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वर्ल्ड कैंसर डे: जिन्होंने कैंसर से हार नहीं मानी, बल्कि अपने हौसले से उसे मात दी

सार

आज वर्ल्ड कैंसर डे पर भारत के कुछ ऐसे चर्चित नामों की चर्चा करते हैं, जिनका नाम कैंसर को मात देने वालों में हमेशा लिया जाता है, जिन्होंने कैंसर के खिलाफ लंबी जंग लड़ी और आज सामान्य जीवन जी रहे हैं।
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भारत में कई सेलिब्रिटी ने कैंसर को मात देकर जिंदगी को जीत लिया - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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कैंसर शब्द सुनते ही सबसे पहले दिमाग में एक बात आती है कि अब पीड़ित का बच पाना मुश्किल है। विज्ञान ने बहुत तरक्की की है और हम मंगल ग्रह तक पहुंच गए हैं, लेकिन कैंसर पर विजय पाना आज भी आसान नहीं माना जाता है। अमेरिका की क्लीवलैंड क्लीनिक की रिपोर्ट के अनुसार भारत में कैंसर तेजी से फैल रहा है। देश में वर्ष 2022 में कैंसर से 8 लाख मौतें हुईं। मेडिकल साइंस अपनी तरह से कैंसर का उपचार करता है, लेकिन इच्छाशक्ति मजबूत हो तो इस घातक रोग को निश्चित ही मात दी जा सकती है।

इन चर्चित लोगों ने दी कैंसर को मात

अपने हौसले से कैंसर को मात देने वाले बहुत लोग हैं, जो कैंसर पीड़ितों के लिए एक प्रेरणा बने हुए हैं। आज वर्ल्ड कैंसर डे पर भारत के कुछ ऐसे चर्चित नामों की चर्चा करते हैं, जिनका नाम कैंसर को मात देने वालों में हमेशा लिया जाता है, जिन्होंने कैंसर के खिलाफ लंबी जंग लड़ी और आज सामान्य जीवन जी रहे हैं।

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भारत को वर्ष 2011 में क्रिकेट वर्ल्ड कप जिताने वाले ऑलराउंडर युवराज सिंह, बॉलीवुड अभिनेत्री सोनाली बेंद्रे, मनीषा कोइराला, लीजा रे ऐसे ही कुछ चर्चित नाम हैं।

युवराज सिंह

वर्ष 2011 में वर्ल्ड कप में युवराज सिंह अपने प्रचंड फॉर्म में थे। उनका बल्ला विरोधी गेंदबाजों की जमकर खबर ले रहा था। देश के लिए वर्ल्ड कप लाने के लिए युवराज जी जान लगा रहे थे, लेकिन उनका शरीर न केवल थकान महसूस कर रहा था, बल्कि उन्हें खून की उल्टियां तक हो जाती थीं। श्रीलंका के खिलाफ फाइनल मैच में जीत दिलाने के बाद ही युवराज ने अपना बॉडी चेकअप कराया और उन्हें कैंसर का पता चला।

उनके फेफड़ों के पास एक टेनिस बॉल की आकार का ट्यूमर था, जो एक दुर्लभ किस्म का कैंसर था। मेडिकल की भाषा में उसे मीडियास्टिनल सेमिनोमा कहते हैं। युवराज इलाज की लंबी प्रक्रिया से गुजरे, लेकिन उन्होंने कैंसर को उसी तरह मात दी, जैसे वो क्रिकेट के मैदान पर विरोधियों के छक्के छुड़ाया करते थे।

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युवराज ने न केवल कैंसर को हराया, बल्कि क्रिकेट के मैदान पर पुनः वापसी भी की। आज 12 साल बाद युवराज बिल्कुल स्वस्थ और एक जिंदादिल इंसान हैं।

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सोनाली बेंद्रे को वर्ष 2018 में कैंसर का पता चला - फोटो : social media

सोनाली बेंद्रे

बॉलीवुड अभिनेत्री सोनाली बेंद्रे को वर्ष 2018 में कैंसर का पता चला। उन्हें हाईग्रेड मेटास्टैटिक कैंसर था। यह एक ऐसा कैंसर है, जो शरीर के एक हिस्से से होकर दूसरे हिस्से को अपनी जद में ले लेता है और धीरे-धीरे पूरे शरीर में फैल जाता है। कैंसर के इस प्रकार को बहुत ही घातक माना जाता है।

जब सोनाली कैंसर से पीड़ित हुईं तो उन्होंने खुद सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी सार्वजनिक की। साथ ही, लोगों को कैंसर के प्रति जागरूक भी किया। जब सोनाली का इलाज शुरू हुआ तो कैंसर बहुत तेजी से उनके शरीर में फैल रहा था। कैंसर से जंग जीतकर सोनाली आज स्वस्थ हैं। वो टीवी शो के माध्यम से कैंसर पीड़ितों का हौसला बढ़ाती रहती हैं।

लीजा रे

अभिनेत्री लीजा रे बॉलीवुड में तो बहुत अधिक धमाल नहीं मचा सकीं, लेकिन उन्होंने कुछ ही फिल्मों से अपना प्रभाव जरूर छोड़ा। आज उनकी चर्चा बॉलीवुड एक्ट्रेस से ज्यादा कैंसर को मात देने वाली पर्सनेलिटी को लेकर अधिक होती है। वर्ष 2009 में लीजा रे को बोन मैरो कैंसर का पता चला।

बोन मैरो कैंसर को लेकर आम धारणा यह है कि जो इसकी चपेट में आता है, उसका बचना करीब-करीब नामुमकिन होता है। लीजा रे ने 3 साल के संघर्ष के बाद बोन मैरो कैंसर को हरा दिया। जब वो कैंसर से पीड़ित थीं तो पैरों पर ठीक से खड़ी तक नहीं हो पाती थीं। कैंसर से मुक्ति के बाद लीला रे ने शादी भी की और आज जुड़वा बेटियों की मां हैं। वो अपने ब्लॉग और लेखों से कैंसर पीड़ितों को जीने की राह दिखाती हैं। उन्होंने अपनी संघर्ष गाथा को किताब क्लोज टू द बोन में लिखा है।

मनीषा कोइराला

मूलतः नेपाल की रहने वाली और बॉलीवुड में कई बड़ी हिट्स दे चुकीं मनीषा कोइराला 11 साल पहले कैंसर की चपेट में आ गई थीं। उन्हें ओवरी कैंसर का वर्ष 2012 में पता चला और वर्ष 2015 तक वह कैंसर से जूझती रहीं। इसके बाद उन्हें कैंसर मुक्त घोषित कर दिया गया। आज कुछ लोग तीसरे या चौथे स्टेज के कैंसर पर हार मान लेते हैं, जबकि मनीषा कोइराला को स्टेज 4 का कैंसर था। मनीषा कैंसर पीड़ितों के लिए एक प्रेरणास्रोत हैं और सोशल मीडिया के माध्यम से वह जागरुकता फैलाती रहती हैं।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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