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न्याय पाने की कीमत : वह मौत के मंडराते साये से जूझने के लिए मजबूर है

सुभाषिनी सहगल अली Published by: सुभासिनी सहगल अली Updated Fri, 02 Aug 2019 12:06 AM IST
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उन्नाव दुष्कर्म मामला - फोटो : अमर उजाला

उन्नाव मेरे पड़ोस में है, इसलिए रह-रहकर ध्यान लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर की ओर जा रहा है, जहां एक बहादुर लड़की (और उसका वकील भी) अपनी जान बचाने की लड़ाई लड़ रही है। वह तीन साल से लड़ रही है। उसे न्याय पाने के लिए बार-बार अपनी जान की बाजी लगानी पड़ती है। अब जब देश की लाखों महिलाएं और तमाम संगठन उसके साथ हैं और खुद सर्वोच्च न्यायालय ने उसके हक में कुछ कदम उठाए हैं, वह मौत के मंडराते साये से जूझने के लिए मजबूर है।

उसने बड़ी हिम्मत के साथ न्याय की लड़ाई लड़ी है। लड़ते-लड़ते उसने पिता और दो चाचियों को खोया है। उसका घर और उसका गांव भी उसके लिए अब पराया है। उसका बचना जरूरी है, ताकि उसके जीने, उसके जीतने और उसकी प्रेरणा से न्याय की लड़ाई आगे बढ़ सके।



उन्नाव का एक गांव है माखी। वहां ठाकुरों का बोलबाला है। लड़की का परिवार भी ठाकुर है, लेकिन गरीब है। उसके चाचा और पिता आरोपी विधायक सेंगर के साथ ही ‘लगते’ थे और वह लगातार चुनाव जीतते थे। लड़की नौकरी की तलाश में थी। वह सेंगर विधायक के पास गई। उसने उसके साथ बलात्कार किया। इसके कुछ ही दिन बाद लड़की का विधायक के इशारे पर अपहरण हुआ, उसके साथ ज्यादतियां की गईं।

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उन्नाव दुष्कर्म मामला - फोटो : अमर उजाला
उन्नाव मेरे पड़ोस में है, इसलिए रह-रहकर ध्यान लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर की ओर जा रहा है, जहां एक बहादुर लड़की (और उसका वकील भी) अपनी जान बचाने की लड़ाई लड़ रही है। वह तीन साल से लड़ रही है। उसे न्याय पाने के लिए बार-बार अपनी जान की बाजी लगानी पड़ती है। अब जब देश की लाखों महिलाएं और तमाम संगठन उसके साथ हैं और खुद सर्वोच्च न्यायालय ने उसके हक में कुछ कदम उठाए हैं, वह मौत के मंडराते साये से जूझने के लिए मजबूर है।

उसने बड़ी हिम्मत के साथ न्याय की लड़ाई लड़ी है। लड़ते-लड़ते उसने पिता और दो चाचियों को खोया है। उसका घर और उसका गांव भी उसके लिए अब पराया है। उसका बचना जरूरी है, ताकि उसके जीने, उसके जीतने और उसकी प्रेरणा से न्याय की लड़ाई आगे बढ़ सके।

उन्नाव का एक गांव है माखी। वहां ठाकुरों का बोलबाला है। लड़की का परिवार भी ठाकुर है, लेकिन गरीब है। उसके चाचा और पिता आरोपी विधायक सेंगर के साथ ही ‘लगते’ थे और वह लगातार चुनाव जीतते थे। लड़की नौकरी की तलाश में थी। वह सेंगर विधायक के पास गई। उसने उसके साथ बलात्कार किया। इसके कुछ ही दिन बाद लड़की का विधायक के इशारे पर अपहरण हुआ, उसके साथ ज्यादतियां की गईं।

अपहरण के मामले में एफआईआर और गिरफ्तारियां भी हुईं, पर जब विधायक का नाम लिया गया, तो पुलिस ने समझाया कि उन्हीं की सरकार है, उनका कुछ नहीं बिगड़ेगा। लड़की मुख्यमंत्री के घर जनता दर्शन के दौरान गई। उनको ज्ञापन भी दिया, पर सेंगर के खिलाफ कुछ नहीं हुआ। लड़की ने प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, डीजीपी-सबको लिख डाला, पर कुछ भी नहीं हुआ।

अप्रैल, 2018 में लड़की का पिता अपनी बीमार मां के लिए दवा लेकर गांव आया। विधायक के भाई ने उसे बांधकर मारा और फिर गिरफ्तार करवा दिया। वह हिरासत में मर गया। लड़की मुख्यमंत्री के घर पहुंची और अपने ऊपर मिट्टी का तेल डाल आत्महत्या करने की कोिशश की।

उसके बाद सेंगर का नाम एफआईआर में जोड़ा गया, पर उसकी गिरफ्तारी नहीं हुई। इसके बाद ही इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि सेंगर को गिरफ्तार किया जाए। मामला तो दर्ज हुआ, पर सुनवाई के लिए कोई ‘फास्ट ट्रैक कोर्ट’ गठित नहीं किया गया।

उसके चाचा को भी झूठे मुकदमे में फंसाकर बंद कर दिया गया। उन्हीं को देखने वह चाचियों और वकील के साथ जा रही थी। सुरक्षाकर्मी उसके साथ नहीं थे। बिना लाइसेंस नंबर का एक ट्रक गलत तरफ से आया और उनकी गाड़ी को रौंद दिया। चाचियों की मौत हो गई। लड़की और वकील ट्रॉमा सेंटर में हैं।

पुलिस के मुताबिक, यह एक दुर्घटना है। पर लोग मानने को तैयार नही हैं। औरतें सड़क पर उतरीं। लोकसभा, विधानसभा में हल्ला मचा, प्रेस ने भी अपना फर्ज अदा किया और शाम तक सेंगर और उसके सहयोगियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज हो गया। कितनी-कितनी बातें अब सामने आई हैं। लड़की की सुरक्षा में लगे पुलिस वाले लगातार सेंगर के संपर्क मे थे। सेंगर का बेटा और अन्य सहयोगी परिवार को धमकाते रहते थे।

अब मामला दिल्ली में सुना जाएगा। परिवार को सर्वोच्च न्यायालय ने मुआवजा भी दिलवाया है। लेकिन एक लड़की को क्या न्याय पाने की कीमत अपनी जान गंवाकर ही अदा करनी पड़ेगी?  उस लड़की को जिंदा रहना चाहिए। जिन्होंने बलात्कारी का साथ दिया, उन सबको सीबीआई जांच की परिधि में लाया जाना चाहिए। यह सुनिश्चित करना उन सबका काम है, जो विचलित हैं, जो आक्रोशित हैं।

-लेखिका माकपा पोलित ब्यूरो की सदस्य हैं।
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