विश्व साहित्य का इतिहास
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उपन्यासिका ‘द पर्ल’ में मनुष्य जीवन को दिशा देने वाली दो विरोधी ताकतों की बात आती है। एक ओर आदमी के नियंत्रण के बाहर उसका भाग्य है। दूसरी ओर आदमी का अपना परिश्रम है, जिससे वह अपना भाग्य खुद गढ़ता है। भाग्य दुर्घटना, अवसर, देव के रूप में आदमी के जीवन की दशा-दिशा बदल सकता है। कौन जानता था, बिच्छू बच्चे को काट लेगा और कीनो तथा जुआना का जीवन सदा-सदा के लिए बदल जाएगा।
कीनो और मोती की कहानी
समुद्र में डुबकी लगा कर कीनो मोती पाता है और वही मोती उसका दुर्भाग्य बन जाता है। गांव के मोती खरीददार, डॉक्टर, पादरी सब उसके दुश्मन साबित होते हैं। मोती अपने आप में निरपेक्ष हो सकता है लेकिन उसके साथ जुड़ा लोगों का लालच, महत्वाकांक्षा, अत्याचार, आक्रमण कीनो के शांत जीवन को सदा के लिए समाप्त कर देता है। कीनो भाग्य और समाज के लोगों के बीच फंस जाता है।
भाग्य जो उसे मिला है और भाग्य जो वह बनाना चाहता है, दोनों के बीच वह पिस जाता है। डॉक्टर उस नस्ल का है जिसे इस बात का घमंड है, वह जीवन बना या बिगाड़ सकता है। डॉक्टर और उस जैसे लोग अहंकार, लालच और महत्वाकांक्षा से संचालित होते हैं।
‘द पर्ल’ में जॉन स्टीनबेक गरीबों-शोषितों के साथ खड़े हैं। ‘द पर्ल’ एक रूपक है। इसमें कई प्रतीकों का उपयोग हुआ है। प्रतीक रूप में कीनो अभी पूर्ण विकसित नहीं है उसकी पहचान अभी पशुओं के साथ है। मुर्गे की बांग का अर्थ निकाला जा सकता है कि प्रगति का बिगुल फुंक चुका है। विकास का सूर्योदय हो रहा है।
कीनो को बहुत दिन तक दबा कर नहीं रखा जा सकता है। जब व्यक्ति के मन में प्रश्न उठने लगते हैं, तो यह उसके जागने का सूचक है। कीनो उन संस्थानों पर प्रश्न उठाने लगा है, जिन्होंने उसे आदिम बनाए रखा है।
प्रभुओं के प्रति उसके मन में भय है, तो गुस्सा भी है। आधुनिक औषधियों को वह शंका और संदेह की दृष्टि से देखता है। वह इन सत्ताधारियों के षडयंत्र को जानने-समझने लगा है। चर्च को ले कर भी उसकी धारणा प्रश्नाकुल है और व्यापारियों की चालाकी उससे बिल्कुल भी छुपी नहीं है। वह इन सबके चंगुल से निकल आता है।
कीनो केवल एक व्यक्ति न हो कर अपने पूरे समुदाय का प्रतिनिधित्व करता है। वह पूरे विश्व के गरीब व्यक्ति का प्रतीक भी है इस नाते वह दुनिया का हरेक दमित-शोषित व्यक्ति है। वह मात्र स्थानीय व्यक्ति न हो कर वैश्विक व्यक्ति है।
मोती मिलने की खबर से कीनो के लोगों में लालच उत्पन्न नहीं होता है, लालच केवल सभ्य लोगों, डॉक्टर, पादरी, मोती के खरीददारों में उत्पन्न होता है। ये लालची लोग न केवल कीनो को शारीरिक हानि पहुंचाते हैं, वरन उसकी सम्पत्ति को भी नष्ट करते हैं। ये बिना चेहरे के लोग उसका घर जला देते हैं, उसकी डोंगी में सूराख कर देते हैं।
स्टीनबेक यहां एक बहुत मार्मिक बात कहते हैं, ‘आदमी को मारना इतना बुरा न था, जितना नाव को मारना। क्योंकि नाव के बेटे नहीं होते हैं, नाव खुद की रक्षा नहीं कर सकती है और घायल नाव स्वस्थ नहीं होती है।’ नाव मेहनत, रोजी-रोटी का प्रतीक है।
स्टीनबेक की इस उपन्यासिका पार फिल्म बनी है।
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