यह बात तो माननी पड़ेगी कि वह अपने बच्चों से बहुत प्यार करता है। कहने वाले कहते हैं कि वक्त पड़ने पर वह अपने बाप का भी सगा नहीं होता, लेकिन बच्चों के मामले में वह आदर्श पिता है। ऐसा नहीं कि पत्नी को सुविधा की कमी रहती हो, पर बच्चों के लिए वह कभी जेब की तरफ नहीं देखता।
पत्नी लंच के लिए दस बार फोन लगाती रहती है, मगर वह नहीं पहुंच पाता, लेकिन बच्चे मिस्ड कॉल भी कर दें, तो वह भागा चला आता है।
ऐसा नहीं कि उसकी यह ख्याति सिर्फ घर तक ही है। दफ्तर से लेकर राजधानी के सचिवालय तक इस बात के चर्चे होते रहते हैं कि क्या कमाल का बाप है। मंत्री जी का दौरा हो और उसी समय बच्चों के स्कूल से पैरेंट्स मीट का बुलावा आ जाए, तो वह मंत्री को भी ठेंगा दिखा दे। चूंकि यह खूबी मंत्री भी जानते हैं, इसलिए वसूली के लिए निकलने से पहले यह जरूर देख लेते हैं कि कहीं बच्चों का जन्मदिन तो नहीं है, बच्चों की परीक्षा तो नहीं है, बच्चे बीमार तो नहीं हैं।
रिश्वत देने वाले भी जानते हैं कि साहब तभी हाथ लगाते हैं, जब बच्चे स्कूल गए हों या घर में न हों। वे ऐसे मौकों पर बंगले के कर्मचारियों से सूचना निकलवा लेते हैं कि कौन-सा मुहूर्त ठीक रहेगा। बच्चों की परीक्षा शुरू होने से पहले ही वह छुट्टी लेकर बैठ जाते हैं। ठेकेदार से लेकर इंजीनियर तक इस तैयारी से काम करते हैं कि परीक्षा से पहले सारे पेंडिंग बिल पास हो जाएं। उस दौरान वह किसी से न मिलते हैं, न बात करते हैं। और तो और, रात में पीते भी नहीं।
ऐसा नहीं है कि उन्हें अपनी इस खूबी का पता नहीं। अपनी इस अकेली अच्छाई को बनाए रखने में वह कोई कसर नहीं छोड़ते। दिन और रात में फर्क नहीं समझते। बात बच्चों से शुरू होती है और बच्चों पर ही खत्म होती है। अच्छे पिता होने के अलावा उनमें कोई और सद्गुण नहीं है, इसलिए वह अपनी इस अकेली ख्याति को बचाए रखने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ते। लेकिन यदि बच्चे बड़े हो गए, तो इस इकलौती खूबी के जाने का गम उन्हें अभी से तंग करने लगा है।