में, इमरान खान और उनकी पार्टी की संभावनाएं ही सबसे मजबूत हैं। यह अलग बात है कि इमरान के चुनाव जीतने की संभावना से सेना की रातों की नींद उड़ी हुई है।