बजट विशेष रूप से 7.5 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) लक्ष्य को पूरा करने तथा 6.4 फीसदी के राजकोषीय घाटे पर टिके रहने और सब्सिडी व अन्य पर बढ़े हुए खर्च को पूरा करने के लिए खर्च की बहुत बढ़ी हुई गुणवत्ता को दर्शाता है। पूरे साल के दौरान अर्थव्यवस्था ने शानदार प्रदर्शन किया है और उसका आकार पिछले साल के 236 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 273 लाख करोड़ रुपये हो गया है। वर्ष 2022-23 के दौरान सरकार के सामाजिक कार्यक्रमों पर पूरी तरह से अमल हो सका और 2023-24 के बजट अनुमान उसे इसी तरह आगे बढ़ाते हैं। सामाजिक क्षेत्र के कार्यक्रमों की फंडिंग में कोई कमी नहीं है, मसलन आवास योजना के कार्यक्रम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि प्रत्येक भारतीय के सिर के ऊपर छत हो, इसी तरह से जरूरतमंद हर भारतीय को मुफ्त खाद्यान्न की व्यवस्था हो। प्रधानमंत्री मोदी की सबसे बड़ी उपलब्धि यह सुनिश्चित करना है कि हर भारतीय के जीवन की बुनियादी जरूरतें पूरी हों। यही हमारे सपनों के नए भारत का निर्माण करेगा।
पूंजीगत खर्च 33 फीसदी की भारी वृद्धि के साथ 10 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जो कि बहुत अच्छा है, क्योंकि भारत को रेलवे व सड़क जैसे आधारभूत ढांचे में भारी वृद्धि के लिए कैपेक्स में बड़े पैमाने पर निवेश की जरूरत है। पूंजीगत व्यय में बढ़ोतरी अर्थव्यवस्था और उत्पादकता में वृद्धि करेगा तथा लागत घटाएगा। सरकार ने शहरी उत्थान, रोजगार सृजन, वित्तीय क्षेत्र में निवेश व सुधार आदि पर भी ध्यान केंद्रित किया है। स्टार्ट-अप्स के लिए तथाकथित कर-मुक्त अवधि बढ़ाने से देश में स्टार्ट-अप्स पर कोई खास असर नहीं पड़ने वाला है, क्योंकि ज्यादातर स्टार्ट-अप्स को अपने ऑपरेशन के शुरुआती दौर में नुकसान उठाना पड़ता है।
अनिवासी निवेश के लिए एंजेल टैक्स से छूट को कम करना एक बड़ा झटका है। जहां तक कर की बात है, तो 42.7 फीसदी की सर्वोच्च प्रभावी कर दर को कम कर 39 फीसदी करना अच्छा कदम है। यह उच्च निवल मूल्य वाले व्यक्तियों, यानी अमीरों को देश छोड़ने से रोकेगा। कर विवाद को कम करने के लिए संयुक्त आयुक्तों की संख्या 100 तक बढ़ाना भी एक अच्छा कदम है और यह सुनिश्चित करना कि कर प्रशासन को सुव्यवस्थित किया जाए, वास्तव में एक अच्छा सुधार है। कर मुकदमेबाजी संबंधी व्यय कम करने, अनुपालन घटने, कानून के मामूली उल्लंघन के लिए आपराधिक दंडों को दूर करने पर ध्यान केंद्रित करने से निश्चय ही कारोबार की सुगमता बेहतर होगी।
जहां तक व्यक्तिगत कर दर की बात है, तो इसमें प्रगति बहुत धीमी रही है। व्यक्तिगत करदाताओं के लिए मानक कटौती में वृद्धि बहुत मामूली है और नई कर व्यवस्था में अब सात के बजाय पांच स्लैब होंगे। स्लैब और घटकर तीन होने चाहिए थे। वित्तमंत्री ने कहा है कि आयकर में सिर्फ 35 हजार करोड़ रुपये की छूट मिलेगी, जो कि व्यक्तिगत आयकर के रूप में प्राप्त होने वाले नौ लाख करोड़ की तुलना में बहुत कम है। वित्तमंत्री ने आयकर स्लैब को तीन करने का सुनहरा मौका खो दिया। नई टैक्स व्यवस्था बहुत से लोगों को ज्यादा आकर्षक नहीं लगती, क्योंकि पुराने टैक्स स्लैब में तमाम छूटों के साथ-साथ अंतर बहुत ज्यादा नहीं है।
कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि यह परिवर्तनकारी बजट है, जिसमें कैपेक्स में वृद्धि के साथ ही सामाजिक योजनाओं पर जोर है, ताकि प्रत्येक भारतीय को जीवन की बुनियादी जरूरतें सहजता से उपलब्ध हो सकें। वित्तीय घाटे को 5.9 फीसदी करने के लक्ष्य से निश्चित रूप से 2023-24 में भारत तेजी से विकास करेगा। इससे 10.5 फीसदी नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दर हासिल करना आसान होगा।