वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ शिखर सम्मेलन में संबोधित करते एस. जयशंकर
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यहां आरोग्य मैत्रेय के लिए भारत के योगदान को सार्थक किया जा सकता है। भारत ने अफ्रीका और प्रशांत द्वीप देशों को अस्पताल और जन औषधि केंद्र बनाकर जो सहायता प्रदान की है, वह महत्वपूर्ण है। तीसरा, पापुआ न्यू गिनी, केन्या, गाजा और यूक्रेन जैसे मानवीय संकटों के दौरान भारत तुरंत सहायता के स्त्रोत के रूप में उभरा है। यह उस प्रयास को उजागर करता है जो भारत अन्य देशों को आपदा लचीलापन और त्वरित, प्रभावी और कुशल प्रतिक्रिया के लिए आवश्यक संस्थागत तंत्र लाने के लिए तैयार करने के लिए कर रहा है। चौथा वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने और यूपीआई और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से अंतिम मील कनेक्टिविटी हासिल करने से संबंधित है। डीपीआई को बढ़ावा देने के लिए भारत पहले ही 12 देशों के साथ समझौते पर हस्ताक्षर कर चुका है। पांचवां, शिक्षा, कौशल और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में अंतर्संबंधों को मजबूत करने की आवश्यकता है।
भारत के विकास के अनुभव को साझा करने के लिए, संस्थागत ढांचे विभिन्न संस्थाओं और लोगों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। वोग्स में, प्रधानमंत्री ने भारत द्वारा ज्ञान संवर्धन, अनुभव साझा करने और कौशल और क्षमता निर्माण के लिए विकसित कार्यक्रमों के लिए दक्षिण नामक वैश्विक दक्षिण सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की शुरुआत को याद किया। ऐसे संस्थानों की भूमिका ज्ञान और अनुभवों के दोतरफा प्रवाह को बढ़ावा दे सकती है। ये संस्थान ज्ञान के सह-सृजन की पहल भी कर सकते हैं।
'विकास समझौते' के अलावा, कुछ अन्य घोषणाएं भी महत्वपूर्ण हैं। वैश्विक दक्षिण की विकास यात्रा में नीति आंकलन और व्यापार में हिस्सेदारी कमजोर कड़ी रहे हैं। इसे ध्यान में रखते हुए, क्षमता निर्माण के लिए 2.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर और व्यापार नीति निर्माण में प्रशिक्षण के लिए 1 मिलियन अमेरिकी डॉलर के एक विशेष फंड की घोषणा की गई है। भारत ने 25 मिलियन अमेरिकी डॉलर के प्रारंभिक योगदान के साथ एक सामाजिक प्रभाव कोष की स्थापना की भी घोषणा की। आरआईएस के एक अध्ययन के अनुसार, भारत वर्तमान में वैश्विक दक्षिण में विभिन्न साझेदार देशों को सालाना लगभग 7.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर का योगदान देता है।
प्रधानमंत्री मोदी का वैश्विक दक्षिण पर अपनी आम चिंताओं को व्यक्त करने के लिए एक साथ आने और वैश्विक समाधान के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण लाने पर जोर देना एक बड़ा कदम है। विकास के लिए संघर्ष कर रहे सभी राष्ट्रों को इसे गंभीरता से सुनना चाहिए। इनमें से कुछ मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एक मंच के रूप में वोग्स महत्वपूर्ण पहल है। ये और भी महत्वपूर्ण है जब लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकारों के लिए अनिश्चितता और असुरक्षा कई गुना बढ़ गई है। आतंकवाद के माध्यम से अलगाववादी ताकतों और वर्गीय हिंसा को बढ़ावा देने वालों की भूमिका पर भी गौर करने की आवश्यकता है। बांग्लादेश में हाल की घटनाओं को देखते हुए बहुत महत्व रखता है। अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने भी इस सम्मेलन में हिस्सेदारी की।
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