वास्तव में साहित्यिक पुस्तकों के अध्ययन ने ही मुझे लेखन की तरफ मोड़ा। खासकर मार्क ट्वैन जैसे अमेरिकी क्लासिक लेखकों के साहित्य ने प्रारंभिक जीवन में ही मुझे सिखा दिया था कि सामान्य लोगों के सामान्य जीवन पर उच्च कलात्मक कृतियां लिखी जा सकती हैं।
मेरी सारी किताबें कुछ अर्थों में विफल हुई हैं, अगर ऐसा नहीं होता, तो फिर मैं दूसरी किताब क्यों लिखता! अगर मैं अपनी किसी किताब से संतुष्ट हो जाता, तो मैं फिर से और कोई किताब क्यों लिखना चाहता? जरूरी नहीं है कि ऐसा सबके साथ सच हो, लेकिन मेरे लिए यही सच है। अभी तक मैं अपनी सर्वश्रेष्ठ किताब लिखने में कामयाब नहीं हुआ हूं।
मुझे उन बच्चों के साथ काम करना पसंद है, जो सप्ताहांत में एक पूरी किताब पढ़कर खत्म कर देते हैं। आप उन्हें एक किताब पढ़ने के लिए दीजिए, किताब पढ़ने के बाद जब वे वापस लौटेंगे, तो वे पूरी तरह बदल चुके होंगे। और यह मेरे लिए बेहद दिलचस्प और रोमांचक घटना होती है।
मैं बदलावों से अवगत हूं, लेकिन किसी भी मायने में मैं यह नहीं मानता कि हम उत्तर-नस्ली समाज में रहते हैं। आप दुनिया में जाइए, वह सब कुछ पढ़िए, जो पढ़ सकते हैं। आप जिन चीजों से प्रेम करते हैं, उनका अनुसरण करते हैं, तब आपको पता चलता है कि यह कितना कठिन है।
आप दुनिया को अपनी दृष्टि से देखते हैं। आप अपनी बात कहना सीखते हैं और आप लिखना सीखते हैं। लेखकों के पास आज कई अवसर हैं। कोई भी व्यक्ति जो लिखने का विकल्प चुनता है, उनमें से बहुत कम अपने काम से जीना सीख पाते हैं।