स्वामी शिवानंद अपने कुछ शिष्यों के साथ गंगा नदी के तट पर नहाने पहुंचे। वहां एक ही परिवार के कुछ लोग अचानक आपस में बात करते-करते एक-दूसरे पर गुस्सा हो उठे, और जोर-जोर से चिल्लाने लगे। स्वामी जी यह देख तुरंत पीछे मुड़े और शिष्यों से पूछा, क्रोध में लोग एक-दूसरे पर चिल्लाते क्यों हैं?
शिष्य कुछ देर सोचते रहे। फिर एक ने उत्तर दिया, क्योंकि क्रोध में शांति खो जाती हैं। स्वामी जी ने फिर कहा, पर जब दूसरा व्यक्ति हमारे सामने ही खड़ा है, तो भला उस पर चिल्लाने की क्या जरूरत है? जो कहना है, वह धीमी आवाज में भी तो कहा जा सकता है।
कुछ और शिष्यों ने भी उत्तर देने का प्रयास किया, पर बाकी लोग संतुष्ट नहीं हुए। तब स्वामी शिवानंद ने कहा, जब दो लोग आपस में नाराज होते हैं, तो उनके दिल एक-दूसरे से बहुत दूर हो जाते हैं। और इस अवस्था में वे एक-दूसरे को बिना चिल्लाए नहीं सुन सकते। वे जितना अधिक क्रोधित होंगे, उनके बीच की दूरी उतनी ही अधिक हो जाएगी और उन्हें उतनी ही तेजी से चिल्लाना पड़ेगा।
क्या होता है, जब दो लोग प्रेम में होते हैं? तब वे चिल्लाते नहीं, बल्कि धीरे-धीरे बात करते हैं, क्योंकि उनके दिल करीब होते हैं। और जब वे एक-दूसरे को हद से भी अधिक चाहने लगते हैं, तब वे बोलते भी नहीं, सिर्फ एक-दूसरे की तरफ देखते हैं, और सामने वाले की बात समझ जाते हैं।
प्रिय शिष्यो, जब तुम किसी से बात करो, तो यह ध्यान रखो कि तुम्हारे हृदय आपस में दूर न होने पाएं। तुम ऐसे शब्द मत बोलो, जिससे तुम्हारे बीच की दूरी बढ़े नहीं, तो एक समय ऐसा आएगा कि वह दूरी इतनी अधिक बढ़ जाएगी कि तुम्हे लौटने का रास्ता भी नहीं मिलेगा।