रूस में लकड़ी की बनी इमारत सुत्यागिन हाउस रविवार को जलकर खाक हो गई। इसके संदर्भ में दावा किया जाता है कि अर्खंगेल्स्क में बनी यह 13 मंजिला इमारत लकड़ी से बनी दुनिया की सबसे ऊंची इमारत थी।
सुत्यागिन हाउस का इतिहास ज्यादा पुराना नहीं है, पर विवादों से घिरा रहा है। 144 फुट लंबी इस इमारत को स्थानीय उद्योगपति निकोलाई पट्रोविच सुत्यागिन ने बनवाया था। इसका निर्माण 1992 में शुरू हुआ। हालांकि उनकी योजना सामान्य घर की तरह इसे महज दो मंजिला बनाने की ही थी, पर जब यह तैयार हुई, तो मशरूम की तरह 'अजीब' दिख रही थी। इसलिए इसकी खूबसूरती निखारने के लिए ही उन्होंने अन्य मंजिलें बनवाईं।
इस इमारत को बनवाने की न तो निकोलाई ने कोई अधिकृत अनुमति ली, और न ही उन्होंने कोई बेहतर योजना बनाई। इसी बीच 1998 में धोखाधड़ी के एक मामले में उन्हें चार साल के लिए जेल हो गई और इसका निर्माण कार्य अधर में लटक गया।
सुत्यागिन हाउस के इतिहास में वर्ष 2008 निर्णायक मोड़ साबित हुआ। लकड़ी का भवन होने के कारण इससे शहर को खतरा बताया गया, क्योंकि इसमें आग आसानी से पकड़ सकती थी। लिहाजा एक फरवरी, 2009 को स्थानीय अदालत ने इसे ध्वस्त करने संबंधी आदेश जारी कर दिए। इसी निर्देश के तहत 26 दिसंबर, 2008 को इसके ऊपरी हिस्से को गिराकर फिर से इसे दो मंजिला बना दिया गया।
इस इमारत के विषय में यह भी कहा जाता था कि निकोलाई सुत्यागिन के पास इतने ही साधन थे कि पहली मंजिल को ही बिजली और गरमी दी जा सके। बहरहाल यह इमारत भले ही विवादित रही हो, पर पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र जरूर थी।