जब मैं युवा था और मैंने लिखना शुरू किया था, तो मैं पूरी तरह से आश्वस्त था कि साहित्य एक तरह का हथियार है। मेरे मामले में साहित्य एक प्रकार का बदला है। इसने मुझे वैसा कुछ दिया है, जो वास्तविक जीवन नहीं दे सकता। मेरे सारे अनुभव कल्पना और साहित्य के जरिये ही हासिल हुए हैं। स्मृति सरल और विशुद्ध जाल है, जो बदलता है। वर्तमान में फिट करने के लिए इसे पुनर्व्यवस्थित किया जा सकता है। मैंने पांच साल की उम्र में पढ़ना सीखा था।
इतने दशकों बाद भी मुझे याद आ रहा है कि किताब के शब्दों को छवियों में अनूदित करने के जादू ने कैसे मेरे जीवन को समृद्ध किया और समय व स्थान की बाधाओं को खत्म कर दिया। अच्छा साहित्य पढ़ना खुशी का अनुभव है, लेकिन यह हमारी मानवीय संपूर्णता और अपूर्णता में हमारे कार्य, हमारे सपने, दूसरों के साथ हमारे रिश्ते आदि को समझने का अनुभव भी है। पढ़ना जीवन की अपर्याप्तता के खिलाफ एक विरोध भी है।
हमें कुछ इस विचार के साथ साहित्य में प्रशिक्षित किया गया कि साहित्य वास्तविकता को बदल सकता है, जो सिर्फ एक परिष्कृत मनोरंजन ही नहीं है, बल्कि कार्य करने का तरीका भी है। बेशक सबसे ज्यादा आनंद मुझे साहित्य में आता है, लेकिन मैं शेष जीवन से कटकर सिर्फ कहानियों की दुनिया में नहीं रहना चाहता। लेखक का काम कठोरता और वचनबद्धता के साथ उन चीजों के पक्ष में लिखना है, जिस पर वे यकीन करते हैं। मुझे लगता है कि यह लेखक के नैतिक दयित्व का हिस्सा है। कम से कम सामाजिक बहसों में हिस्सा लेना लेखक की जिम्मेदारी है।
-पेरु के नोबेलजयी लेखक