रोजगार, उपभोग, निवेश और आर्थिक विकास के नैतिक चक्र में शिक्षा एक महत्वपूर्ण तत्व है। शिक्षा की गुणवत्ता भौतिक और मानवीय आधारभूत ढांचों पर निर्भर करती है। शिक्षा मंत्रालय की स्थायी समिति की एक रिपोर्ट से पता चलता है कि दिसंबर, 2022 तक देश भर में शिक्षकों के 9.86 लाख से अधिक पद खाली थे। इनमें से 7.47 लाख से अधिक शिक्षकों के पद प्राथमिक विद्यालयों में रिक्त हैं। शिक्षकों की कमी से भारत को जितने कार्यबल की आवश्यकता है, उसकी गुणवत्ता पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। फिर भी राज्य सरकारें इसकी उपेक्षा करती हैं।
खबरें बताती हैं कि बुनियादी ढांचों के सुधार में भारत बेहतर कर रहा है। लेकिन मुंबई के अंधेरी में रहने वाले लोगों के अनुभव अलग हैं। पिछले हफ्ते उन्हें पता चला कि अंधेरी के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण सड़क पुल जून, 2023 में तैयार नहीं हो सकता। लाखों लोगों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला गोपाल कृष्ण गोखले पुल जुलाई, 2018 में ही ढह गया था। सीएजी द्वारा गंभीर आलोचना के बाद अधिकारियों ने वादा किया कि काम में तेजी लाई जाएगी और पुल का कम से कम एक हिस्सा जून, 2023 तक खोल दिया जाएगा। अब पता चला है कि मानसून से पहले पुल तैयार नहीं होगा, जिससे यात्रियों की परेशानी और बढ़ जाएगी। और इस देरी का जो नया कारण बताया जा रहा है, वह भी दिलचस्प है। बताया गया कि कारखाने में हड़ताल के कारण निर्माण के लिए जरूरी स्टील गर्डर्स अनुपलब्ध हैं। यह उस देश का हाल है, जहां इस साल कच्चे इस्पात का उत्पादन 12.4 करोड़ टन पहुंच गया है!
पिछले साल बृहन्नमुंबई नगर पालिका (बीएमसी) ने महानगर की 400 किलोमीटर लंबी सड़कों पर कंकरीट डालने के लिए टेंडर जारी किए, लेकिन इस हफ्ते बीएमसी ने काम शुरू करने में विफल रहने पर ठेकेदार को नोटिस जारी किया है। स्पष्ट है कि नागरिकों की समस्याओं को दूर करने के लिए जिस तत्परता की जरूरत है, वह नीतिगत सुस्ती और लचीलेपन, दोनों से प्रभावित है। मुंबई में पुल का वादा सार्वजनिक नीति में गोलचक्कर की संस्कृति से पीड़ित कई परियोजनाओं में से एक है। फरवरी, 2023 में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने 150 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं की समीक्षा प्रकाशित की। इस समीक्षा रिपोर्ट में बताया गया है कि 1,418 परियोजनाओं में से 823 परियोजनाओं में देरी हो रही है, 346 परियोजनाओं की लागत बढ़ गई है और 316 परियोजनाओं ने कमीशनिंग कार्यक्रम के बारे में 'अपर्याप्त जानकारी' की सूचना दी है। इनमें से सबसे बड़ी संख्या रेलवे (173 में से 97) और राजमार्गों (717 में से 328) की है।
देरी के कई कारण हैं, जैसे भूमि अधिग्रहण या तकनीकी शर्तें या मंजूरी। जबकि परियोजनाओं में विलंब से लागत बढ़ती है। अनुमानित और अब प्रत्याशित लागत का अंतर 4.46 लाख करोड़ रुपये का है। और कुछ ऐसे गोल चक्कर भी हैं, जिनके मोड़ वर्णन योग्य नहीं हैं। कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रदान करने, दस्तावेज जारी करने और बैंकिंग/दूरसंचार सेवाओं तक पहुंच के तंत्र के रूप में आधार-आधारित पहचान को अपनाने का गुणगान वैश्विक स्तर पर किया गया। बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के उपयोग ने प्रशासन, व्यापार और जीवन में सुगमता को सक्षम बनाया है। महामारी के दौरान ट्राई द्वारा एक नया दिशानिर्देश जारी किया गया था, जिसके अनुसार दूरसंचार ऑपरेटरों को नया कनेक्शन जारी करते हुए आधार आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के बाद ग्राहकों के तारीख और समय के साथ 'लाइव फोटोग्राफ' की आवश्यकता होती है। बायोमेट्रिक पहचान को अपर्याप्त बताकर लाइव फोटोग्राफ का औचित्य ठहराया जाता है और इसका उद्देश्य कम से कम कहने के लिए रहस्यमय है। पूरे देश में एक अजीब-ओ-गरीब प्रथा शहरी निवासियों को परेशान करती है-पुलिस द्वारा जब्त वाहनों का जखीरा पुलिस थानों और आस-पास के रिहायशी इलाकों में बिखरा पड़ा है।
पिछले हफ्ते बॉम्बे उच्च न्यायालय में इस समस्या पर चर्चा हुई थी। चुनौती यह है कि इस बारे में कोई नीति नहीं है। न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति आर एन लड्डा ने सरकार से जब्त वाहनों से निपटने के लिए 'कोई नीति रिकॉर्ड पर रखने' के लिए कहा, जो 'उनके बेतरतीब भंडारण से सार्वजनिक परेशानी का कारण बनता है।' यह इसी से जुड़े एक बड़े मुद्दे की तरफ हमारा ध्यान खींचता है। हर साल देश के लोग करीब 38 लाख कार खरीदते हैं। सरकार पर्यावरणीय कारणों से 15 वर्ष पुराने वाहनों को हटाने के विचार को बढ़ावा दे रही है। स्क्रैप किए गए वाहनों के निपटान की क्षमता क्या है और यह नीति कितनी प्रभावी है और इससे निपटने के लिए प्रणालीगत तंत्र कितना तैयार है? तथ्य सिर्फ इतना है कि केंद्र सरकार की 1.28 लाख से अधिक वाहनों को स्क्रैप करने की योजना है!
अंत में, धोखाधड़ी करने वालों द्वारा बुजुर्गों और कमजोर लोगों को मोबाइल फोन पर कॉल और एसएमएस के जरिये निशाना बनाने की घटना अब महामारी बन गई है। अपराधी बैंक खातों को फ्रीज करने, बिजली की आपूर्ति निलंबित करने या फोन कनेक्शन काटने जैसे घोटाले के नए तरीकों और धमकियों के साथ सामने आ रहे हैं। जो लोग इन कॉल या संदेशों का जवाब देते हैं, उन्हें धमकियों और गालियों का सामना करना पड़ता है- और इस तरह निर्दोषों को धोखा दिया जाता है। ट्राई समय-समय पर चेतावनियां जारी करता है और शिकायतों के लिए इसका प्रारूप भी है। पर अपराधियों के गिरोह बेखौफ होकर काम कर रहे हैं। यह स्थिति नजीर बनने जैसे सख्त अभियोजन की मांग करती है, और यदि ट्राई शिकायतों की संख्या और पकड़े गए अपराधियों के विवरण साझा करे, तो इससे मदद मिल सकती है। सौ खरब डॉलर की डिजिटल अर्थव्यवस्था की भारत की आकांक्षा बेहतर नीति निर्माण और कार्यान्वयन की मांग करती है।