सुवेंदु अधिकारी: कभी ममता बनर्जी के सबसे खास रहे।
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आगे बढऩे पर भांगाबेडिय़ा नहर पर बने पुल के आसपास खेजुरी की सीमा पर शांति है। यह इलाका इस समय तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के शक्ति प्रदर्शन का केन्द्र है। यहां 150 फुट ऊंची शहीद मिनार के पास दोनों दलों के समर्थकों के बीच कई बार तनाव हो चुका है। ऐसा तनाव यहां के लोगों ने नंदीग्राम आंदोलन के समय वर्ष 2007 में भी देखा था जिसे अब वे भूलना चाहते हैं।
ऑटो चला रहे सुजय दास बताते हैं कि आंदोलन के समय महीनों तक यहां बम-गोलियां चलीं। उसके बाद परिवर्तन हुआ लेकिन बहुत कुछ नहीं हुआ। अभी भी गांव में पीने के पानी की समस्या है। रोजगार के अवसर नहीं है। नंदीग्राम सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में चिकित्सा सेवा नाममात्र की है।
विकास हो गया गौण
नंदीग्राम में विकास का मुद्दा मानों खो सा गया है। नंदीग्राम में दोनों ही पार्टियां ध्रुवीकरण कर रही हैं। वैष्णव मतावलंबी सुब्रत दास कहते हैं- ध्रुवीकरण दोनों तरफ से जारी है। विकास का मुद्दा गौण हो गया है। वे कहते हैं- जीत उसी की होगी जो सामाजिक ताने-बाने को अपने पक्ष में कर ले। भाजपा प्रत्याशी सुुुुवेंंदु अधिकारी अपनी तरह से प्रचार कर रहे हैं। ममता बनर्जी को बाहरी बताने वाले पोस्टरों से इलाके को पाट चुके हैं। जगह जगह उनके समर्थन में भूमिपुत्र के पोस्टर लगे हुए हैं।
ममता की चोट, कहीं सहानभुति कहीं चुनावी चाल
तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी को लगी चोट के बाद इलाके में दो तरह की प्रतिक्रिया हैं। एक में लोग उनसे सहानुभूति रख रहे हैं तो दूसरे पक्ष के लोग पूरे मामले को चुनावी चाल बताते हैं। वहीं सुवेंदु को घेरने के लिए ममता के खास सिपहसालार राज्यसभा सांसद दोला सेन व पूर्व मंत्री पूर्णेन्दु बसु इलाके में डेरा डाले हुए हैं। कुल मिलाकर पूर्व मिदनापुर जिले में हलदी नदी के किनारे स्थित नंदीग्राम सीट पर इस बार कांटे की टक्कर दिखती है।
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