मेरी परवरिश इकलौती संतान के रूप में हुई। बचपन में जीवन में अपनी उपस्थिति से मैं असहज थी कि मैं कौन हूं और मुझे क्या करना चाहिए। बाद में मैंने समझा कि घटनाओं के बारे में हमें चिंतित नहीं होना चाहिए और उसका मतलब समझने की कोशिश करनी चाहिए।
सदियों से कुछ कवियों ने जानवरों को आवाज देने की कोशिश की है और कुछ पाठकों ने उनके प्रति सहानुभूति और दुख महसूस किया है। अगर जानवरों के पास आवाज होती, तो वे देवदूतों की जबान में बात कर सकते थे।
जानवरों के प्रति हमारा व्यवहार किसी नैतिक दृष्टिकोण के लिहाज से महत्वपूर्ण नहीं होता, बल्कि यह मानव जाति के बौद्धिक और नैतिक विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण है। हम इस दुनिया में बचे हुए हैं, तो सिर्फ इसलिए नहीं कि हम योग्य हैं, बल्कि इसलिए कि हम मनुष्य के साथ-साथ पशुओं से भी प्यार करते हैं।
कोई भी लेखक अपनी या दूसरों की सेवा करने के लिए नहीं लिखता है, बल्कि वह उस महान मौलिक गरिमा के लिए लिखता है, जिसे हम जानते हैं। अच्छा लेखन सुख या राहत नहीं पहुंचाता है। यह कोई नुस्खा नहीं है, लेकिन पाठकों पर इसका असर जादुई हो सकता है।
जिस तरह हम सामान्य चीजों के बारे में तर्कसंगत तरीके से सोचते हैं, उस तरह ईश्वर के बारे में नहीं सोच सकते, पर इसका मतलब यह नहीं कि हमें ईश्वर के बारे में सोचना छोड़ देना चाहिए। हमें अपने जानने की सीमा बढ़ानी चाहिए और कभी अनजानी चीजों के अंधेरे में गहरे उतरना चाहिए। मानवतावाद का मतलब मानवीय गुणों का श्रेय ईश्वर को देना है।
-मशहूर अमेरिकी उपन्यासकार