कलाकार की कोई अहमियत नहीं है, जो वह रचता है अहमियत उसकी है, क्योंकि कहने लायक कुछ भी नया नहीं है। एक कलाकार वह प्राणी है, जिसे दैत्य दौड़ाते हैं, वह नहीं जानता है कि उन्होंने उसे ही क्यों चुना और असल में उसे ये सब सोचने की फुरसत भी नहीं है। लेखक की अकेली जवाबदेही अपनी रचना के प्रति है, अगर वह अच्छा रचनाकार है, तो वह पूरी तरह निष्ठुर होगा। उसका एक स्वप्न है। वह उसे इतना तड़पाता है कि उससे छुटकारा पाना जरूरी है। छुटकारा पाए बिना उसे शांति नहीं।
किताब लिखे जाने के लिए हर चीज तय ढंग से होती है: सम्मान, गर्व, गरिमा, सुरक्षा, प्रसन्नता, सब कुछ। कलाकार को सिर्फ उतना ही पर्यावरण चाहिए, जिसमें उसे कम से कम कीमत पर कितनी भी शांति, कितना भी एकांत और कितनी भी खुशी हासिल हो सके। गलत पर्यावरण से उसका ब्लड प्रेशर बढ़ेगा, ज्यादा वक्त वह कुंठित और चिड़चिड़ा रहेगा। लेखक को आर्थिक आजादी नहीं चाहिए। उसे बस चाहिए एक कलम और कुछ कागज। पैसों के उपहार पाकर मुझे कभी नहीं लगा कि लेखन में कुछ अच्छा निकल पाया हो।
अच्छे लेखक को कुछ भी बर्बाद नहीं कर सकता है। जो एक चीज अच्छे लेखक को बदल सकती है, वह है मृत्यु। अच्छे लेखकों के पास सफलता से गदगद होने का वक्त नहीं है। अगर आप सफलता के सामने लोट जाएंगे, तो वह आप पर चढ़ बैठेगी। इसलिए उसे उलटे हाथ की एक लगाएं, तब हो सकता है कि वह रेंगने लगे। चिड़िया की उड़ान को देखकर मुझे अच्छा महसूस होता है।
लेखन के लिए कोई एक यांत्रिक तरीका नहीं है, कोई छोटा रास्ता नहीं है। अपनी गलतियों से खुद को शिक्षित करो। लोग सिर्फ गलतियों से ही सीखते हैं। अच्छा कलाकार मानता है कि उसे सलाह देने के लिए कोई इतना होशियार नहीं। उसके पास एक आला दर्जे का गर्व होता है।
*नोबेलजयी अमेरिकी उपन्यासकार