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एक ठो ऑड-ईवन हमका भी चाही

Sun, 17 Jan 2016 07:09 PM IST
सहीराम
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लगता है जी, कि दिल्लीवाला ऑड-ईवन फार्मूला हिट हो गया है। इसीलिए तो अब सब तरफ से डिमांड आ रही है-हमको भी ऑड-ईवन चाहिए। उधर महाराष्ट्र से डिमांड आ रही है। पूछताछ हो रही है। इधर हरियाणा से डिमांड आ रही है। सुना है, रोहतक में तो लागू भी हो गया है। अगर डिमांड यों ही बढ़ती रही, तो पूरा मुल्क एक दिन ऑड-ईवन हो लेगा। इसे पल में तोला-पल में माशा न समझा जाए। इसे कभी धूप-कभी छांव के रूप में भी नहीं देखा जाना चाहिए। गंगा गए गंगादास और जमुना गए तो जमुनादास तो यह बिल्कुल भी नहीं है। इसे कोई मायावी चीज मानकर डरना भी नहीं चाहिए। यह तो एक फॉर्मूला है। अगर फेल हो जाता, तो बेचारे मफलरमैन की आफत आ जाती, लेकिन अब पास हो गया है, तो अब सब तरफ से डिमांड है-एक ठो ऑड-ईवन हमका भी चाही।
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यह डिमांड बिल्कुल वैसी है, जैसे दिल्लीवाली मेट्रो के हिट होने के बाद हर शहर से यह डिमांड आने लगी थी कि एक मेट्रो हमको भी दे दीजिए, प्लीज। उस जमाने में लोग बिजली-पानी नहीं मांगते थे। मेट्रो मांगते थे। सड़क नहीं मांगते थे। मेट्रो मांगते थे। गनीमत यही है कि इधर जब से बुलेट ट्रेन का हल्ला मचा है, कोई बुलेट ट्रेन नहीं मांग रहा। वैसे उस तर्ज पर पिछले दिनों स्मार्ट सिटी जरूर मांगे जा रहे थे। लोगों को यह नहीं लग रहा था कि स्मार्ट सिटी विकसित किए जाएंगे। उन्हें लगा कि स्मार्ट सिटी बंट रहे हैं-तो फिर एक स्मार्ट सिटी हमारा भी तो बनता ही है। स्मार्ट सिटीज की घोषणा हुई, तो हमारा फेडरेल कैरेक्टर फौरन खुलकर सामने आ गया-अरे, हमारे पड़ोसी राज्य को इतने स्मार्ट सिटी कैसे मिल गए, हमें तो उसके मुकाबले कुछ भी नहीं मिला। वहां से ध्यान हटा, तो पता चला राज्य के भीतर पड़ोसी शहर स्मार्ट सिटी हो गया, तो फौरन ईर्ष्या का नाग फनफना उठा-हमारा शहर भी स्मार्ट सिटी होना चाहिए। बुलेट ट्रेन चले न चले, स्मार्ट सिटी बने न बने, पर ऑड-ईवन की मांग बढ़े तो अच्छा ही है। इससे पता चलता है कि लोगों को पर्यावरण की चिंता है।
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