‘गॉन विथ द विन्ड’ की लोकप्रियता
थ्री-स्ट्रिप टेक्नीकलर में बनी ‘गॉन विथ द विन्ड’ मूल रूप से छ: घंटे की बनी थी, जिसे काट कर करीब चार घंटे का रखा गया। महामंदी के दौर में निर्माता ने 3,9000,000 डॉलर लगाए थे और पूरा पैसा वसूल हुआ। दर्शकों तथा आलोचकों ने इसे सर-आंखों पर बैठाया। 2,400 एक्स्ट्रा थे जिनमें से 50 के हिस्से में बोलना शामिल था। 1998 में फ़िल्म की साठवीं वर्षगांठ पर इसे रिस्टोरेशन के साथ रिलीज किया गया, इसके पहले इसे चार बार (1954, 1961, 1967 एवं 1989) और रिलीज किया गया, हर संस्करण लाजवाब है।
जब यह फ़िल्म तहलका मचा रही थी, तभी लॉरेंस तथा विवियन ने 1940 में शादी कर ली। इसी साल विवियन ने दो और फिल्में, ‘वाटर्लू ब्रिज’ तथा 21 डेज टूगेदर’ की। मगर कोई ‘गॉन विथ द विन्ड’ को न छू सकी। अगले साल 1941 में विवियन और लॉरेंस दोनों ‘दैट हेमिल्टन वूमन’ में साथ थे। विवियन ने ‘आना केरेनीना’, ‘सीजर एंड क्लिओपेट्रा, ‘स्ट्रॉम इन टीकप’ आदि फ़िल्मों में काम किया। मगर वह इनसे अधिक जानी जाती है, फ़िल्म ‘ए स्ट्रीटकार नेम्ड डिजायर’ (1951) के लिए। इस बार क्लार्क गैबल नहीं उसके सह- अभिनेता थे मार्लोन ब्रान्डो।
इस फ़िल्म ने उसे उसका दूसरा ऑस्कर दिलाया। जब ऑस्कार समारोह में पुरस्कार दिया जा रहा था तो कैमरा उसके चेहरे पर केंद्रित था। डिजिटल का आगमन हो चुका था, उसके कमाल से कैमरा बार-बार 26 साल के चेहरे पर 38 साल के चेहरे को इम्पोज कर रहा था और दोनों की खूबसूरती दर्शकों को चकाचौंध कर रही थी। इसके लिए उसे बाफ़्टा भी मिला। इसके बाद उसने बहुत कम फिल्में कीं।
कम फ़िल्में करने का एक कारण निजी जीवन की उथल-पुथल थी। भयंकर धूम्रपान करने वाली (एक दिन में चार पैकेट सिगरेट) विवियन इकलौती संतान होने के कारण बचपन में बहुत अकेली थी। स्कूल में उसकी केवल एक सहेली थी, दूसरी सहेली एक बिल्ली थी। दो बार उसका गर्भपात हुआ।
‘गॉन विथ द विन्ड से पहले उसे टीबी हो चुकी थी, इसके बावजूद उसने बेहतरीन अभिनय किया और ऑस्कर पाया। बहुत पहले से वह मैनिक डिप्रेसिव थी। जल्द ही लॉरेन्स का किसी और से अफ़ेयर शुरू हो गया था। विवियन पर फ़िर आती हूं। अभी थोड़ा-सा ‘गॉन विथ द विन्ड’ देख लिया जाए।
फिल्म के अविस्मरणीय दृश्य
इस फ़िल्म के कुछ दृश्य अविस्मरणीय हैं। सबसे अधिक प्रभावित करता है जलता हुआ अटलांट, सड़क पर मरते लोग, और अपने घर, अपनी जमीन तारा की ओर घोड़ा गाड़ी में पलायन करती स्कारलेट। स्कारलेट से दूर जाता कैमरा पूरे परदे को भग्न लोकेल में बदल देता है, जहां तक नजर जाती है, बस उजाड़-ही-उजाड़ नजर आता है।
इसी तरह फ़िल्म की भव्यता के लिए एक शुरुआती दृश्य लिया जा सकता है जहां स्कारलेट (विवियन ली) और उसका पिता जमीन देख रहे हैं, कैमरा पीछे हटता जाता है और अंत में परदे पर केवल दो छायाएं और एक पेड़ और उनके पीछे बस जमीन-ही-जमीन नजर आती है।
एक और इसी तरह का दृश्य है, अटलांटा को खाली कराने वाले दृश्य में ढ़ेरों एक्स्ट्रा के बीच कैमरा घूमता है, लेकिन एक पल को भी उसकी आंख स्कारलेट ओ’हरा (विवियन ली) पर से नहीं हटती है। सारे समय मैक्स स्टेनर का संगीत विजुअल्स से तालमेल बैठाए हुए है।
ब्रिटिश नागरिक विवियन ली की अंतिम फ़िल्म ‘शिप ऑफ़ फ़ूल्स’ थी। क्लासिकल हॉलीवुड सिनेमा की 16वीं महान स्टार 8 जुलाई 1967 को टीबी के कारण जिंदगी की जंग हार गई।
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