राहुल गांधी, जिन्हें कहा जाता था कि वह नरेंद्र मोदी का सामना नहीं कर सकते, उन्होंने भी अपने नेतृत्व का प्रदर्शन किया और अपने राजनीतिक चरित्र को सच्चे मन से दर्शाया। महाराष्ट्र में भी महाविकास अघाड़ी, जिसमें कांग्रेस, शरद पवार और उद्धव ठाकरे शामिल थे, उसने अच्छा प्रदर्शन किया। ओडिशा में क्षेत्रीय दल बीजद का प्रदर्शन बहुत बुरा रहा। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि यह चुनाव भारत की कई भाषाओं में लड़ा गया है। किसी भी दल का अपना दबदबा बना नहीं रहा है। लोगों ने गरीबी और स्थानीय मुद्दों को राजनीति के हाशिये से राजनीति के केंद्र में ला दिया है। यह एक परिपक्व जनमत है।