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गुनगुनाते तारों से चोट खाने का सबक

सलिल भट्ट
Updated Wed, 22 Apr 2020 09:42 AM IST
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चांदी के तबले और वीणा - फोटो : अमर उजाला

हम कलाकारों के लिए यह सबसे कठिन दौर है। जो शास्त्रीय संगीत के कलाकार हैं, इस परिस्थिति में उनकी जीवन-चर्या पर बहुत बड़ा प्रश्न चिह्न लग गया है। जब तक कार्यक्रम आयोजित नहीं होंगे, तब तक हमें घर पर ही रहना होगा। एक कलाकार भ्रमण करता है। अपने देश की संस्कृति, शास्त्रीय संगीत और सभ्यता का प्रदर्शन देश और दुनिया भर में करता है, जैसा कि मुझे 42 देशों में अपने देश की सभ्यता, संस्कृति और संगीत का प्रचार-प्रसार और सेवा करने का अवसर प्राप्त हुआ। पद्मश्री और ग्रेमी अवार्डी पंडित विश्वमोहन भट्ट का पुत्र और शिष्य होने के नाते मेरे मन में सदैव ये आकांक्षाएं रहती हैं कि मैं अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन से अपने पिता और देश का मान बढ़ाऊं। लेकिन इस समय ये आशंकाएं घेरे हैं कि कब सब शुरू होगा! ऐसे माहौल में मन विचलित हो जाता है।



गायक हो, वादक हो या नृत्य जगत के जितने कलाकार हैं, हम लोगों पर मां सरस्वती का आशीर्वाद है। मैं वीणा वादक हूं। मां सरस्वती, भगवान शिव और अपने गुरु का उपासक हूं। मेरी सात्विक वीणा भगवान शिव को समर्पित है। उसको मैं बजा रहा हूं और अपने मन में जितनी भी हलचल और परेशानी है, उसको दूर कर रहा हूं। ऐसे माहौल में संगीत बहुत उपयोगी सिद्ध होता है। वह हमको सहारा देता है, नई राह दिखता और प्रेरणा देता है कि हमको आगे बढ़ना है।


मैं जब सात्विक वीणा के स्वर बजाता हूं, तो मेरे मन में यह प्रेरणा स्वत: जागृत होने लगती है कि मैं अपना समय कैसे बिताऊं। तार जिस तरह चोट खाते हुए गुनगुनाते रहते हैं, उससे हमें सीखने की जरूरत है। मिलावट, झूठ, फरेब और छल-कपट से भरी दुनिया में सिर्फ स्वर ही सच्चा है। स्वर की शुद्धता और उसकी सच्चाई, यही हमारे मन-मस्तिष्क, दिल, विचारों और कर्मों को सही दिशा में ले जा सकता है।


सात्विक वीणा, मोहन वीणा और विश्व वीणा को बजाते वक्त मेरे अंदर उत्साह, उमंग और उल्लास- ये तीनों भावनाएं अंगड़ाई लेने लगती हैं। आज पूरी दुनिया घर में कैद होकर रह गई है। इस समय हमें पॉजिटिव बातें ही सोचनी होंगी, तभी बुरा समय कटेगा। इन दिनों मेरे गुरु भी घर पर हैं, तो मैं उनसे कुछ अनूठी शिक्षाएं प्राप्त कर रहा हूं। महामारी के इस दौर में भी संगीत के माध्यम से आत्मा को शांति और मन को नियंत्रित किया जा सकता है। हम लोग बहुत असंयमित हो गए थे।


हमें खुद को संयमित करने का एक अवसर मिला है, तो इस समय आप स्वयं को संयमित कर सकते हैं। इसके अलावा आप समय का सदुपयोग अपने घर को सुंदर, स्वच्छ बनाकर कर सकते हैं और उसे कलात्मक ढंग से सजा व संवार सकते हैं। मैं सदैव ही इस बात का पक्षधर रहा हूं कि एक कलाकार होने के नाते मेरा घर अच्छा दिखे। अगर मुझसे मिलने कोई अतिथि या कोई साथी कलाकार आए, तो उसको यह लगना चाहिए कि यह एक कलाकार का घर है। इन दिनों मैं कलाकार की तरह अपने घर को सजा रहा हूं।


घर पर मेरी धर्मपत्नी डॉ. प्रीति भट्ट मुझे देखकर मंद-मंद मुस्कुराती रहती हैं कि मैं घर सजा रहा हूं। मैंने अपने कक्ष का कायाकल्प कर दिया है। यह समय सुनहरा अवसर है हर वह काम करने का, जो मैं व्यस्त होने के कारण नहीं कर पा रहा था। अपने जीवन को एक नए सिरे से व्यवस्थित, संगठित, संयोजित करने, संवारने और सजाने का यह सुनहरा अवसर है। जितने भी कार्य विलंबित हैं, उनको पूरा करके हमें जीवन को एक नई दिशा देनी चाहिए। बस, कुछ दिनों की बात है और फिर एक नई सुबह की भैरवी गूंजेगी। (लेखक सात्विक वीणा वादक हैं।)

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