वर्ष 2020 को चिकित्सा जगत में बदलाव के दशक की शुरुआत होना चाहिए था, जब कई तरह की बीमारियों और शल्य चिकित्सा के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में काफी काम हुआ। लेकिन कोविड के आगमन के साथ दुनिया पूरी तरह से उलट-पलट गई और बीमारी और मौत के बवंडर में धकेल दी गई। कोविड के संदर्भ में स्वास्थ्य सुरक्षा सेवा में तुरंत सुधार की जरूरत महसूस हुई। इससे स्वास्थ्य सेवा का नया मॉडल विकसित हो गया। एकांतवास, दूरस्थ स्वास्थ्य सेवा और रोबोट तथा ड्रोन पर निर्भर प्रौद्योगिकी आधारित चिकित्सा पर जोर दिया जाने लगा।
उपचार के लिए विशिष्ट दवा एजेंटों और संक्रमण को रोकने के लिए टीके की खोज शुरू हो गई। इसके साथ ही अस्पताल में ढांचागत बदलाव की जरूरत भी महसूस हुई है। आज स्वच्छ हवा के लिए अब हीटिंग, वेंटिलेशन ऐंड एयर कंडीशनिंग (एचवीएसी) सिस्टम उपलब्ध है। कुछ कंपनियां तो नैनो टेक्नोलॉजी से लैस एयर कंडीशनर की पेशकश कर रही हैं। ये न केवल वायु प्रदूषण को खत्म करने में कारगर हो सकते हैं, बल्कि कोरोना वायरस जैसे संक्रमण को रोकने में भी सहायक हो सकते हैं। डिजिटल थर्मामीटर, हैंड सेनेटाइजर स्टैंड, ग्लास स्क्रीन और मास्क वायरस फैलाने वाले ड्रापलेट्स से सुरक्षा के लिए सर्वव्यापी बन गए हैं। आरोग्य सेतु एप कोविड के विस्तार को समझने और नियंत्रित करने में सहायक साबित हुआ है।
अनेक देशों ने सरकार समन्वित नियंत्रण तथा शमन प्रक्रिया को स्मार्ट फोन के साथ एकीकृत किया है, जिसमें निगरानी, परीक्षण, कांटेक्ट ट्रेसिंग और क्वारंटीन शामिल हैं, जिससे संक्रमण के वक्र को शीघ्र सीधा करने में मदद मिली। यह दिलचस्प है कि मॉस्को ने देश में संक्रमण का पता लगाने के लिए क्यूआर आधारित व्यवस्था शुरू की। तो अमेरिका स्थित तकनीक क्षेत्र के
दिग्गजों-एपल और गूगल ने जांच और संक्रमण का पता लगाने से संबंधित रणनीति के लिए साझेदारी प्रस्तुत की। वास्तव में लोग आज चिकित्सा संबंधी सलाह के लिए फोन और व्हाट्सएप का सहजता से इस्तेमाल कर रहे हैं। दवाओं की ऑनलाइन बिक्री में बढ़ोतरी हुई है। देश में महामारी से पहले तीस लाख लोग दवाओं की ऑनलाइन खरीदारी कर रहे थे और अब 90 लाख लोग। प्रधानमंत्री ने नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन की घोषणा की है, और इसकी जिम्मेदारी राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य प्राधिकरण को सौंपी गई है। इसके तहत डॉक्टरों, अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी अन्य जानकारियां एकत्र की जाएंगी और डिजिटिल हेल्थ आईडी तैयार की जाएगी। कोविड की वैक्सीन आने पर टीकाकरण संबंधी कार्यक्रम को आगे बढ़ाने में इसकी अहम भूमिका होगी।
प्रौद्योगिकी और स्मार्ट फोन के विस्तार का एक अहम पहलू यह भी है कि गर्भवती महिलाओं तक को एप के जरिये उनके स्वास्थ्य की जानकारी मिल रही है। निश्चित रूप से ये मॉडल महामारी के खत्म होने के बाद भी मातृत्व स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए अहम होंगे। टेलीहेल्थ सेवा से जुड़े अनेक लोगों का तर्क है कि महामारी के खत्म होने के बाद भी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्वास्थ्य सेवा लेने की व्यवस्था की जगह वीडियो विजिट ले लेगी। लोगों में डिजिटल स्वास्थ्य सेवा की बढ़ती स्वीकार्यता कोई गलत संकेत नहीं है। हालांकि यह भी सच है कि टेलीहेल्थ पूरी तरह से चिकित्सक के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपनी बीमारी की जानकारी देनी की जगह नहीं ले सकता। यह विशेष रूप से अनिद्रा, डिमेंशिया (मनोभ्रंश) और चिंता संबंधी भावनात्मक मनोविकारों के मामलों में सच है, कोरोना संक्रमितों में से 20 फीसदी मरीजों में ऐसे लक्षण पाए गए हैं।
कुछ देशों में वायरस की जांच के दौरान मुंह से सैंपल लेने, अल्ट्रासाउंड स्कैन और अस्पतालों में भोजन तैयार करने तक में रोबोट का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसी तरह से डिसइंफेक्शन करने और थर्मल इमेजिंग में भी रोबोट का इस्तेमाल हो रहा है। एक चीनी बहुराष्ट्रीय प्रौद्योगिकी कंपनी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित समाधानों का निर्माण किया है, ताकि बड़ी आबादी को प्रभावी ढंग से स्क्रीन किया जा सके और उनके शरीर के तापमान में बदलाव का पता लगाया जा सके। मगर ध्यान रहे, ऐसी सारी प्रौद्योगिकी की एक सीमा है।