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सामान्य चीजों के मामूली हेरफेर में ही दिलचस्पी थी

Thu, 14 Dec 2017 05:36 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला
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मेरा बचपन कुछ हद तक अलग तरह से बीता। मेरे पिता एक खास किस्म के वास्तुकार थे। हम पर आधुनिकतावाद की छाया थी। जिस घर में हम रहते थे, उसे उन्होंने ही डिजाइन किया था, वह पूरी तरह से आधुनिक था। उसके फर्नीचर, दीवारों पर लगी तस्वीरें और घर की किताबें-सभी आधुनिक थीं। जब मैं चौदह या पंद्रह साल का ही था, तभी मेरे पिता ने मुझे मार्सल रेमंड की किताब बायडेलियर टु सुरियलिज्म पढ़ने के लिए दी।
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हमारे घर में बहुत से क्लासिकल रिकॉर्ड्स थे। जब मैं बड़ा हो रहा था, तो बॉब विल्स के गाने रेडियो पर ज्यादातर सुनाई देते थे। मैंने उसे इतना ज्यादा सुना कि ऊब गया। आज मुझे उसके गाने बहुत ज्यादा पसंद हैं। मुझे जैज संगीत में काफी दिलचस्पी थी। मैं इरस्किन हॉकिन्स जैसे लोगों को सुनने के लिए ब्लैक क्लब में जाता था। मुझे इनमें मजा आता था। मेरे लेखन में आत्मकथात्मक तत्व बहुत कम हैं।

थोड़े-बहुत तथ्य यहां-वहां बिखरे हैं। मेरे दादा गाल्वेस्टोन में लकड़ी के डीलर थे और सेंट अंटोनियो के करीब ग्वाडालूप नदी के किनारे उनके खेत थे। घुड़सवारी करने और शिकार के लिए वह जगह शानदार थी। वहां मैं कैटलफिश से बातें करने और पवनचक्की को पीछे की तरफ घुमाने की कोशिश करता था। इससे मुझे अपनी बात रखने, अपनी बात पर जोर डालने और विविधताओं को स्थान देने में मदद मिली। कुछ लोग कहते हैं, कौन अब माफ करता है और इसके साथ अविश्वसनीय चीजें करते हैं। तब सामान्य चीजों के मामूली हेरफेर में ही नाटकीयता और दिलचस्पी होती थी।
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-डोनाल्ड बार्थेल्मे, अमेरिकी लेखक
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