केरल में बारिश का कहर कोई नई बात नहीं है। दुनिया के किसी भी अन्य क्षेत्र की तरह लगातार बारिश ने यहां हर मानसून के दौरान सामान्य जीवन में परेशानी पैदा की है। लेकिन इससे अलप्पुझा या अलेप्पी जिले तक में कभी बाढ़ नहीं आई, जो कि समुद्री सतह से नीचे है और बांधों (बैकवॉटर) से घिरा हुआ है। लेकिन इस बार सभी नदियों के खतरे के निशान से ऊपर बहने और 39 बांधों में से 33 के फाटक खोलने के कारण सब कुछ बेकाबू हो गया। 1924 के बाद यह सबसे भीषण बाढ़ है। मौजूदा पीढ़ी और पिछली पीढ़ी ने भी ऐसी बारिश नहीं देखी है। प्रति दिन 25 से 30 लोगों के मरने की खबर आने से मौतों का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। तीन लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं और उन्हें राहत शिविरों में पहुंचाया गया है। निरंतर बारिश के पहले चरण में केवल तीन जिले प्रभावित हुए थे, लेकिन इस बाढ़ ने केरल के सभी 14 जिलों को पानी में डुबो दिया।
इस अभूतपूर्व बाढ़ ने राज्य की कमर तोड़ दी है, जो पहले से ही एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के कर्ज तले दबा हुआ है। बाढ़ की वजह से हुआ अनुमानित नुकसान 20,000 करोड़ रुपये है। कृषि और वानिकी क्षेत्र पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। सड़कें नष्ट हो गई हैं, कोच्चि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा 16 अगस्त से ही बंद पड़ा है, ट्रेन सेवाओं को निलंबित कर दिया गया है और आपूर्ति शृंखला टूट गई है, क्योंकि राज्य में माल ढुलाई करने वाले ट्रक सीमावर्ती इलाकों में कतार में खड़े हैं।
ओणम के सीजन में होने वाला व्यापार पूरी तरह से धुल गया है। छोटे स्तर के व्यापारियों से लेकर बड़े ब्रांड्स के डीलर तक को, जो ओणम की बिक्री को ध्यान में रखते हुए अपने स्टॉक पूरा रखते हैं, भारी नुकसान होने वाला है। केरल में आय के प्रमुख स्रोत पर्यटन की हालत बहुत बुरी हो गई है। लगभग सभी लोकप्रिय पर्यटन स्थल, जिनमें सर्वाधिक मांग वाले गंतव्य, जैसे मुन्नार की पहाड़ी और अलप्पुझा के आसपास के बांध बाढ़ में घिरे हुए हैं और उन इलाकों से लोगों को निकालने का काम जारी है।
इस भीषण आपदा से उबरना केरल के लोगों के साथ-साथ सरकार के लिए भी कठिन संघर्ष होगा। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण (लगभग सभी इलाके) के लिए संसाधन हासिल करना राज्य के लिए कठिन चुनौती होने वाली है। भले ही सामाजिक विकास सूचकांक में केरल भारतीय राज्यों में शीर्ष पर है, लेकिन औद्योगिक विकास का अभाव इसकी सबसे बड़ी कमजोरी है। केरल अब भी एक उपोभक्ता राज्य है। अगर पड़ोसी राज्यों से आपूर्ति में कोई बाधा आती है, तो केरल के लोगों की थाली खाली हो जाएगी।
केंद्र सरकार ने इस बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने और 2000 करोड़ की अंतरिम राहत देने संबंधी राज्य की मांग को अभी तक मंजूर नहीं किया है। केंद्र ने पहले सौ करोड़ रुपये की अंतरिम राहत की घोषणा की और फिर 500 करोड़ रुपये की। पर आपदा से उबरने के लिए यह पर्याप्त नहीं होगा। ऐसे हालात में नए कर पेश किए जा सकते हैं या मौजूदा दरों में संशोधन किया जा सकता है। पहले कदम के रूप में सरकार अब शराब प्रेमियों की जेब पर चपत लगाने जा रही है। वित्त मंत्री डॉ. टीएम थॉमस इसाक ने पहले ही त्योहारों के सीजन के करीब शराब के मूल्य में चार फीसदी बढ़ोतरी की घोषणा की है। वित्त मंत्री इसाक ने ट्वीट किया, 'राज्य में वित्तीय संसाधनों का संकट है, फिर भी हम इससे उबर जाएंगे। मुख्यमंत्री आपदा राहत प्रबंधन कोष में अतिरिक्त संसाधन जुटाने के लिए शराब पर सौ दिनों के लिए उत्पाद शुल्क में 0.5 से 3.5 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। इससे 230 करोड़ रुपये अतिरिक्त राजस्व की उम्मीद है।'
राज्य की वित्तीय राजधानी कोच्चि बेशक सीधे तौर पर बाढ़ से प्रभावित नहीं हुआ है, लेकिन त्योहार के सीजन में भी शॉपिंग मॉल बंद होने के कारण सुस्त पड़ा हुआ है। वैसे युवा, जो बाढ़ से प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित नहीं हैं, मॉल में जाने के बजाय बाढ़ राहत गतिविधियों में सक्रिय हैं। ओणम की बिक्री केरल में न केवल छोटे खुदरा विक्रेताओं, बल्कि बड़े राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स के व्यापार के लिए भी सबसे बड़ा सीजन है। त्योहार के मौसम के दौरान दस हजार करोड़ रुपये की अनुमानित बिक्री होती है। अगर बिक्री होती, तो इसका एक हिस्सा राज्य के खजाने में जीएसटी व अन्य करों के जरिये जाता।
खाड़ी देशों, यूरोप और अमेरिका में काम करने वाले केरलवासियों द्वारा धन भेजे जाने का सिलसिला भले आगे भी जारी रहेगा, लेकिन आपदा की गंभीरता को देखते हुए यह पर्याप्त नहीं होगा, क्योंकि पर्यटन भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। बुरी तरह प्रभावित पत्तनमत्तिट्टा जिले से बड़ी संख्या में लोग यूरोप और अमेरिका में काम के लिए गए हैं। विदेशों में पसीना बहाकर कमाए गए कई लोगों की जीवन भर की कमाई बर्बाद हो गई है, इसका भी अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा। लगभग सभी पर्यटन स्थलों को जोड़ने वाली सड़क और पुल बाढ़ में बह गए हैं। इनके पुनर्णिर्माण में कुछ समय लगेगा। कृषि क्षेत्र भी बुरी तरह बर्बाद हुआ है, पहाड़ी इलाकों के हजारों किसानों, जो उच्च मूल्य के पहाड़ी उत्पाद और मसालों का उत्पादन करते हैं, के खेत बर्बाद हो गए हैं। उनमें से अनेक ने बैंक या निजी उधारदाताओं से कर्ज लेकर खेती शुरू की थी। ऐसे किसान कर्ज चुकाने की स्थिति में नहीं होंगे।
केरल ने सार्वजनिक स्वास्थ्य को बनाए रखने में कुछ उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है, लेकिन यह भी खतरे में है। सभी जल संसाधनों के दूषित होने के कारण शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना एक वास्तविक चुनौती होगी। बाढ़ के बाद जल और वायु जनित बीमारियों की महामारी फैलने की आशंका है। जिन लोगों के घर पूरी तरह या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गए हैं, उनके पुनर्वास की जिम्मेदारी भी सरकार की होगी, जिसके लिए भारी अतिरिक्त राशि की जरूरत है।
कुल मिलाकर केरल के लिए आगे मुश्किल भरे दिन हैं, लेकिन राज्य इससे उबर जाएगा। केरल हाथ में हाथ डालकर बचाव करना जानता है। इसका सबसे बेहतर उदाहरण मछुआरों का बचाव अभियान है। पत्तनमत्तिट्टा में मछुआरों की सेवा ने फंसे हुए लोगों को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।