कोलकाता की सड़कें ममता बनर्जी के पोस्टर्स से अटी पड़ी हैं।
- फोटो : पंकज शुक्ला
अमेरिका की एक संस्था दुनिया भर के देशों में आजाद माहौल के आंकड़े जुटाती रहती है। इसकी ताजा रिपोर्ट टेलीग्राफ ने उसी दिन छापी जिस दिन मैं कोलकाता में था। ये रिपोर्ट कहती है कि भारत में अधिनायकवाद बढ़ रहा है। ‘आमर सोनार बांग्ला’ दरअसल बांग्लादेश का राष्ट्रीय गीत है। ‘गुरुदेव’ का ही लिखा हुआ। बंगाल अब गुरुदेव वाला बंगाल नहीं रहा। लाल झंडे यहां कब के हाशिए पर हो गए।
ममता ने भगवा से मिलकर ये कारनामा कर दिखाया था। अब ये दोनों आपस में भिड़े हैं। हमारे ड्राइवर साब बताते हैं, ‘सर, इस बार मामला संगीन है। कोई खुलकर कुछ कह नहीं रहा। दीदी से लोग नाराज हैं। बीजेपी से डरे हुए हैं। जाएं तो जाएं कहां!’
ऐसे भी नहीं कि सब बीजेपी से डरे हुए ही हैं। जो देश के दूसरे शहरों से आकर कोलकाता में बसे हैं, उनमें से ज्यादातर नरेंद्र मोदी के ‘फैंस’ हैं। ऐसी ही एक फैन कहती हैं, ‘रसोई गैस के दाम बढ़ना, डीजल-पेट्रोल की कीमतें बढ़ना ये सब अंतर्राष्ट्रीय बाजार से तय होता है। इसमें केंद्र सरकार कुछ नहीं कर सकती।
नरेंद्र मोदी का काम है भ्रष्टाचार मुक्त सरकार चलाना और देश में हिंदुओं के हितों की रक्षा करना, ये काम वह बखूबी कर रहे हैं।’ ये बातचीत जिस होटल में हम रुके, उसकी लॉन में चल रही है। साथ में नेशनल अवाॅर्ड विनर डायरेक्टर अश्विनी चौधरी बैठे हैं, वे सारी बात सुनकर मंद-मंद मुस्कुरा रहे हैं।
लेकिन, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की असल अंतर्धारा मुझे समझाई, वापस एयरपोर्ट छोड़ने आ रही कार के चालक ने। वह कोलकाता में ही पले-बढ़े। टैक्सी चालकों के दर्द से दुखी दिखे। पहले तो देर तक कुछ बोले नहीं कि न जाने सवारी वाकई सवार ही है या फिर कोई खुफिया एजेंसी का जासूस! वह बताने लगे,
‘सर, चुनाव के समय तमाम लोकल और दिल्ली का जासूस सब घूमता है इधर।पता करने को कि पब्लिक क्या चाहता है। अरे पब्लिक क्या चाहेगा। यही ना कि जो गाड़ी पीछे साल खरीदा था उसका ईएमआई भरने भर को पैसा कमा सके!! पेट्रोल-डीजल इतना में देगा तो कैसे ईएमआई भरेगा?’
उनको बंगाल की पहचान छिनने का भी डर है। कातर स्वर में कहने लगे, ‘बंगाल को दीदी ही बचा सकेगा। बाहर का लोग आया तो बंगाल, बंगाल नहीं बचेगा। दीदी को बहुत लोग दगा किया लेकिन मिथून भी करेगा, मे को लगता नई है।’
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