प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बुलावे पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहली भारत यात्रा में अपने परिवार के साथ सिर्फ छत्तीस घंटे के दौरे के लिए बारह घंटे का सफर कर जिस तरह आए, वही भारत और अमेरिका के रिश्तों के बारे में बहुत कुछ बता देता है। ट्रंप का अपने परिवार के साथ भारत आने का खास मतलब है, क्योंकि भारत पारिवारिक जीवन मूल्यों को महत्व देता है। कई बार दो देशों के बीच बेहतर रिश्ते होने के बावजूद शीर्ष नेताओं के आपसी संबंध उतने प्रगाढ़ नहीं होते। मोदी और ट्रंप के निजी रिश्ते इतने नजदीकी, प्रगाढ़ और गर्मजोशी भरे हैं कि दोनों देशों के संबंधों पर आज उसका अनुकूल असर देखने को मिल रहा है। एक वह दौर था, जब भारत के खिलाफ अमेरिका प्रतिबंधों की घोषणा करता था। लेकिन आज अमेरिका हमें अपनी तकनीकों का लाभ देने के लिए तैयार है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नजरिये और उनकी कोशिशों का सुखद परिणाम है।
अहमदाबाद के मोटेरा स्टेडियम में हुआ 'नमस्ते ट्रंप' कार्यक्रम विगत सितंबर में अमेरिका के ह्यूस्टन में हुए 'हाउडी मोदी' की अगली कड़ी था। ह्यूस्टन का कार्यक्रम जहां लोकसभा चुनाव में भारी जीत के बाद नरेंद्र मोदी के अभिनंदन पर आधारित था, वहीं अहमदाबाद में हुआ कार्यक्रम अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से पहले हुआ है। इस कार्यक्रम को ट्रंप के आगामी चुनाव से जोड़ा जा सकता है। अमेरिका में भारतीय समुदाय को न केवल सबसे मेहनती और अमीर समुदायों में माना जाता है, बल्कि वहां बसे लगभग चौबीस लाख भारतीय अमेरिकी चुनाव में भी भूमिका निभाते हैं, जो एक बड़ी बात है। ट्रंप को इस सच्चाई का एहसास है। लिहाजा इस आयोजन का जहां ट्रंप को चुनाव में लाभ मिलने की उम्मीद है, वहीं दो देशों के बीच बेहतर रिश्ते से भारतीयों को भी अमेरिका में बढ़ती संभावनाओं की उम्मीद है। शायद भारतीयों को वीजा के मोर्चे पर इसका लाभ मिले। अमेरिका में भारतीयों का श्रम सिर्फ उन्हें ही लाभान्वित नहीं करता, इससे अमेरिका को भी फायदा होता है। वहां किसी भारतीय को मिलने वाले 300 डॉलर का मतलब है अमेरिकी के लिए कम से कम 3,000 डॉलर का इंतजाम।
ट्रंप के संबोधन की दो बातें ध्यान देने लायक रहीं। एक तो उन्होंने भारत की संस्कृति और इसकी पहचान के बारे में बताया। भारत की सांस्कृतिक विविधता के बारे में उनसे सुनना यादगार था। दूसरी बात यह कि उन्होंने भारत से संबंधित किसी विवादास्पद मुद्दे का जिक्र नहीं किया। जबकि पहले ऐसा लगा था कि वह शायद ऐसे किसी मुद्दे का जिक्र करेंगे। ऐसा लगता है कि उनके अधिकारियों ने भारत से जुड़े मुद्दों के बारे में उन्हें पहले ही अच्छी तरह समझा दिया था। ट्रंप वैसे भी ऐसा कुछ नहीं कहना चाह रहे होंगे, जिसका उनकी चुनावी संभावनाओं पर असर पड़े।
उन्होंने आतंकवाद का जिक्र किया और पाकिस्तान का नाम लिया। एफएटीएफ की बैठक में भी अमेरिका ने पाकिस्तान का साथ नहीं दिया। यह पाकिस्तान के लिए स्पष्ट संदेश है। हालांकि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में सिर्फ भारत-अमेरिका के होने से काम नहीं चलेगा, रूस और चीन जैसे देशों को भी आगे आना होगा। भारत ट्रंप के भाषण में अफगानिस्तान का जिक्र सुनना चाहता था। दरअसल अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों के निकल जाने के बाद उसके पुनर्निर्माण के काम में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका होनी चाहिए। नई दिल्ली में आज होने वाली आधिकारिक बैठक में ट्रंप संभवतः अफगानिस्तान में भारत की भूमिका के बारे में कहें।