William Makepeace Thackeray
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आत्मकथात्मक लेखन
थाकरे का अधिकांश लेखन आत्मकथात्मक है। माँ से विलग होने का चित्रण उसने आधी सदी के बाद ‘ए घाट, ओर रिवर स्टैयर, एट कलकत्ता...’ के रूप में किया है। कार्टरहाउस में छड़ी की मार और वहाँ अन्य सजाए जो उसने भोगी उन्हें ‘रिमेंबरेंसेस’ तथा ‘द राउंडअबाउट पेपर्स’ के लेख में देखा जा सकता है। वे ‘वैनिटी फ़ेयर’ तथा ‘न्युकम्स’ में भी समाहित हैं। ‘स्कॉट’स हार्ट ऑफ़ मिडलोथियन’ या ‘पीयर्स इगन’स लाइफ़ इन लंदन’ में वह जबरदस्ती सिखाए गए क्लासिकल लैंगुएज और उससे हुई हानि के विषय में लिखता है। हालाँकि वह खुद भारत में नाममात्र को रहा लेकिन उसके लेखन (‘द ट्रेमंडस एडवेंचर्स ऑफ़ मेजर गोलिआह गहगन’, ‘वैनिटी फ़ेयर’ तथा ‘द न्युकम्स’) में एंग्लो-इंडियन समुदाय-संस्कृति प्रमुखता से आती है।
अपने समय के लेखक डिकेंस के प्रतिद्वंद्वी थाकरे ने अपने लेखन की शुरुआत वैसे ही की जैसे अक्सर लोग करते हैं। उसने प्रारंभ में काव्य रचना की। वह कविता, बालाड्स, कॉमिक पोयम्स, पैरोडी लिख रहा था। उसकी कुछ कविताएँ ‘पंच’ में प्रकाशित हुईं। उसने जम कर लेक्चर दिए और उनसे खूब कमाई की। राजनीति में जाने का असफ़ल प्रयास किया। लेकिन पहचाना वह उपन्यासकार के रूप में ही गया।
उसका सर्वाधिक प्रसिद्ध उपन्यास है, ‘वैनिटी फ़ेयर’। हालाँकि उसने इसके अलावा ‘द लक ऑफ़ बेरी लिंडन’, ‘द हिस्ट्री ऑफ़ हेनरी एस्मंड...’, ‘द हिस्ट्री ऑफ़ पेन्डेनिस: हिस फ़ोर्चून्स एंड मिस्फ़ोर्चून्स, हिस फ़्रेंड्स एंड हिस ग्रेटेस्ट एनेमी’, ‘द रोज एंड द रिंग: ए फ़ायरसाइड पेंटोमाइम फ़ॉर ग्रेट एंड स्मॉल चिल्ड्रेन’ आदि कई अन्य रचनाएँ भी कीं। डिकेंस के लेखन की तर्ज पर पहले इस उपन्यास ‘वैनिटी फ़ेयर: ए नॉवेल विदाउट ए हीरो’ का 1847-48 में धारावाहिक रूप में प्रकाशित हुआ था। ‘द एडवेंचर्स ऑफ़ फ़िलिप’ भी धारावाहिक प्रकाशित हुआ था। ‘वैनिटी फ़ेयर’ से उसे ख्याति और समृद्धि दोनों मिली। और वह इंग्लिश साहित्य में सदा के लिए स्थापित हो गया।
1848 में प्रकाशित ‘वैनिटी फ़ेयर’ 19वीं सदी के प्रारंभिक दौर में इंग्लिश समाज में स्थापित कहानी है। इसके पहले या तो वह बेनाम लिख रहा था अथवा छद्म नामों का प्रयोग कर रहा था। यह उपन्यास उसके अपने नाम से प्रकाशित होने वाला पहला उपन्यास था। उसने इसका उपशीर्षक दिया था ‘ए नॉवेल विदाउट ए हीरो’। उपन्यास का शीर्षक जॉन बनियन के 17वीं सदी के कार्य ‘पिल्ग्रिम’स प्रोग्रेस’ से आता है और आदमी की दशा को दिखाता है। बड़े शहरों की तुच्छ जीवन शैली और व्यर्थता को चित्रित करता है। ब्रिटेन के रीजेंसी काल में स्थित इस उपन्यास में मुख्य रूप से दो विपरीत स्वभाव की स्त्रियों के भाग्य की कथा कही गई है। जानबूझ कर रखे गए इस एंटीहीरो उपन्यास में एमिलिया सेडली तथा बेकी शार्प दो स्त्रियाँ हैं। प्रारंभ में उपन्यास 19 अंकों में धारावाहिक छपा था। अपनी इस किताब का कवर थाकरे ने स्वयं तैयार किया था।
एक कला शिक्षक और एक फ्रांसीसी नर्तक की बेटी रेबेका शार्प (बेकी), एक मजबूत इरादों वाली, चालाक, समाज में अपना रास्ता बनाने के लिए दृढ़, गरीब युवती है। अमेलिया सेडली (एमी) लंदन के अमीर परिवार की एक अच्छे स्वभाव वाली, सरल दिमाग की युवती है। स्कूल छोड़ने के बाद, बेकी एमी के साथ रहती है। एमी भोली है, साथ ही बहुत सुंदर नहीं है अत: लोगों द्वारा नजरअंदाज की जाती है। इसके विपरीत बेकी तेजतर्रार और सुंदर है, भाषाओं तथा कलाओं में पारंगत है। दोनों के जीवन के उतार-चढ़ाव को उपन्यास बहुत रोचक ढ़ंग से प्रस्तुत करता है।
उपन्यास की वर्णन कुशलता, सूक्ष्म चरित्र-चित्रण और चित्रण-शक्ति इस उपन्यास को विशिष्ट बनाते हैं। यह मात्र किसी समाज का काल्पनिक विश्लेषण नहीं है, थाकरे आदमी की मंशा के द्विचित्तेपन को उजागर करते हैं। अत: निष्कर्ष देते हैं, आह! गुरूरों के गुरूर! दुनिया में हममें से कौन खुश है? हममें से किसकी इच्छाएँ संतुष्ट हुई हैं? यही जीवन की त्रासद विडम्बना है।
अधिकाँश रूप में हम बेवकूफ़ और स्वार्थी हैं। इस उपन्यास के द्वारा थाकरे यही दिखाना चाहते हैं। ‘वैनिटी फ़ेयर’ ने कई लोगों को प्रेरित किया और इससे पेरणा पा कार कई फ़िल्में तथा टेलिविजन कार्यक्रम बने हैं। भारत में 1932 में ही हिन्दी में इस पर आधारित फ़िल्म ‘बहुरूपी बाजार’ बनी थी। अभी हाल में मीरा नायर ने भी 2004 में इसे ले कर काम किया है।
आगे भी थाकरे ने अपने आत्मकथात्मक उपन्यास ‘द हिस्ट्री ऑफ़ पेन्देनिस’ में अतीत तथा वर्तमान का संबंध स्थापित किया है। समीक्षकों ने इस रचना के फ़ॉर्म को लेकर सवाल खड़े किए और इसे आकृतिहीन रचना घोषित कर दिया। इस कारण थाकरे ने अपना अगला काम ‘हेनरी एस्मंड’ बहुत सावधानी से औपचारिक प्लॉट की संरचना में बाँध कर किया। इस पूरी कहानी में बीट्रिक्स छाई हुई है। थाकरे ने नई तरह की हिरोइन गढ़ी है जो भावात्मक रूप से खूब जटिल है। एस्मंड संवेदनशील, बहादुर तथा कुलीन सैनिक है। वह बीट्रिक्स के प्रेम में पड़ता है परंतु अंतत: उसका मोहभंग होता है। हेनरी एस्मंड लेडी कैसलवुड की आराधना करता है उसे माँ की तरह चाहता है लेकिन जब प्रौढ़ होता है तो उसी से शादी करता है।
‘द न्युकम्स’ में एक बार फ़िर वे तत्कालीन इंग्लैंड के समाज के चित्रण पर लौटते हैं। इसका पर्मुख समय 1853-55 है। यहाँ वे मुख्य रूप से धनी मध्यवर्ग समाज खासकर इसके केंद्र में कर्नल थॉमस न्युकम्स के परिवार को रखते हैं। कर्नल अपने बेटे क्लाइव के साथ भारत से लंदन लौटा है। क्लाइव में कोई खास गुण नहीं है लेकिन वह बहुत आकर्षक है। क्लाइव को अपनी कजिन इथेल से प्यार होता है मगर परिस्थितियाँ ऐसी बनती हैं कि वह रोज मैकेन्ज़ी से शादी करता है। रोज बहुत स्वार्थी, लालची और क्रूर है। वह उसका पिता और कई लोग मिल कर क्लाइव तथा कर्नल के विरुद्ध षडयंत्र करते हैं। कर्नल अपनी सारी सम्पत्ति इन लोगों के कहे में आकार गँवाता है और अंत में वृद्धाश्रम में मरता है। भावुकता से दूर उसकी मृत्यु का दृश्य- चित्रण विक्टोरियन साहित्य का अहम हिस्सा है।
विलियम मेकपीस थाकरे ने खूब भाषण दिए और इससे उन्हें खूब आ-मद-नी हुई। वे लेक्चर देने अमेरिका भी गए। अमेरिका के प्रति उनका रुख बहुत दोस्ताना था और वे किसी कीमत पर अपने मेजबान देश को नाखुश नहीं करना चाहते थे। इसलिए अमेरकी यात्रा पर लिखते हुए वे खूब सावधानी बरतते ऐसा कुछ नहीं लिखते जिससे अमेरिका की छवि धूमिल हो। इसीलिए उन्होंने वहाँ की दास प्रथा को भी बहुत कम करके लिखा। उन्होंने अपनी माँ को लिखा कि वे गुलामों को बराबर का नहीं समझते हैं लेकिन नैतिकता के नाते वे इसकी भर्त्सना करते हैं। उनके अनुसार गुलामों को कोड़े मारना विरल घटना थी और नीलामी के तख्ते पार परिवार को विलग करना भी कभी-कदा ही होता है।
उन्होंने अपना उपन्यास ‘द विर्जीनियन्स’ का कुछ हिस्सा अमेरिका में और कुछ हिस्सा इंग्लैंड में रखा है। यह जॉर्ज और हेनरी वारिंगटन नामक दो भाइयों की कहानी है। ये दोनों भाई थाकरे के पहले के उपन्यास के नायक हेनरी एस्मंड ने पोते हैं। उन्होंने और बहुत कुछ लिखा लेकिन वे अपना उपन्यास ‘डेनिस डुवाल’ पूरा न कर सके। वैसे यह उनकी मृत्योपरांत प्रकाशित हुआ।
थाकरे ने बहुत आवारगी का जीवन भी बिताया था। जूआ खेलते थे और उससे जुड़ी अन्य आदतें भी थीं। पत्नी के बीमार होने के बाद वे बहुत अकेले पड़ गए थे। वैसे उनका अपने कैंब्रिज के समय के एक दोस्त हेनरी ब्रुकफ़ील्ड की पत्नी जेन से भावात्मक संबंध था दोनों में पत्राचार होता था। यह संबंध बहुत जटिल था। जेन उनका एक बहुत बड़ा भावात्माक संबल थी। समाज में प्रतिष्ठा बनाए रहने के लिए हेनरी ने भी घोषित किया कि उसकी पत्नी का विलियम से केवल वायवी (प्लाटोनिक) संबंध था औअर जब यह टूटा तो थाकरे को बहुत धक्का लगा। मगर कई अन्य लोगों की माने तो दोनों का रोमांटिक संबंध था। इसके अलावा भी विलियम मेकपीस थाकरे ने कुछ संबंध बनाए थे जिनके फ़ाल्स्वरूप उन्हें सूजाक की बीमारी हुई थी।
लेकिन विलियम मेकपीस थाकरे की मृत्यु सूजाक से नहीं हुई। बहुत बाद में गैब्रियल गार्षा मार्केस ने कहा है, मैं प्यार में मरना चाहते हूँ मगर एड्स से नहीं। मात्र 52 वर्ष की उम्र में एक दिन उनके दिमाग की नस फ़ट गई और ठीक क्रिसमस से एक दिन पहले यानि 24 दिसम्बर 1863 को उनकी मृत्यु हो गई। उनकी अंतिम यात्रा में करीब दो हजार लोग शामिल हुए, उन्हें केन्सल ग्रीन के कब्रगाह में 30 दिसम्बर को दफ़नाया गया। उनकी स्मृति में वेस्टमिनिस्टर एबी में उनकी आवक्ष मूर्ति लगाई गई है।
विलियम मेकपीस थाकरे अपने स्पष्ट गद्य तथा अपनी स्वभाविक सहज शैली के लिए सदैव स्मरण किए जाएँगे। उन्हें पढ़ना आज भी रोचक है और उनका साहित्य आज भी प्रासंगिक है। जब तक आदमी के भीतर अपने धन को लेकर मिथ्या दंभ रहेगा, जब तक समाज में कमियाँ रहेंगी तब तक थाकरे का साहित्य लोगों को लुभाता रहेगा, उन्हें सच्चाई से रू-ब-रू कराता रहेगा। पाखंड, कपट, आंतरिक रहस्य, दु:ख, दंभ, जीवन की विडम्बनाओं को उजागर कारने वाले रचनाकार को उसके 211वें जन्मदिन पर स्मरण करना अच्छा लग रहा है।
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