फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

'दुख में हम अपने अस्तित्व के प्रति जागरूक होते हैं'

Thu, 15 Mar 2018 12:57 AM IST
ग्राहम ग्रीन
विज्ञापन
Graham Greene
विज्ञापन

मैं उन परिस्थितियों के बारे में लिखता हूं, जो सार्वभौमिक हैं। सार्वभौमिक परिस्थितियां ज्यादा सही हो सकती हैं। लेखन उपचार का एक तरीका है; कभी-कभी मुझे यह सोचकर हैरानी होती है कि जो लोग नहीं लिखते हैं, या जो लोग चित्र नहीं बनाते हैं, या जो संगीत से नहीं जुड़े हैं, वे मानवीय जीवन में निहित उदासी, आतंक और डर से कैसे बचते हैं! इनसे बचने के लिए साहित्य-कला आवश्यक है। बचपन में हमेशा एक ऐसा क्षण आता है, जब दरवाजा खुला होता है और आगे भविष्य होता है...हमें निश्चित रूप से उस क्षण का शुक्रगुजार होना चाहिए।

विज्ञापन

दर्द के बारे में लिखना आसान है, दर्द में हम लोग खुशी से अकेले होते हैं। आत्म अभिव्यक्ति एक कठिन चीज है। यह सब कुछ को खत्म कर देती है, यहां तक कि आत्म को भी। अंत में आपको लगता है कि आपको व्यक्त करने के लिए आत्म भी नहीं मिला है। खुशी की तुलना में दुख की भावना को व्यक्त करना आसान होता है। दुख के समय में हम अपने अस्तित्व के प्रति जागरूक होते हैं। लेकिन खुशी में हम अपनी पहचान खो देते हैं। कभी-कभी मुझे लगता है कि हमारा जीवन इंसानों की तुलना में पुस्तकों से ज्यादा प्रभावित होता है। ये किताबें ही होती हैं, जो हमें प्यार और दर्द के बारे में सिखाती हैं। अगर हमें प्यार करने का सुखद अवसर मिलता है, तो वह इसलिए कि हमने जो किताबों में पढ़ा है, उसने हमें प्रभावित किया है। अगर मेरे पिता के पुस्तकालय में अच्छी किताबें नहीं होतीं, तो शायद मैं प्यार के बारे में जान भी नहीं पाता।
विज्ञापन

-ब्रिटिश उपन्यासकार

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें