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कोरोना संकट: एक प्रेममयी हेट स्टोरी

रामविलास जांगिड़
Updated Wed, 22 Apr 2020 09:08 AM IST
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लॉकडाउन की तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

टॉप एंगल से फुल शॉट का सीन इस प्रकार है कि दसों दिशाओं के सारे लॉक डाउन हुए पड़े हैं। कहानी का हीरो घर में कैद है। वह बाहर निकलने के लिए छटपटा रहा है। घर के बाहर कोरोना वायरस अपनी जीभ लपलपा रहा है। वह चुन-चुन कर लोगों को शिकार बना रहा है। 



अपना हीरो दुखी, परेशान, निराश-हताश है; क्योंकि हीरोइन का पिछले पांच दिन से कोई समाचार नहीं है। स्टोरी ब्रेक अप के करीब खिसक गई है। हे पाठक! कुछ जंतुनुमा जीव डॉक्टरों पर हमला कर रहे हैं। लॉकडाउनीय पुलिस पर पत्थर पेल रहे हैं। क्लोज शॉट में खूनम-खून दिखाई पड़ रहा है। फेसबुक, व्हाट्सएप, टि्वटर आदि सोशल बाजी भी खत्म हो चुकी है। सरकार ने इन सब पर बैन लगा दिया है। हीरो को हीरोइन से प्यार है। हीरोइन को भी हीरो से घनघोर प्यार है।


हे पाठक! इजाजत हो, तो हीरो को ढोला राजस्थानी बता दूं। हीरो राजस्थान के रेगिस्तानी इलाके का रहने वाला और हीरोइन उधर पाकिस्तान में लाहौर की निवासी। हीरो तड़प रहा है, तपती रेत पर पसरे पापड़ की तरह। घर, गली, मोहल्ला, शहर, राज्य, देश, दुनिया सब मरे-मरे से लॉक में डाउन हुए पड़े हैं।


घरों के बाहर कोरोना वायरस हवा में जीभ लहरा रहा है। हमारा हीरो बेकरार है। मिलने के लिए पल-पल याद सता रही है। हीरो हीरोइन ने गले मिल-मिलकर तीन-चार गीत भी गा दिए हैं। क्लोज शॉट में फ्लैशबैक में जाकर वुहान यूनिवर्सिटी की छत पर इठला भी चुके हैं। लांग शॉट में वुहान की सड़कों पर एक दूसरे का हाथ थामे वे बारह बार घूम भी चुके हैं। हे पाठक! अब इस कहानी का हीरो राजस्थान से लाहौर मिलने की कोशिश के लिए जा रहा है। आप रोक सको, तो रोक लो। लॉकडाउन और कोरोना वायरस के हालात भी हीरो को विचलित नहीं कर पा रहे। तो हुजूर! टॉप एंगल से ड्रोन कैमरा सीन इस प्रकार बता रहा है कि कहानी का हीरो लॉकडाउन को तोड़-ताड़कर रवाना हो रहा है।


राजस्थान से लाहौर की ओर! भूखा-प्यासा, तड़पता-भटकता! आखिर पहुंच ही गया। हेट स्टोरी की लवली कंट्रास्ट वाली सुपर-डुपर धार! आप भी तो कुछ बोलो यार! बस फोकट में इस्टोरी का मजा चूस रहे हो। हीरो को भयंकर कष्ट दे रहे हो। ये इच इस्टोरी सुपर हिट होगी। तो हमारा हीरो  लाहौर पहुंच गया। लाहौर पहुंचने पर उसे पता चला कि इस बेचारे की जो हीरोइन है, जो हीरो के प्यार में मरे जा रही थी, उसे सरकार पहले ही लाहौर से इस्लामाबाद ले गई। बेचारा हीरो लाहौर से इस्लामाबाद चला। लटकता व रोता! भटकता हुआ अपनी हीरोइन से मिलने। वहां जाकर उसे साम, दाम, दंड, भेदादि से पता लगा कि उसकी हीरोइन कोरोना महामारी में मारी गई। उसे कोरोना कब्रिस्तान में दफना दिया गया है।


हीरो रोता है। चिल्लाता है। चीखता है। वह पल-पल आंसुओं की नदियां बहता है। इस समय फिर चार-पांच गीत विरह के गाए जाते हैं। हीरो पूछता है, बताओ, उसकी कब्र कहां पर है? सयाने लोग उसे कब्र का पता बताते हैं। वह कब्र पर जाकर फिर दो गीत गाता है। वह अपनी हीरोइन की कब्र के पास दीया जलाकर सिर पटकता है। अब वह निश्चय करता है कि उम्र भर कोरोना पीड़ितों की सेवा में लग जाएगा। हे पाठको! एक बार फिर आपसे पूछ रहा हूं। आप कहें, तो हीरो को सेवा में इस्लामाबाद में ही लगा दें या फिर से राजस्थान बुला लें। जो भी आप कहो। इसमें केवल आपकी ही चलेगी। तो वह बेपरवाह होकर, बिना किसी सुरक्षा के, सारी स्वास्थ्य एडवाइजरी को धता बताते हुए हीरोइन की याद में कोरोना पीड़ितों की सेवा में लग गया। पता है न आपको! तब हमारा हीरो मर गया।


उसकी लाश लेकर जब लोग जाने लगे, तो उसके गले में ताबीज देख ठिठक गए, जिसमें उसने लिखा था कि मुझे अपनी हीरोइन की कब्र के पास ही जलाया जाए। हीरो का यह ताबीज देखकर चंद सयाने जन उसकी हीरोइन की कब्र के पास जलाने का जतन करने लगे। हे पाठक देव! अब मैं असहाय हूं। हेट स्टोरी या लव स्टोरी!!! इसी बीच, लोग धर्म की दुहाई देकर हंगामा करने लग गए। एक बिग-बिग टॉप एंगल में कोरोना एक प्रेममयी हेट स्टोरी में दंगा करते लोगों को फ्रीज कर दिया गया। स्क्रीन पर फिल्म के टाइटल चलने लगे हैं। अंधेरे के बीच टिमटिमाए बल्बों में जनता रोते हुए कुर्सियां छोड़ने लगी है। (लेखक वरिष्ठ व्यंग्यकार हैं।)

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