उन्होंने डच ओपन के फाइनल, फ्रेंच और डेनिश ओपन के क्वार्टर फाइनल, जर्मनी में हायलो इवेंट के सेमीफाइनल, वर्ल्ड टूर फिनाले के सेमीफाइनल, विश्व चैंपियनशिप के सेमीफाइनल में खेला, जहां उन्हें कांस्य पदक मिला। इंडोनेशियाई ओपन और इंडोनेशियाई मास्टर्स, दोनों चैंपियनशिप में वह दुनिया के नंबर वन खिलाड़ी केंटो मोमोटा से पहले दौर में हार गए।
बिना किसी विश्राम के उन्हें दिल्ली में इंडिया ओपन खेलना पड़ा, जहां उन्होंने विश्व चैंपियन सिंगापुर के लोह को हराकर खिताब जीता। यूरोप के दौरे में वह जर्मन ओपन और ऑल इंग्लैंड के फाइनल तक पहुंचे। वर्ष 2022 में उन्होंने ओलंपिक चैंपियन विक्टर एक्सेलसन सहित सभी प्रतिष्ठित लोगों को हराया।
उन्होंने ऑल इंग्लैंड में छठी वरीयता प्राप्त मलयेशिया के ली जी जिया को और डेनमार्क के बेहद गतिशील और खतरनाक तीसरी वरीयता प्राप्त खिलाड़ी एंडर्स एंटोनसेन को भी हराया। लक्ष्य सेन की खासियत, उनकी मानसिक मजबूती, उनकी कमजोरी और ताकत, प्रशिक्षण आदि के बारे में उनके दोनों कोच -प्रकाश पादुकोण और विमल कुमार ही बता सकते हैं, जिन्होंने तब से उन्हें प्रशिक्षित किया है, जब लक्ष्य नौ साल के थे।
विमल बताते हैं, 'इस दुबले-पतले दिखने वाले बच्चे की जिस चीज ने सबसे पहले मुझे आकर्षित किया, वह थी रैली जारी रखने की उसकी क्षमता। उससे बड़े अन्य बच्चे तीसरे या चौथे स्ट्रोक के बाद गलतियां करते थे, पर वह मजे से खेलता रहता था। और फिर पूरे दिन वह बैडमिंटन हॉल में कुछ न कुछ करते रहता था। उसे बस बैडमिंटन खेलना पसंद था।
कई बार उसके पिता को उसे बाहर ले जाना पड़ता था।' इससे प्रकाश भी सहमत हैं, जो कहते हैं कि ‘मुझे प्रारंभिक दिनों में ही एहसास हुआ कि वह कुछ खास था। खेल के लिए उनका प्यार स्पष्ट था और वह तेज सीखने वालों में से था।’ लक्ष्य के दैनिक कोच विमल के अनुसार, 'उसके जूनियर दिनों से ही यह स्पष्ट था कि उसे बड़े नामों की परवाह नहीं है।
जितना बड़ा उतना बेहतर। वह विश्व जूनियर का नंबर वन खिलाड़ी बन गया और मात्र 17 वर्ष की उम्र में ही उसने डच ओपन जीता था।' लक्ष्य समझदार हैं, वह कभी परेशान नहीं होते और मानसिक रूप से मजबूत हैं। प्रकाश का मानना है कि 'लक्ष्य बहुत मेहनती, अपने खेल पर केंद्रित, अनुशासित, समर्पित, जमीनी और अपने से उच्च रैंक वाले खिलाड़ी के साथ खेलते हुए भी मानसिक रूप से मजबूत रहता है।'
लक्ष्य काफी सजग हैं और हमेशा अंक पाने के तरीके ढूंढते रहते हैं, कोर्ट में कुछ नया करते रहते हैं। प्रतिद्वंद्वी को बाहर निकालने की रणनीति बनाते हुए उनके पास हमेशा दो तीन योजनाएं होती हैं, और कोर्ट पर जोखिम लेने से भी उन्हें गुरेज नहीं है। विमल कहते हैं कि 'वह हमेशा अपने विरोधी खिलाड़ी की कमजोरी पकड़ने की कोशिश करता है, ताकि उसका फायदा उठा सके।
उसके खेल में कोई स्पष्ट कमजोरी नहीं है। लेकिन उनका डिफेंस, नेट प्ले और आक्रमण में विविधता कमाल की है।' लक्ष्य तकनीकी रूप से एक संपूर्ण खिलाड़ी हैं। हालांकि वह पहले से ही खिताब जीत रहे हैं, पर उन्हें कुछ बड़ी स्पर्धाओं में जीत हासिल करनी है। विश्व चैंपियनशिप, एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल इस साल निर्धारित हैं और यहीं उन्हें स्कोर करना है।
लक्ष्य अब आराम के लिए स्वदेश लौटने से पहले स्विस ओपन में खेलेंगे। वह अपने समकक्षों-मलयेशिया के ली जी जिया और थाईलैंड के कुनलावुत विटिडसर्न से छोटे हैं। इसलिए ऐसा कोई कारण नहीं है कि वह दुनिया के सर्वश्रेष्ठ शटलर न हों।
जैसा कि प्रकाश कहते हैं, 'लगभग छह महीने पहले विश्व सर्किट के फिर से शुरू होने के बाद से लक्ष्य लगातार खेल रहा है। यह कोई साधारण कार्य नहीं है। उसने सही मायने में विश्व मंच पर अपने आगमन की घोषणा की है।' अब उनका वक्त शुरू हो गया है। (-पूर्व बैडमिंटन खिलाड़ी और कोच)