फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

स्वनिधि ऋण मिल भी जाए तो उसका करें क्या? रेहड़ी पटरी वालों के लिए गंभीरता से सोचे सरकार

विज्ञापन
दुर्भाग्य से आज तक हमारे पास देश भर के सभी मौजूदा विक्रेताओं की सूची नहीं है। - फोटो : Social Media
विज्ञापन

पिछले हफ्ते भारत ने अनलॉक 2.0 में प्रवेश किया। परिवार स्वास्थ्य और कल्याण मंत्रालय ने धार्मिक स्थानों, मॉल, रेस्त्रां और कार्यालयों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की। दिशानिर्देश में सामाजिक दूरी बनाए रखना, आरोग्य सेतु ऐप का उपयोग करना, मास्क का उपयोग करना और नियमित रूप से हाथों को साफ करना शामिल किया गया है।

विज्ञापन


ये दिशानिर्देश विभिन्न व्यावसायिक उद्यमों के लिए है, मगर सड़क विक्रेताओं के लिए नहीं। देशभर में एक करोड़ से अधिक रेहड़ी पटरी विक्रेता हैंं। उन राज्यों में, जहां सभी दुकानों को खोलने की अनुमति है, रेहड़ी पटरी वालों के लिए काम करने की अनुमति नहीं है।

पुलिस अधिकारियों का तर्क है कि सड़क विक्रेताओं के लिए कोई दिशानिर्देश जारी नहीं किया गया है और ऐसे में वे उन्हें फेरी लगाने नहीं दे सकते है। 

सरकार ने एक सामाजिक कल्याण योजना 'स्वनिधि' की शुरुआत की है। इस योजना का उद्देश्य 10,000 रुपये तक की पूंजी ऋण विक्रेताओं को उपलब्ध कराना है।

एक सबसे बड़ी चुनौती है लाभार्थियों की पहचान करना और उन तक पहुंचना। यह कैसे सुनिश्चित किया जाए कि जो लोग वेंडर नहीं है, कहीं वो इसमें शामिल ना हो जाए और जो वेंडर है, कहीं वो छूट ना जाए। 
विज्ञापन


दुर्भाग्य से आज तक हमारे पास देशभर के सभी मौजूदा विक्रेताओं की सूची नहीं है। थिंकटैंक सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी की हालिया रिपोर्ट में पाया गया है कि देश की संसद द्वारा स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट पास किए जाने के 6 वर्ष बीत जाने के बावजूद, किसी भी राज्य ने अपने सभी जिलों में सड़क विक्रेताओं का सर्वेक्षण पूरा नहीं किया है।

रेहड़ी पटरी व्यवसाय का मतलब ही है कि विक्रेताओं की संख्या और पहचान कभी स्थिर नहीं होती है। कुछ विक्रेता नेताओं के अनुसार, पिछले महीने में करीब एक लाख दिहाड़ी मजदूरों और कारखानों के श्रमिकों ने दिल्ली में स्ट्रीट वेंडिंग के कार्य की ओर रुख किया है। 

विज्ञापन

स्ट्रीट वेंडर्स भी उद्यमी हैं जो एक ईमानदार और सम्मान जनक जीवन जीने की कोशिश कर रहे हैं। - फोटो : फाइल फोटो
स्वनिधि योजना में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि क्रेडिट सुविधा केवल उन विक्रेताओं के लिए उपलब्ध है जो 24 मार्च 2020 से पहले वेंडिंग कर रहे हैं। सरकार को ये ध्यान में रखना होगा कि स्ट्रीट वेडिंग एक कम लागत वाला उद्यम है जो शहरी गरीबों को त्वरित स्वरोजगार के लिए एवेन्यू प्रदान करता है।

स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट के अनुसार, शहरी आबादी के 2.5 फीसदी तक के सभी मौजूदा विक्रेताओं को वेंडिंग ज़ोन में लाइसेंस दिया जाना चाहिए। अतः दिल्ली में नए वेंडरों को भी इस स्कीम में लाभ दिया जाना चाहिए। 

भले ही कई स्ट्रीट वेंडरो को ऋण मिल भी जाए, तो भी यह स्पष्ट नहीं है कि अगर पुलिस अधिकारी उनको परेशान करना जारी रखते हैं, तो ऐसे में वे वेंडर अपने ऋण को कैसे चुकाएंगे। अगर पुलिस उन्हें काम ही नहीं करने देगी, तो वे ऋण लेकर करेंगे क्या?

सड़क विक्रेता भी उद्यमी हैं जो एक ईमानदार और सम्मान जनक जीवन जीने की कोशिश कर रहे हैं। यह समय राज्य सरकारों के लिए ऐसी परिस्थितियां निर्मित करने का है, जो सड़क विक्रेताओं के लिए अनुकूल हो। विक्रेता उत्पीड़न को रोकने के लिए पुलिस और नगरपालिका के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए जाएं और उन्हें अपने काम पर लौटने दिया जाए।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें