एकतरफा प्रेम ऐसा है जैसे एकलव्य ने गुरु बनाया और धनुर्विद्या में पारंगत हुआ
- फोटो : iStock
एक और उदाहरण हमारे नए नवेले दाम्पत्य जीवन की शुरुआत के पहले पड़ोसी दम्पति का है। पति महाशय कभी पत्नी महाशय के पिता के घर में किरायेदार थे। अवसर का लाभ उठाकर दोनों पक्षों की सहमति से प्रेम उच्चतम स्तर पर पहुंचने के चलते गर्भधारण हो गया तो मजबूरी में यह प्रेम विवाह सम्पन्न हुआ था। रोजाना अर्धरात्रि को उनके बीच प्रति प्रेम यानी झगड़ा होता और भोर तक जारी रहता। दो बच्चे उसमें पिसते और हम निकटतम पड़ोसी होने के कारण जब तक वहां रहे तकरीबन रोज इस युद्ध की विभीषिका के भीषण शोर को झेलने के लिए अभिशप्त रहे।
ऐसे दर्जनों उदाहरण हैं, हर लेवल के। उच्चतम शैक्षिक स्तर धारी, आइएएस अफसरों से लेकर निम्नतम आय और शैक्षणिक वर्ग तक के। श्रद्धा के 35 टुकड़ों वाली प्रेम कहानी तो हाल की है। जब कथित प्रेम के ऐसी परिणति देखता हूँ तो मन में यह संतोष होता कि चलो अपने को ऐसा दोतरफा इश्क न हुआ तो अच्छा ही रहा, वरना अपना जीवन भी ऐसा हो सकता था कि कहना पड़ता ये जीना भी कोई जीना है लल्लू।
खैर ये जो प्यार है न इसकी तमाम तरह की परिणितियां अपन ने जो देखीं तो इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि प्यार का सर्वश्रेष्ठ रूप है एकतरफा प्यार। प्रेम गली अति सांकरी जा में दो न समाएं, जहां दुई मिट जाए एक ही रह जाए। एकतरफा प्रेम तो ऐसा है जैसे एकलव्य ने गुरु बनाया और धनुर्विद्या में पारंगत हुआ, अपना भी प्रेम के मामले में एकलव्य की भांति अपनी प्रेयसी की मूरत दिल में बसाकर कई ऐबों से बच गए, प्रेम को शिद्दत से महसूस किया, प्रेम से ही जीवन में सार्थक बदलाव आया।
आज अगर अपन बतौर पत्रकार, बतौर इंसान, बतौर पति, बतौर पुत्र, बतौर पिता अपनी भूमिकाएं और प्रेम स्नेह संजीदगी से महसूस कर रहे और निभा रहे हैं तो इसमें एकतरफा प्रेम की बड़ी भूमिका है। उस मूरत को दिल से सलाम क्योंकि उसके प्राण जो किसी और देह में बसे हैं, उसने मेरे अंदर मानवीय गुणों को जिस तरह अनुप्राणित किया, वही जीवन की पूंजी है। आखिर में मैं अपने प्रिय गीत से उस प्यार को सलाम भेजता हूं, उम्मीद है कि मेरे प्रेम की उस वक्त की त्वरा को मेरे सरकार अब भी समझ सकेंगे, क्योंकि कोई वक्त ऐसा होता है जो वहीं ठहरा रहता है, कहीं भी जाता नहीं, अटल, शाश्वत रहता है वो लम्हा जब पहला दीदार होता है, आनंद बक्षी साहब की पंक्तियों को मेरे दिल की पंक्तियां माना जाए-
ए प्यार तेरी पहली नजर को सलाम, उस गली, उस शहर, उस डगर को सलाम, .....ज़ेरो जबर को सलाम.......।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।