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उसे देखे जमाना हो गया है!

Sat, 24 May 2014 08:37 PM IST
अभिनव अरुण
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उसे देखे जमाना हो गया है
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मेरा बच्चा सयाना हो गया है।

मेरा दिल गांव में बसता है बेशक
शहर में आब - ओ - दाना हो गया है।

तेरी पायल की रुनझुन बज रही मां
तेरा लोरी सुनाना हो गया है।

अकेला सच का परचम ढो रहा हूं
मुकाबिल ये ज़माना हो गया है।

फकीरों ने उसे दिल से दुआ दी
वो खुद अपना दीवाना हो गया है।

बयानों में तुम्हारे ताजगी है
मगर किस्सा पुराना हो गया है।

नमक रिश्तों में ज्यादा घुल गया था
तेरा जाना बहाना हो गया है।

बहुत शीरीं हुआ लहजा तो जैसे
लता का एक गाना हो गया है।

मैं उसकी याद में खोया हूं जब भी
लगा मिलना मिलाना हो गया है।

खुशी में मां के आंसू मुझपे ढलके
मेरा गंगा नहाना हो गया है।

मेरे घर में बुजुर्गों की है इज्जत
दुआओं का खजाना हो गया है।

-अभिनव अरुण
(सहजता और स्वाभाविकता अभिनव की कविता के बुनियादी तत्व हैं। वाराणसी में रहते हैं।)
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