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डॉक्टर की फीस कम और सस्ता इलाज, ये प्लानिंग घटा देगी हर बीमारी का खर्च

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हेल्थ सेक्टर तेजी से बढ़ता जा रहा है और उसी तेजी के साथ बढ़ रहीं है इस सेक्टर की सेवाएं भी। - फोटो : File Photo
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हेल्थ सेक्टर तेजी से बढ़ता जा रहा है और उसी तेजी के साथ बढ़ रहीं है इस सेक्टर की सेवाएं भी। खास बात यह है कि महंगाई का असर भी इन सेवाओं पर देखने को मिला है। खासतौर पर स्वास्थ्य बीमा योजनाओं पर। मीडिया में आईं खबरों की मानें तो स्वास्थ्य बीमा देने वाली कंपनियां अब उपभोक्ताओं पर और ज्यादा बोझ डालने की तैयारी कर रही हैं। ऐसे में आपके लिए हेल्थ इंश्योरेंस लेना महंगा हो सकता है क्योंकि इसका सीधा असर आपकी प्रीमियम की राशि पर पड़ेगा। 

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क्यों बढ़ने जा रहा है प्रीमियम

हेल्थ इंश्योरेंस में प्रीमियम बढ़ने की सबसे बड़ी वजह है मेडिकल इमरजेंसी का तेजी से बढ़ना जबकि दूसरी ओर अस्पतालों में इलाज की फीस का तेजी से बढ़ना। बिगड़ती लाइफ स्टाइल के चलते जितनी तेजी से बीमारी के मामले बढ़े हैं उतनी ही तेजी से मेडिकल इंश्योरेंस कंपनियों के बीच क्लेम के मामले भी लगातार बढ़ते जा रहे हैं। स्वास्थ्य बीमा बाजार में भी तेजी बनी हुई है। कंपनियों को जो प्रीमियम ग्राहकों से पॉलिसी लेने के नाम पर मिलता है, वो क्लेम के मुकाबले काफी कम है। किसी भी मेडिकल कंपनी से हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते वक्त जरूरी है कि आप बहुत सी चीजों का ध्यान रखें। 


कम उम्र में ही स्वास्थ्य कवर खरीदें

बात जब स्वास्थ्य बीमा के कवर खरीदने की हो तो ऐसे कई पहलू होते हैं, जिसे ध्यान में रखना पड़ता है और बीमाकर्ता की उम्र भी इसी में से एक है। मेडिकल इंश्योरेंस लेने के लिए सबसे जरूरी है उम्र। इस तरह के इंश्योरेंस लेते हुए बेहतर होगा कि युवावस्था में ही पॉलिसी खरीद ली जाए ताकि उसका प्रीमियम कम भरना पड़े। कम उम्र में पॉलिसी खरीदने का फायदा यह होता है कि बढ़ती उम्र के साथ बीमारियों के बढ़ते खतरों के हिसाब से यह इंश्योरेंस बहुत काम के होते हैं। 

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इंश्योरेंस लेते वक्त यह भी जरूरी होता है कि आप हमेशा उम्र, सेहत और आय को ध्यान में रखते हुए किसी अच्छी बीमित राशि की पॉलिसी खरीदें। - फोटो : Pixabay
अच्छी राशि की पॉलिसी लें
इंश्योरेंस लेते वक्त यह भी जरूरी होता है कि आप हमेशा उम्र, सेहत और आय को ध्यान में रखते हुए किसी अच्छी बीमित राशि की पॉलिसी खरीदें। पॉलिसी खरीदते समय कम बीमित या जरूरत से ज्यादा बीमित राशि की पॉलिसी दोनों परेशानियां खड़ी कर सकती हैं। अगर आप जरूरत से ज्यादा राशि की पॉलिसी लेते हैं तो आपका प्रीमियम आपकी जेब पर भारी पड़ेगा और अगर आप कम बीमित राशि की पॉलिसी लेते हैं तो हो सकता है कि इलाज के लिए आपकी बीमा की रकम कम पड़ जाए। इसके अतिरिक्त बीमा लेते समय मुद्रास्फीति की दर को भी ध्यान में रखना पड़ता है। उदाहरण के लिए आज की तारीख में पांच लाख रुपये का बीमा आज से 5-10 साल बाद नाकाफी होगा।

लंबी अवधि वाली पॉलिसी चुनें
स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों को हर साल नवीनीकरण कराना पड़ता है। हालांकि कुछ ऐसी कंपनियां भी हैं जो एक बार में 2-3 साल तक का बीमा कवर प्रदान करती हैं। चूंकि लंबी अवधि वाली बीमा पॉलिसियों पर कंपनी की तरफ  से छूट प्रदान किया जाता है, इसलिए ऐसी पॉलिसी खरीदना अच्छा होता है।

फैमिली फ्लोटर पॉलिसी अपनाएं
स्वास्थ्य बीमा चुनते समय यह आवश्यक होता है कि आप अपने परिवार के सदस्यों का बखूबी ध्यान रखें। इसके लिए बीमाकर्ता चाहे तो फैमिली फ्लोटर पॉलिसी का चुनाव कर सकता है, जिसमें सभी बीमित सदस्यों पर बीमित राशि का प्रीमियम विभाजित कर दिया जाता है। चूंकि प्रीमियम की अदायगी कवरेज के आधार पर होती है अतएव स्वास्थ्य बीमा कंपनियां आपकी आवश्यकता के अनुरूप आपकी कवरेज में फेरबदल करने की इजाजत देती हैं।

दावा नहीं तो बोनस प्लान
इसके तहत अगर बीमाकर्ता ने सालभर में कोई दावा नहीं किया है तो कंपनियां दावा बोनस प्रदान करती हैं। अतएव इस विशेष प्रावधान की भी जांच पड़ताल कर लेनी चाहिए। आप चाहें तो इस दावा बोनस का उपयोग बिना किसी अतिरिक्त प्रीमियम की अदायगी कर बड़ा कवरेज लेने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।

अनंत पालीवाल बिजनेस जर्नलिस्ट हैं। वे पिछले 5 सालों से पर्सनल फाइनेंस देख रहे हैं। 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : यह लेखक के निजी विचार हैं. आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है. आप भी अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं. लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें.
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