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इस दिवाली पर तो कृपा करें माता

Wed, 22 Oct 2014 08:59 PM IST
पूरन सरमा
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हे उलूकवाहिनी माता लक्ष्मी! मैं आपको साष्टांग प्रणाम करते हुए प्रार्थना करता हूं कि इस बार आप अपनी तशरीफ का टोकरा मेरे यहां ले आएं। क्षमा करना माते, मैं इस बार आपके सामने देसी घी का दीपक नहीं जला पाऊंगा, क्योंकि देसी घी अमृत बन गया है और अमृत लाना मेरे बूते के बाहर है। लेकिन वनस्पति घी का दीपक जरूर जला दूंगा।
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मातेश्वरी, आप चंचला हैं। पर इस बार तो मेरे ऊपर कृपा कर कुछ दिन मेरे घर पर निवास करें। मैं भी आपके वाहन से कम नहीं हूं। आप चाहें, तो मुझे ही अपनी सवारी बना लें। यदि आपने ऐसा किया, तो मैं घुमा-फिराकर आपको अपने ही घर ले आया करूंगा। प्लीज माता, इस बार आप मेरा छप्पर फाड़ दें, नहीं तो मेरी तकदीर फूट जाएगी। कृपा कर मुझ गरीब पर तरस खाएं।

हे माता, आज के दिन झूठ नहीं बोलूंगा। मैं आपका अनन्य उपासक हूं। मैंने आपको लॉटरी के टिकट, सोने की खरीद और शेयर बाजार जैसे आय के वैकल्पिक साधनों में हमेशा खोजा है, लेकिन मैं बर्बाद ही हुआ हूं, क्योंकि आपने सदैव मुझसे मुंह मोड़ा है। हे माता, मेरे और मेरे बच्चों की दरिद्रता पर तरस खाएं और धन-धान्य की वर्षा करें। आप मेरे पड़ोसी के यहां आकर असीम धन-संपदा दे गईं, लेकिन मेरे यहां आने से कतराती रहीं। मैंने ऐसा क्या पाप किया है? पापी तो मेरे पड़ोसी हैं, जो कालाबाजारी, जमाखोरी तथा तस्करी करते हैं। मेरा पड़ोसी कल्याण सदैव मुझे पराजित करता रहा और आप यह देखती रहीं। इस बार आप कल्याण का ऐसा कल्याण करें कि वह चारों खाने चित हो जाए।
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माता, आप धन की देवी हैं और मैं धन का भूखा हूं। मुझे केवल धन की भूख है। मैं किसी भी तरीके से धन चाहता हूं। मुझ-सा दरिद्र आपको पूरी दुनिया में नहीं मिलेगा। मैं रोज हलवा-पूड़ी खाना चाहता हूं। रोज भव्य परिधान पहनना चाहता हूं। लेकिन मेहनत करना मेरे वश की बात नहीं है। मैं तो केवल चाहता हूं कि कोई गड़ा खजाना मुझे मिल जाए, जिससे बाकी जिंदगी आराम से कटे। आशा है, आप इस अकिंचन पर ध्यान देंगी।
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