शुरू में मुझे इतालवी साहित्य में पढ़ाई का शौक नहीं था। मैं तो रसायनशास्त्र का मुरीद था। इसलिए मैंने साहित्य के मानवतावादी शिक्षण से इन्कार कर दिया। लेकिन यह मेरे भीतर समा गया। मैं अपने शिक्षक से एक विवाद में फंस गया, क्योंकि वह मुहावरों एवं वाक्यांशों की उचित रचना पर जोर देते थे। लेकिन मुझे यह सब समय की बर्बादी लगता था।
खासकर तब जब मैं तारों, चांद, रोगाणुओं, जंतु, पौधों, रसायनशास्त्र आदि के सार्वभौमिक मायने तलाश रहा था। मुझे इतिहास, दर्शन, साहित्य जैसे विषय बाधा लगते थे। लेकिन मेरे पिता को पढ़ने का बहुत शौक था। हालांकि वह बहुत समृद्ध नहीं थे, लेकिन मेरे लिए नई-नई किताबें लाने में वह बहुत उदार थे।
उन्होंने ही मुझमें साहित्य के प्रति अनुराग पैदा किया। उन्होंने डी. एच. लॉरेन्स, हेमिंग्वे आदि कई महत्वपूर्ण लेखकों की किताबें मुझे लाकर दीं। जब मैं बारह वर्ष का था, उसी समय मेरे पिता ने मुझे फ्रायड की किताब लाकर पढ़ने के लिए दी।
मैं वसंत में कलियों को फूटते हुए देखता, ग्रेनाइट में अभ्रक की चमक देखता, अपने हाथों को देखता और खुद से कहता था कि एक दिन मैं इन सबका रहस्य जानूंगा। अगर कोई लेखक आश्वस्त होता है कि वह ईमानदार है, तो उसके लिए बुरा लेखक बनना मुश्किल होता है।
जीवन का उद्देश्य है, मृत्यु के खिलाफ सबसे बेहतर ढंग से रक्षा। कोई भी देश तभी सभ्य माना जाता है, जब वहां के कानून और ज्ञान की प्रभावशीलता कमजोरों को और कमजोर होने तथा ताकतवर को और ताकतवर होने से रोकती है।