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स्मृति शेष: तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन से बड़ी लकीर शायद ही कोई खींच पाए

सार

उस्ताद जाकिर हुसैन वर्ष 1951 में फिल्म नगरी मुंबई (तब बॉम्बे) में पैदा हुए थे। तबला वादक पिता उस्ताद अल्लाह रक्खा कुरैशी उनके पहले गुरु और मेंटर थे। पिता की तरह उस्ताद जाकिर हुसैन ने तबले को अपने जीवन के लिए चुना। एक समय वो भी आया, जब उस्ताद जाकिर हुसैन और तबला एक-दूसरे के पर्याय  बन गए।
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उस्ताद जाकिस हुसैन - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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ये उस दौर की बात है, जब भारत में टेलीविजन पर विज्ञापनों की शुरुआत हुई थी। चायपत्ती के एक विज्ञापन में उस्ताद जाकिर हुसैन ताजमहल के आगे तबला बजाते और जब कहा जाता, ‘वाह उस्ताद वाह’ तो वो कहते, ‘वाह उस्ताद नहीं, वाह ताज बोलिए’। उस्ताद जाकिर हुसैन ने तबला बजाकर चायपत्ती के इस ब्रांड को बेहद मशहूर बना दिया था और हर भारतीय को यह विज्ञापन जुबानी याद था।

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जब उस्ताद जाकिर हुसैन की तबले पर उंगलियां चलतीं तो संगीत प्रेमी झूम उठते थे। भारत समेत दुनियाभर में पिछली तीन पीढ़ियों के लिए तबला मतलब जाकिर हुसैन ही रहा है। तबले को जो पहचान उस्ताद जाकिर हुसैन ने दी, उनकी लकीर से बड़ी लकीर खींच पाना आसान नहीं होगा। उस्ताद जाकिर हुसैन आज हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन उनकी तबले की थाप सदैव हमारे कानों में गूंजती रहेगी।  

उस्ताद जाकिर हुसैन वर्ष 1951 में फिल्म नगरी मुंबई (तब बॉम्बे) में पैदा हुए थे। तबला वादक पिता उस्ताद अल्लाह रक्खा कुरैशी उनके पहले गुरु और मेंटर थे। पिता की तरह उस्ताद जाकिर हुसैन ने तबले को अपने जीवन के लिए चुना। एक समय वो भी आया, जब उस्ताद जाकिर हुसैन और तबला एक-दूसरे के पर्याय  बन गए। पिता ने बेटे की प्रतिभा को बचपन में पहचान लिया था, क्योंकि जाकिर हुसैन को जहां भी सपाट स्थान मिलता, उनकी उंगलियां चलने लगती थीं, भले वो रसोई का तवा, हांडी या थाली ही क्यों न हो? 
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मात्र 7 साल की उम्र में जाकिर हुसैन ने अपने पहले पब्लिक कॉन्सर्ट में प्रतिभा का परिचय दे दिया था। अपनी विलक्षणता से दुनिया को परिचित कराया था। मात्र 11 साल की छोटी आयु में जाकिर हुसैन ने अमेरिका में अपना पहला कॉन्सर्ट किया और 12 साल की उम्र में एक कॉन्सर्ट में वो पंडित रविशंकर, उस्ताद अली अकबर खान, बिस्मिल्लाह खान, पंडित शांता प्रसाद, पंडित कृष्ण महाराज जैसे दिग्गजों के साथ शामिल हुए थे। इस कॉन्सर्ट में उस्ताद जाकिर हुसैन को 5 रुपए पुरस्कार स्वरूप मिले थे।

भारत सरकार ने अपने इस महान संगीतकार का सम्मान करते हुए उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित किया। उस्ताद जाकिर हुसैन को अपनी कला के लिए दुनियाभर में सम्मान और पुरस्कार मिले। इसी साल उन्हें अपनी एल्बम के लिए तीन ग्रैमी अवॉर्ड मिले थे। उस्ताद जाकिर हुसैन अकेले ऐसे भारतीय भी थे, जिन्हें पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने व्हाइट हाउस में ऑल स्टार ग्लोबल कॉन्सर्ट के लिए आमंत्रित किया था। उस्ताद जाकिर हुसैन ने हॉलीवुड और बॉलीवुड फिल्मों में अभिनय भी किया। बॉलीवुड फिल्मों को संगीत भी दिया। 

लेखिका नसरीन मुन्नी कबीर ने ‘जाकिर हुसैन : ए लाइफ इन म्यूजिक’ में इस महान संगीतकार के जीवन से परिचय कराया है। नसरीन मुन्नी कबीर ने उस्ताद जाकिर हुसैन के 15 साक्षात्कार वर्ष 2016 और 2017 में किए थे और वर्ष 2018 में जीवनी प्रकाशित की थी। नसरीन मुन्नी कबीर ने लिखा कि उस्ताद जाकिर हुसैन एक अच्छे कहानीकार भी थे। हास्य और विनम्रता के साथ संगीत की अपनी समझ को अपने छात्रों के बीच प्रदर्शित किया करते थे। 

वैसे, उस्ताद जाकिर हुसैन के निजी जीवन से दुनिया कम ही परिचित रही। उन्होंने वर्ष 1978 में कथक नृत्यांगना एंटोनिया मिनीकोला से शादी की थी, जो इटेलियन हैं और उनकी मैनेजर भी रहीं। उस्ताद जाकिर हुसैन की दो बेटियां अनीसा कुरैशी और इसाबेला कुरैशी हैं। अनीसा फिल्मकार हैं, जबकि इसाबेला नृत्य की शिक्षा ले रही हैं। अपने अंतिम समय तक उस्ताद जाकिर हुसैन संगीत की सेवा करते रहे। महान तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन भारत और दुनियाभर के संगीत प्रेमियों के दिलों में सदैव रहेंगे।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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