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आत्मनिर्भर भारत की रूपरेखा

मनीषा प्रियम Published by: संजीव कुमार झा Updated Mon, 17 Aug 2020 07:40 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पीटीआई

भारत की स्वतंत्रता के सात दशक के उपरांत अब विगत सात वर्षों से कभी विपक्ष में रही भारतीय जनता पार्टी के जननायक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किला पर फिर से देश के दूरदर्शी नेता के रूप में दिखे। राष्ट्रीय ध्वज फहराने की मुख्य कर्ताधर्ता भारतीय सेना की मेजर श्वेता पांडे बनीं और यह पहली बार हुआ कि स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भारत के सैन्य दलों का प्रतिनिधित्व किसी महिला ने किया।



लाल किला भारत के स्वतंत्रता संग्राम का सबसे महत्वपूर्ण प्रतीक है, क्योंकि 1857 का बिगुल यहीं से बजा था। इस बार प्रधानमंत्री लाल किला से ऐसे वक्त में राष्ट्र को संबोधित कर रहे थे, जब देश का हर नागरिक अपने जीवन की सबसे बड़ी स्वास्थ्य संबंधी त्रासदी से जूझ रहा है। कोरोना महामारी के चलते दुनिया के विकसित और विकासशील, सभी राष्ट्रों के सामने एक ही सबसे प्रमुख चुनौती है कि कैसे जल्द से जल्द मानवता के संरक्षण हेतु कोरोना से बचाव के लिए टीके तैयार किए जाएं।


प्रधानमंत्री ने देश के लोगों का उत्साह बढ़ाते हुए अपने देश में टीके के वैज्ञानिक आविष्कार का जिक्र करते हुए आश्वस्त किया कि भारत में एक साथ कोरोना वायरस के तीन टीकों पर अलग-अलग चरणों में वैज्ञानिक शोध एवं परीक्षण की प्रक्रिया चल रही है। हाल ही में लद्दाख में चीन के साथ हमारा सीमा विवाद बढ़ गया था। यहां तक कि स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर भी चीनी सैन्य बलों ने भारतीय सीमा पर आक्रामकता दिखाई, जिसका भारतीय सैन्य बलों ने सशक्त तरीके से जवाब दिया। इसी के मद्देनजर प्रधानमंत्री ने बिना चीन या पाकिस्तान का नाम लिए कहा कि एलओसी (नियंत्रण रेखा) से लेकर एलएसी (वास्तविक नियंत्रण रेखा) तक हमारी सेना के जवानों ने दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब दिया।


यही नहीं, सीमा के 173 जिलों में विकास के प्रबल कदम उठाने की बात उन्होंने कही। उन्होंने आतंकवाद और विस्तारवाद का जिक्र करते हुए पाकिस्तान और चीन की तरफ ही संकेत किया और बताया कि विस्तारवाद से मुकाबले में भारत क्या योगदान दे सकता है। उन्होंने न केवल देश के लोगों को अपने भाषण के जरिये हिम्मत दी, बल्कि देश को आगे बढ़ाने का स्वप्न भी दिखाया।  इस समय देश के सामने कई तरह की चुनौतियां हैं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस महत्वपूर्ण मौके को फिर से भारत के नागरिकों से सीधा संवाद स्थापित करने के लिए सदुपयोग किया। यहां यह जिक्र करना महत्वपूर्ण होगा कि उनके पूरे भाषण में नागरिक शब्द का इस्तेमाल 25-26 बार से भी ज्यादा किया गया।


प्रधानमंत्री ने इस मौके पर विकास की अपनी रूपरेखा और अपने लक्ष्यों का और विस्तार किया। कोरोना संकट के समय पूरे देश को यह महसूस हुआ कि हमारे पास स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढांचे की कमी है। इसलिए प्रधानमंत्री ने नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन की बात की, जिसमें स्वास्थ्य और तकनीक को एक साथ जोड़ा जाएगा। अनुमान है कि इसके तहत भारत के हर नागरिक के पास एक स्मार्ट कार्ड होगा, जिसमें उनके स्वास्थ्य से संबंधित हर जानकारी दर्ज की जाएगी और उसे आधार कार्ड से भी जोड़ा जाएगा। यानी हर नागरिक का स्वास्थ्य रिकॉर्ड तकनीकी रूप से दर्ज किया जाएगा, ताकि किसी भी स्वास्थ्य संकट के समय इलाज में सुविधा हो।


इसके अलावा प्रधानमंत्री ने जन औषधि केंद्रों का भी जिक्र किया और महिलाओं के माहवारी स्वास्थ्य का भी। यह पहली बार है कि लाल किले से महिला स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण सैनिटरी नैपकिन का जिक्र खुलकर किया गया और महिला स्वास्थ्य को एक सामाजिक मुद्दा बनाया गया। अब तक जिस विषय को टैबू समझा जाता रहा है, उसका प्रधानमंत्री द्वारा लाल किला से जिक्र करने का मतलब है कि अब इस मामले में जागरूकता बढ़ेगी और महिलाओं के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। गांव, समाज और विकास-इन्हीं मुद्दों को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री ने एक हजार दिनों में छह लाख गांवों में ऑप्टिकल फाइबर लगाने की बात की। आज के युग में जब स्मार्ट टेक्नोलॉजी को ही विकास के विस्तार का आधार माना जा रहा है और स्कूल-कॉलेज की शिक्षा भी ऑनलाइन होने वाली है, ऐसे में ऑप्टिकल फाइबर के विस्तार की यह योजना बहुत ही महत्वपूर्ण है।


इससे पहले ही ढाई लाख पंचायतों तक ऑप्टिकल फाइबर के जरिये इंटरनेट पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था, जिसमें से करीब डेढ़ लाख पंचायतों तक यह काम पूरा हो चुका है। अपने डिजिटल लक्ष्य को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत के दूरस्थ इलाके, जैसे लक्षद्वीप के टापू को भी डिजिटल क्रांति से जोड़ा जाएगा। इसके अलावा प्रधानमंत्री ने किसानों के हाथों तक ज्यादा पैसा पहुंचाने की बात की है, जो अर्थव्यवस्था को भी गति देने वाली है। एक तरफ उनकी सरकार सीमा सुरक्षा की बात कर रही है, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों को भी नए संचार के तार से जोड़ने की बात कर रही है।
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यानी अगले कुछ वर्षों तक सरकार का विशेष ध्यान ग्रामीण विकास पर रहने वाला है। अपने पूरे भाषण में उन्होंने आत्मनिर्भरता की बात कई बार दोहराई और गो वोकल फॉर लोकल (स्थानीय उत्पादों का गुणगान) का नारा भी दिया। चाहे उत्पादों का निर्यात बढ़ाने की बात हो या कच्चा माल के बजाय उत्पाद निर्माण की बात, सेना के लिए हथियार तैयार करने की बात हो या मास्क, पीपीई किट और कोरोना का टीका तैयार करने की बात हो, इस सबके केंद्र में आत्मनिर्भर भारत का स्वप्न था।


कुल मिलाकर संदेश यही है कि आने वाले वर्षों में डिजिटल विस्तार पर बल होगा, स्थानीय उत्पादों पर बल होगा, देश को विनिर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने, निर्यात बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा तथा महिलाएं विकास का केंद्र बनेंगी और वे बॉर्डर एवं सीमा सुरक्षा के मामले में भी सरकार के सशक्त इरादों का परचम लहराएंगी। अगले दो वर्षों में हमारी स्वाधीनता का 75 वां वर्ष होगा, जो भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण दिवस होगा, जैसा कि

उन्होंने भाषण के अंत में कहा भी कि इस अवसर पर भारत एक सशक्त, आत्मनिर्भर राष्ट्र होगा और हम इसे अपने संकल्पों की पूर्ति के महापर्व के रूप में मनाएंगे।

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