rainforest day 2023 new
- फोटो : हिमांशु गुप्ता
यही नहीं बल्कि कई दुर्लभ प्रजातियां जैसे की निलकरना किलकिला, धनेश, लाल जूमिज, दुनिया का सबसे छोटा किलकिला यानि बॉना किलकिला इत्यादि भी शामिल हैं। गोवा का राज्य पक्षी माणिक- कंठी बुलबुल भी अक्सर यहां पर दिख जाता है।
इन प्रजातियों की रक्षा और शरण देने वाले पश्चिमी घाट प्रकृति का मानो एक अजूबा ही है। गोवा में पाई जाने वाली सभी नदियां पश्चिमी घाट की ही देन है। इन नदियों द्वारा उपजाऊ होती भूमि और फलते फूलते वन कई प्रकार से स्थानीय जीव और यहां रहने वाले लोगों की सहायता करती हैं। यहां के वर्षा-वन वन्य जीवों को आवास प्रदान करने के साथ-साथ यहां के लोगों को भी आय का साधन प्रदान करते हैं।
प्रकृति-प्रेमी और कई पर्यटक भी यहां के जंगलों की खूबसूरती को निहारने के लिए अलग अलग देशों व जगहों से आते हैं। यहां पर कई निर्देशित पर्यटन भी करवाए जाते हैं जो की यहां के व्यवस्या का मुख्या साधन भी है। अगली बार जब भी आप गोवा जाये तो एक बार प्रकृति के नजरों का लुत्फ उठाने के लिए पश्चिमी घाट की यात्रा अपनी सूची में शामिल करना मत भूलना।
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