मैं अपनी पूरी जिंदगी यही समझता रहा कि मैं कुछ जानता हूं, लेकिन एक अजीब दिन आया, जब मुझे पता चला कि मैं कुछ नहीं जानता हूं। और इसलिए शब्दों का अर्थ शून्य हो गया। मैं अंतिम अनिश्चितत पर बहुत देर से पहुंचा। कविता एक तरह से प्रेरक गणित है, जो अमूर्त आंकड़ों, त्रिकोणों, वर्गों के लिए नहीं, बल्कि मानवीय भावनाओं के लिए समीकरण देता है।
अगर किसी का मन विज्ञान के बजाय जादू में ज्यादा रमता है, तो वह मंत्र के रूप में इन समीकरणों की बात करना पसंद करेगा। यह ज्यादा ही दुर्बोध और रहस्यमय जान पड़ता है। लेकिन साहित्य शून्य में नहीं रहता है। अपनी योग्यता के अनुसार लेखकों का एक निश्चित सामाजिक कार्य होता है। कविता बेहद जटिल कला है...यह एकपक्षीय और पारंपरिक प्रतीकों के जरिये शुद्ध ध्वनि की कला है। कविता एक ऐसी भाषा है, जो अपनी अनिवार्यता को कम करती है।
क्लासिक साहित्य इसलिए क्लासिक नहीं होता कि यह कुछ संरचनात्मक नियमों के अनुकूल या कुछ परिभाषाओं में फिट बैठता है, बल्कि यह एक निश्चित, शाश्वत और अदम्य ताजगी के कारण क्लासिक
होता है। जिन कवियों की संगीत में दिलचस्पी नहीं होती, वे बहुत खराब कवि होते हैं। अगर किसी राष्ट्र में साहित्य का मूल्य घट जाता है, तो वह राष्ट्र पतन की ओर अग्रसर होता है।
अगर कोई व्यक्ति अपने विचारों के लिए खतरे उठाना नहीं चाहता है, तो या तो उसके विचार अच्छे नहीं हैं या वह स्वयं अच्छा नहीं है। एक सभ्य व्यक्ति गंभीर सवालों के गंभीर जवाब देता है। सभ्यता अपने आप में समझदार मूल्यों का एक संतुलन है।
-मशहूर प्रवासी अमेरिकी कवि